बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 27 नवंबर
राहुल गांधी पर भाजपा के विदेशी नैरेटिव वाले आरोप से लेकर बांग्लादेश में उग्रवाद तक1. भाजपा का दावा — “विदेशों से राहुल गांधी के लिए चल रहा नैरेटिव वार”RSS–PM मोदी को निशाने पर, सिंगापुर–पाकिस्तान से अकाउंट सक्रिय!”**नई दिल्ली | राजनीति में बयानबाज़ी नई नहीं,लेकिन गुरुवार का दिन भाजपा–कांग्रेस टकराव को नए स्तर पर ले गया।भाजपा के मुखर प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि—पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर और वेस्ट एशिया के फेक सोशल मीडिया अकाउंट राहुल गांधी के इशारे पर भारत विरोधी माहौल बना रहे हैं।”पात्रा ने यह भी कहा कि विदेशी धरती पर बैठकर RSS व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने का एक सुनियोजित डिजिटल अभियान चलाया जा रहा है।उनके अनुसार“राहुल गांधी को प्रमोट करने वाले अकाउंट भारतीय भी नहीं हैं,न वोटर, न नागरिक—लेकिन नैरेटिव हमारे यहाँ सेट कर रहे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,यह आरोप सीधे तौर पर 2026 लोकसभा रणनीति से जुड़ा संकेत माना जा रहा है—जहां ‘डिजिटल इकोसिस्टम युद्ध’ बड़ा हथियार बनने वाला है।
2. महाराष्ट्र में सियासी बवंडर—शिंदे सेना बनाम भाजपाराणे बंधुओं के स्टिंग ने गठबंधन की दरारें उजागर कीं**महाराष्ट्र की महायुति सरकार मानो अंदरूनी विस्फोटों के दौर से गुजर रही हो।शिवसेना विधायक नीलेश राणे द्वारा भाजपा कार्यकर्ता के घर पर कथित “नकदी स्टिंग” सेगठबंधन की खटास खुले मंच पर आ गई।भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सवाल उठाया—क्या किसी के शयनकक्ष में कैमरा लेकर घुसना स्टिंग है या मर्यादा भंग?”और दिलचस्प यह कि भाजपा में मौजूद उनके ही भाई नितेश राणे ने नीलेश के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार—यह विवाद महायुति के भीतर शिंदे–फडणवीस समीकरण के तनाव,और सत्ता के लिए हो रहे सूक्ष्म शक्ति-संघर्ष को उजागर करता है।-
3. बांग्लादेश में चरमपंथ का नंगा नाचअल्पसंख्यक निशाने पर, यूनुस सरकार मौन दर्शक**ढाका से आने वाली खबरें चिंताजनक हैं।शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद सेदेश में नियंत्रण की डोर ढीली पड़ी है।मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था पर काबू पाने में विफल मानी जा रही है,और इस बीच इस्लामी कट्टरपंथी संगठन हिंदुओं, सूफी बाउल गायकों और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ा रहे हैं।सबसे गंभीर बात—सरकार की चुप्पी ने आम जनता में भय का माहौल खड़ा कर दिया है।विशेषज्ञों का कहना है कि—
बांग्लादेश फिर 2005–2006 की चरमपंथी हिंसा के दौर में लौटता दिख रहा है,और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा।”
4. कर्नाटक में कुर्सी की कलह—सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमारऔर सोशल मीडिया पर शिवकुमार का ‘क्रिप्टिक तीर’**कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का तनाव सतह पर आ गया है। CM सिद्धारमैया ने संकेत दिया कि हाईकमान ने बुलाया तो वे और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली की ओर रुख करेंगे।ऐसे समय में शिवकुमार का सोशल मीडिया संदेश(“
शब्दों की ताकत ही दुनिया की ताकत है”)राजनीतिक गलियारों में तेज़ी से चर्चाओं का विषय बना है—क्योंकि “शब्दों की ताकत” अक्सर कुर्सी की खींचतान का प्रतीक बयान मानी जाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में कांग्रेस का पावर-सेंटर दो भागों में बंट गया है,और यह स्थिति 2025 के विधानसभा समीकरण को प्रभावित कर सकती है।5. दिल्ली में व्यापारी की हैरान करने वाली साजिश
50 लाख के कर्ज से घबराकर बनाया ‘डमी शव’, पुलिस ने मिनटों में खोली परतेंअपराध जगत की विचित्र खबर राजधानी दिल्ली से आई।एक कपड़ा व्यापारी, 50 लाख के कर्ज में डूबा,अपनी मौत का नाटक रचकर बीमा वसूली की योजना बना रहा था।ब्रजघाट श्मशान घाट मेंचिता पर जब वास्तविक शव की जगह प्लास्टिक का पुतला दिखाई दिया,तो प्रशासन में हड़कंप मच गया।पुलिस ने थोड़ी सी पूछताछ में ही व्यापारी और उसके साथी की पूरी कहानी खोल दी
अधिकारियों का कहना है कि—अगर समय रहते भंडाफोड़ न होता,तो यह बीमा धोखाधड़ी का बड़ा मामला बन सकता था।
निष्कर्ष
भारत–बांग्लादेश की राजनीति और समाज एक ही समय मेंतीन मोर्चों पर संघर्ष करती दिखाई दे रही है—डिजिटल युद्ध (राहुल गांधी–BJपी विवाद)सत्ता अस्थिरता (महाराष्ट्र और कर्नाटक)चरमपंथ की चुनौती (बांग्लादेश)आर्थिक दबाव से उपजे अपराध (दिल्ली व्यापारी कांड)इन सभी खबरों की धड़कन बता रही है किआने वाले हफ्ते उपमहाद्वीप की राजनीति के लिएबेहद निर्णायक साबित होंगे।
