बी के झा
NSK

पटना/ नई दिल्ली, 11 अक्टूबर
बिहार की सियासत में इन दिनों भोजपुरी तड़का भी खूब परोसा जा रहा है। कभी किसी नेता की रैली में गीतों की गूंज होती है तो कभी सुपरस्टार्स की एंट्री से माहौल गर्मा जाता है। लेकिन इसी बीच भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह ने ऐसा बयान दे दिया है जिसने चुनावी गलियारों में सन्नाटा और हलचल — दोनों एक साथ फैला दिए हैं।
पवन सिंह ने अपने आधिकारिक ‘X’ (ट्विटर) अकाउंट पर लिखा –
मैं पवन सिंह अपने भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूं कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और नाहीं मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा।इस एक बयान से उन सभी कयासों पर विराम लग गया जो पिछले कुछ दिनों से तेज़ी से उठ रहे थे कि पवन सिंह किसी सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।पवन के बयान के पीछे क्या है कहानी?दरअसल, पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा थी कि पवन सिंह किसी बड़ी पार्टी से टिकट लेकर बिहार की किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। उनकी लोकप्रियता, खासकर युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं में, कई राजनीतिक दलों के लिए ‘वोट मैगनेट’ मानी जा रही थी। लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया कि “उनका मकसद राजनीति करना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना है।” पत्नी ज्योति सिंह की प्रशांत किशोर से मुलाकात ने बढ़ाया सस्पेंसपवन सिंह के बयान के ठीक एक दिन पहले उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) से शेखपुरा में उनके आवास पर मुलाकात की थी।इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में अफवाहों की आंधी चल पड़ी —
क्या पवन सिंह जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले हैं?
लेकिन ज्योति सिंह ने खुद इस पर विराम लगाया और कहा,मैं किसी चुनाव या टिकट के लिए नहीं आई थी। मेरे साथ जो अन्याय हुआ है, वह किसी और महिला के साथ न हो, मैं उन महिलाओं की आवाज़ बनना चाहती हूं।वायरल वीडियो से मचा था हंगामाकुछ दिन पहले लखनऊ स्थित पवन सिंह के घर के बाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में ज्योति सिंह भावुक होकर रोती नज़र आईं। इसके बाद पवन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा और कहा कि “व्यक्तिगत विवाद को राजनीति से जोड़कर न देखा जाए।”इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीतिक हवा को और गर्म कर दिया था।अब क्या पवन सिंह राजनीति से दूर रहेंगे?भले ही उन्होंने कहा है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उनके शब्दों में छिपा आत्मविश्वास बताता है कि भविष्य में पवन सिंह राजनीति की राह से पूरी तरह अलग नहीं होंगे।उनका कहना है मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं, जहां ज़रूरत होगी, मैं वहां रहूंगा।”राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पवन सिंह का नाम किसी भी पार्टी के लिए “भोजपुरी ब्रैंड वैल्यू” जैसा है —
चाहे वे चुनाव लड़ें या नहीं, भीड़ खींचने की क्षमता उनमें गजब की है। जनता का मूड पवन सिंह के फैंस ने सोशल मीडिया पर लिखा हमारा हीरो ही असली देशभक्त है, चुनाव लड़ना जरूरी नहीं, दिल जीतना जरूरी है।तो कुछ यूजर्स ने मज़ाकिया अंदाज में कहा राजनीति में नहीं, ‘लॉलीपॉप लागेलू’ में ही रहिए भैया, वहीं धमाल मचता है! नतीजा: सियासी मंच पर भी सुपरस्टारभले ही पवन सिंह चुनावी अखाड़े में उतरने से फिलहाल पीछे हट गए हों, लेकिन उनका नाम और बयान बिहार की सियासत में “ब्लॉकबस्टर स्क्रिप्ट” की तरह चल रहा है।
जहां एक तरफ उनकी लोकप्रियता वोटरों को लुभा रही है, तो दूसरी तरफ उनका सधा हुआ बयान सियासी रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर रहा है —
क्या पवन सिंह भविष्य में राजनीति के असली “पावर स्टार” बन सकते हैं?
