अल-फलाह ट्रस्ट के संचालक जवाद सिद्दीकी पर जांच एजेंसियों की नजर, 90 करोड़ की ठगी कर हो चुका है फरार , दिल्ली कार ब्लास्ट केस में नया खुलासा — महू से जुड़े सुरागों ने खोलीं कई परतें

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/इंदौर, 13 नवंबर

दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच अब मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के महू तक जा पहुंची है। जांच एजेंसियों को यहां से ऐसे अहम सुराग मिले हैं जिनसे अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक जवाद अहमद सिद्दीकी पर शक गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि जवाद सिद्दीकी पहले भी महू में करीब 90 करोड़ रुपये की ठगी कर फरार हो चुका है। अब वही व्यक्ति दिल्ली धमाके से जुड़े नेटवर्क में सामने आया है, जिससे एजेंसियों की जांच और तेज हो गई है।

महू का पुराना ठग, जो बना ‘ट्रस्ट संचालक’जांच सूत्रों के अनुसार, जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से मध्य प्रदेश के महू का रहने वाला है। कुछ साल पहले उसने अपने भाई हमूद सिद्दीकी के साथ मिलकर एक चिट फंड कंपनी चलाई थी। इस कंपनी के जरिए उसने आम नागरिकों को ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर करीब 90 करोड़ रुपये की ठगी की थी।इस घोटाले के बाद दोनों भाई परिवार समेत लापता हो गए थे। कई वर्षों तक उनका कोई अता-पता नहीं चला।

अब वही नाम दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच में फिर उभर कर सामने आया है।शिक्षित ठग, जिसने भरोसे का जाल बुनासूत्रों ने बताया कि जवाद ने इंदौर के एसजीएसआईटीएस कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और बाद में सिविल सर्विसेज की तैयारी भी की थी। पर असफल होने के बाद उसने समाजसेवा के नाम पर “अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट” बनाया।

ट्रस्ट के जरिए उसने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थापना में भी भूमिका निभाई थी। यह वही विश्वविद्यालय है जिसे हाल ही में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने “अच्छी स्थिति में न होने” के कारण अपनी सदस्यता सूची से बाहर कर दिया है।हज यात्रा और निवेश के नाम पर ठगी

महू के कई पीड़ित अब सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि जवाद ने लोगों से हज यात्रा और निवेश योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये वसूले थे।

कुछ सेवानिवृत्त सैनिक परिवारों ने भी बताया कि उनसे जीवनभर की जमा-पूंजी “धार्मिक योजनाओं” के नाम पर ठग ली गई।पीड़ितों ने बताया कि सिद्दीकी का तरीका बहुत पेशेवर था —

वह खुद को धार्मिक और समाजसेवी छवि में पेश करता था, ताकि लोगों का भरोसा जीत सके।अब जांच एजेंसियों के रडार पर ट्रस्ट और फंडिंग नेटवर्कदिल्ली धमाके के बाद अल-फलाह ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी दोनों ही जांच के घेरे में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है ताकि संस्था की वित्तीय गतिविधियों और फंडिंग के स्रोतों की जांच की जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और अन्य एजेंसियां जवाद सिद्दीकी के बैंक खातों, ट्रस्ट से जुड़े दान और निवेश के प्रवाह की गहन पड़ताल कर रही हैं।गृह मंत्रालय की कड़ी नजरयह कार्रवाई उस उच्च स्तरीय बैठक के बाद तेज हुई, जिसकी अध्यक्षता गृहमंत्री अमित शाह ने की थी। बैठक में लाल किला क्षेत्र में हुए धमाके की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा हुई और कई अहम दिशा-निर्देश दिए गए।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब जांच एजेंसियों का ध्यान यह पता लगाने पर है कि क्या अल-फलाह ट्रस्ट के फंड का इस्तेमाल किसी आतंकी या अवैध गतिविधि में हुआ है।

निष्कर्ष

जवाद सिद्दीकी का नाम अब न केवल 90 करोड़ की ठगी बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील केस में भी आ गया है। उसका गायब होना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।अभी तक वह फरार है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियां उसके नेटवर्क को टुकड़ों में तोड़ने में जुटी हैं।अब पूरा देश यह देख रहा है कि क्या महू से निकलकर दिल्ली तक पहुंचा यह ठगी और शक का जाल आखिरकार जवाद सिद्दीकी की गिरफ्तारी तक पहुंचेगा या नहीं।

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