चुनाव बाद विधानसभा में पहली बार बोले तेजस्वी यादव; कहा—‘विपक्ष की आवाज़ भी बिहार के भविष्य की आवाज़ है’

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/ पटना, 2 दिसंबर

बिहार विधानसभा का 18वाँ सत्र मंगलवार को कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। नए विधायकों की शपथ के बाद सदन ने सर्वसम्मति से वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. प्रेम कुमार को विधानसभा का अध्यक्ष चुना। इस औपचारिकता के बीच लोगों की निगाहें उस क्षण पर भी टिकी थीं जब चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव पहली बार सदन में बोले। उनका वक्तव्य संयम, संतुलन और राजनीतिक परिपक्वता का संकेत देता रहा।“आशा है कि विपक्ष को समान अवसर मिलेगा” —

तेजस्वी विधानसभा में संबोधन की शुरुआत तेजस्वी यादव ने नव-निर्वाचित अध्यक्ष को बधाई देते हुए की। उन्होंने कहा—डॉ. प्रेम कुमार जी को मेरे पिता लालू प्रसाद यादव, महागठबंधन और पूरे बिहार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ। उनके लंबे अनुभव से सदन को निश्चित लाभ मिलेगा। हमें विश्वास है कि वे सत्ता और विपक्ष, दोनों को समान अवसर प्रदान करेंगे।”तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्पीकर की निष्पक्षता और सदन की गरिमा सर्वोपरि होती है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि अध्यक्ष नियमावली के अनुसार सभी की आवाज़ को समान महत्व देंगे।लोकतंत्र में विपक्ष सरकार का ‘विकल्प’ नहीं, ‘अहम अंग’ —

तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में विपक्ष की भूमिका पर जोर देते हुए कहा—लोकतंत्र में विपक्ष केवल आलोचक नहीं, बल्कि सरकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। बिहार को आगे ले जाने का लक्ष्य हम सबका साझा है।”उन्होंने सदन के हर सदस्य से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी विवाद से ऊपर उठकर सभी को मिलकर बिहार की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए।नए बिहार निर्माण का आह्वान—

बेरोजगारी, गरीबी और पलायन की चुनौतियाँ उठाईं तेजस्वी यादव ने सदन में जन-चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा—

बेरोजगारी, गरीबी और पलायन —

ये तीन बड़ी चुनौतियाँ आज भी बिहार की सच्चाई हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए नयी सोच, नयी ऊर्जा और एकजुट प्रयास की आवश्यकता है।”उनके अनुसार, चुनाव भले ही समाप्त हो गए हों, लेकिन जनता की उम्मीदों का नया अध्याय अब शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार को ‘अग्रणी राज्य’ बनाने का संकल्प विपक्ष भी उतनी ही दृढ़ता से लेकर चला रहा है, जितना सत्ता पक्ष।“विपक्ष का काम आईना दिखाना है; इसमें निजी कटुता नहीं”तेजस्वी ने अपने भाषण के अंत में सरकार को रचनात्मक सुझाव दिए और कहा—

विपक्ष का काम सरकार की गलतियों को आईना दिखाना है। इसमें कोई व्यक्तिगत कटुता नहीं होती। यह जनता के हित में किया जाने वाला कर्तव्य है।उन्होंने सत्ता पक्ष से आग्रह किया कि वे विपक्ष की आवाज़ को ‘विरोध’ नहीं, बल्कि ‘सुझाव’ के रूप में सुनें, क्योंकि आलोचना भी लोकतंत्र को मजबूत करती है।

निष्कर्ष

चुनाव के बाद पहली बार सदन में आए तेजस्वी यादव का भाषण न सिर्फ संयमित, बल्कि भविष्य की राजनीति के संकेतों से भी भरपूर नजर आया। उनके वक्तव्य में परिपक्वता, रचनात्मक विपक्ष और जन मुद्दों के प्रति गंभीरता की झलक स्पष्ट दिखी। नए अध्यक्ष के चयन से लेकर बिहार के बड़े मुद्दों तक—

तेजस्वी का संबोधन बताता है कि विपक्ष आने वाले दिनों में सदन में सक्रिय और सजग भूमिका निभाने को तैयार है।

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