बी के झा
NSK

कोलकाता/नई दिल्ली, 29 अप्रैल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान एक नया विवाद सामने आया है जिसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। डायमंड हार्बर के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में कई पोलिंग बूथों पर ईवीएम में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह के सामने टेप लगाए जाने के आरोप लगे हैं।इस घटनाक्रम ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है, जहां एक ओर भाजपा ने इसे “सुनियोजित धांधली” करार दिया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा और केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
चुनाव आयोग का रुख: सख्ती के संकेत
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है:जिन बूथों पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ (टेप) की पुष्टि होगी, वहां पुनर्मतदान (re-poll) कराया जाएगायदि किसी विधानसभा क्षेत्र में व्यापक स्तर पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो पूरे क्षेत्र में दोबारा मतदान भी संभव हैकानून विशेषज्ञों के अनुसार,“ईवीएम के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ चुनाव आचरण नियमों और Representation of the People Act, 1951 का गंभीर उल्लंघन है, जिसके तहत आपराधिक कार्रवाई तक हो सकती है।”
राजनीतिक विश्लेषण: “डायमंड हार्बर मॉडल” बनाम “सहानुभूति लहर”
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस मुद्दे को “डायमंड हार्बर मॉडल” बताते हुए आरोप लगाया कियह सुनियोजित रणनीति है जिससे मतदाताओं को भाजपा को वोट देने से रोका जा सके।विश्लेषकों का मानना है कि:अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह चुनाव की विश्वसनीयता को बड़ा झटका होगावहीं, अगर यह सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव साबित हुआ, तो यह सहानुभूति की राजनीति को जन्म दे सकता है
बीजेपी का हमला: लोकतंत्र खतरे में?
भारतीय जनता पार्टी का कहना है:“मतदाताओं के अधिकारों को छीनने की साजिश की जा रही है। चुनाव आयोग को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और प्रभावित सभी बूथों पर पुनर्मतदान कराना चाहिए।”भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया किवोट डालने पहुंचे लोगों को भ्रमित किया गयाकुछ जगहों पर उन्हें डराया-धमकाया भी गया
TMC का पलटवार: केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा पर पलटवार किया।ममता बनर्जी की पार्टी का कहना है:“केंद्रीय बलों के जरिए मतदाताओं, खासकर महिलाओं को डराया जा रहा है। भाजपा हिंसा का माहौल बनाकर चुनाव को प्रभावित करना चाहती है।”टीएमसी ने इसे “शीतलकुची मॉडल” बताते हुए आरोप लगाया किकेंद्रीय बलों द्वारा महिलाओं पर अत्याचार किए जा रहे हैंमतदाताओं को वोट देने से रोका जा रहा है
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया: भ्रम और भय का माहौल
फाल्टा और आसपास के इलाकों से मिली प्रतिक्रियाओं मेंकुछ मतदाताओं ने कहा कि उन्हें “बटन दबाने में परेशानी” हुईवहीं कई लोगों ने इन आरोपों को “बढ़ा-चढ़ाकर पेश” किया गया बतायाएक स्थानीय मतदाता ने कहा:“अगर मशीन के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो यह बहुत गंभीर बात है। हमें निष्पक्ष चुनाव चाहिए, किसी पार्टी का नहीं।
शिक्षाविदों की राय: लोकतंत्र की परीक्षा
राजनीति विज्ञान के शिक्षाविदों का मानना है:चुनाव केवल वोटिंग नहीं, बल्कि विश्वास की प्रक्रिया हैऐसे विवाद लोकतंत्र में संस्थागत भरोसे को कमजोर करते हैं“अगर मतदाता को यह लगे कि उसका वोट सही तरीके से दर्ज नहीं हो रहा, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को चुनौती है।
क्या हो सकता है आगे?
सीमित पुनर्मतदान – केवल प्रभावित बूथों परपूरे क्षेत्र में पुनर्मतदान – यदि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी साबित होती हैराजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि – दोनों पक्ष इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाएंगे
निष्कर्ष:
वोट की लड़ाई या भरोसे की?
बंगाल चुनाव अब सिर्फ सीटों की जंग नहीं रह गया है—यह विश्वास बनाम आरोप, और लोकतंत्र बनाम संदेह की लड़ाई बन गया है।
अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष जांच कर सख्त कदम उठाता है, तो यह लोकतंत्र की मजबूती होगी
लेकिन अगर ऐसे आरोप अनसुलझे रह जाते हैं, तो यह चुनावी प्रणाली पर स्थायी सवाल खड़े कर सकते हैं
अंतिम सवाल यही है:क्या यह वाकई “EVM छेड़छाड़” है या फिर “राजनीतिक नैरेटिव”?
इसका जवाब अब जांच और चुनाव परिणाम ही देंगे।
