बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 6 दिसंबर
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शशि थरूर एक बार फिर सियासी सुर्खियों के केंद्र में हैं। पिछले एक सप्ताह में कांग्रेस की दो महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी, केंद्र सरकार की नीतियों की अचानक बढ़ी तारीफ और राष्ट्रपति भवन में आयोजित पुतिन के सम्मान भोज में उनकी उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म कर दी है कि क्या थरूर किसी सियासी ‘क्रॉसओवर’ की तैयारी में हैं?इन अटकलों के बीच कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर थरूर ने स्पष्ट कहा—
“मैं कांग्रेस पार्टी का सांसद हूं। चुने जाने के लिए बहुत मेहनत की है। कुछ और होने के लिए बहुत सोच-विचार और कई बातों को ध्यान में रखना होगा।”उनका जवाब आधा खंडन, आधी खुली खिड़की की तरह माना जा रहा है—जो कांग्रेस के भीतर बेचैनी और भाजपा खेमे में उत्सुकता दोनों को बढ़ा रहा है।राष्ट्रपति भवन के भोज में शामिल—
राहुल और खरगे को निमंत्रण नहीं राष्ट्रपति भवन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में शुक्रवार रात भोज आयोजित किया गया।गौर करने वाली बात यह रही कि—शशि थरूर को आमंत्रित किया गया,लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को न्योता नहीं मिला।थरूर ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कहा—“मैं यहां कुछ सालों बाद आया हूं। ऐसा लगता है कि उनके (सरकार के) नजरिये में कुछ बदलाव है और वे अन्य आवाजों के लिए थोड़ा खुल रहे हैं।”इस बयान ने राजनीतिक संकेतों को और तीखा कर दिया है।“कांग्रेस क्यों छोड़ूं?”—
थरूर ने दिया जवाब एनडीटीवी से बातचीत में थरूर ने कहा—“मुझे समझ नहीं आता कि यह सवाल क्यों पूछा जा रहा है। मैं कांग्रेस का सांसद हूं और अपने वोटर्स के लिए जिम्मेदार हूं। मेरे ऊपर उनका भरोसा है, और मैं उसकी पूर्ति की पूरी कोशिश कर रहा हूं।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भोज में उनकी मौजूदगी पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन एक्सटर्नल अफेयर्स के चेयरमैन के रूप में उनके दायित्व से जुड़ी थी।“विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय माहौल का प्रत्यक्ष अनुभव हमारे काम के लिए जरूरी है।
”दो बैठकों से दूरी—क्या कहीं गहरी नाराजगी?सूत्रों के मुताबिक,हाल ही में दिल्ली में हुई कार्यसमिति जैसी दो अहम बैठकों से थरूर की दूरी ने कांग्रेस हाईकमान को चिंतित किया है।पार्टी की दिशा और नेतृत्व शैली पर थरूर पहले भी सवाल उठाते रहे हैं।केरल में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी वे कई बार ‘स्वतंत्र लाइन’ लेते दिखे हैं।यह सब मिलकर यह संकेत देता है कि थरूर पार्टी के भीतर स्वतंत्र राजनीतिक स्पेस बनाने के प्रयास में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
1. “थरूर की राजनीति संकेतों से भरी होती है”वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एस. अरविंदन कहते हैं—“थरूर कभी सीधे अपने राजनीतिक इरादे प्रकट नहीं करते। उनकी भाषा संकेतों में होती है। दो बैठकों से दूरी और सरकार की तारीफें—ये ‘पॉलिटिकल पोस्चरिंग’ है। इससे कांग्रेस को दबाव में लाना भी हो सकता है, और भविष्य के विकल्प खुले रखना भी।”
2. “भाजपा के लिए थरूर एक ‘ट्रॉफी कैच’ होंगे”राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. मीरा नायर का कहना है—“केरल में भाजपा अपनी पैठ बढ़ाने में लगी है। अगर कोई कांग्रेस नेता भाजपा के लिए बड़ा वैल्यू एडिशन हो सकता है, तो वह शशि थरूर हैं। बौद्धिक छवि, वैश्विक पहचान और केरल में लोकप्रियता—ये तीन चीजें भाजपा के एजेंडे में फिट बैठती हैं।”
3. “कांग्रेस में वैकल्पिक नेतृत्व की कमी—थरूर की नाराजगी की वजह”सीनियर एडिटर और विश्लेषक अतुल चतुर्वेदी कहते हैं—“थरूर खुद को कांग्रेस के ‘थिंक टैंक’ का हिस्सा मानते हैं, लेकिन उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से दूर रखा जा रहा है। यह उनके भीतर नाराजगी बढ़ा रहा है। उनका सियासी स्टाइल कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति से मेल नहीं खाता।”
4. “थरूर तुरंत पार्टी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन दबाव बनाते रहेंगे”रणनीति विशेषज्ञ अनुज सिंह का दावा—“थरूर तुरंत कोई नाटकीय कदम नहीं उठाते। वे धीरे-धीरे जमीन तैयार करते हैं। अभी वे कांग्रेस से बाहर नहीं जाएंगे, लेकिन खुद को ‘राष्ट्रीय स्वीकार्यता’ की स्थिति में लगातार पेश करेंगे।”क्या भाजपा में शामिल होंगे?विश्लेषकों के अनुसार—यह संभावना कम है कि थरूर अचानक भाजपा में चले जाएं।लेकिन यह संभावना नकारा भी नहीं जा सकती कि वे भविष्य में “सहयोगात्मक” राजनीति के लिए नई भूमिका तलाशें।
भाजपा का इरादा केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले “एक बड़ा चेहरा” जोड़ने का है—और थरूर उस पर फिट बैठते हैं।
निष्कर्ष
थरूर फैक्टर’ से कांग्रेस की बेचैनी बढ़ीशशि थरूर के हालिया कदमों ने यह साफ कर दिया है कि—
वे कांग्रेस के भीतर ‘सीमित स्पेस’ में बंधे रहने के लिए तैयार नहीं हैं।
वे खुद को राष्ट्रीय कूटनीति, बौद्धिक राजनीति और व्यापक स्वीकृति वाले नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
कांग्रेस के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि पार्टी पहले ही आंतरिक असंतोष से जूझ रही है।आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा किथरूर कांग्रेस में ‘खिड़की खुली’ रखते हैं या फिर नया राजनीतिक दरवाज़ा तलाशते हैं।
