बी के झा
NSK


नई दिल्ली/ वाशिंगटन/ तेहरान, 2 जुन
मध्य पूर्व एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां एक गलत फैसला पूरे क्षेत्र को व्यापक युद्ध की आग में झोंक सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रही संघर्षविराम और शांति समझौते की कोशिशों के बीच इजरायल ने लेबनान में नया सैन्य मोर्चा खोलकर हालात को और विस्फोटक बना दिया है। इजरायली सेना द्वारा लेबनान के भीतर प्रवेश कर ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा करने की खबर ने न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है, बल्कि वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच भी गंभीर मतभेदों को उजागर कर दिया है।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर कड़ी फटकार लगानी पड़ी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह बातचीत सामान्य राजनयिक वार्ता नहीं, बल्कि एक तीखी राजनीतिक भिड़ंत में बदल गई।
फोन कॉल जिसने उजागर कर दी दरार
अमेरिकी मीडिया आउटलेट “एक्सियोस” के अनुसार, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत बेहद तनावपूर्ण रही। सूत्रों का दावा है कि ट्रंप ने इजरायली नेतृत्व पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी आक्रामक नीतियां न केवल क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल रही हैं बल्कि अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को भी कमजोर कर रही हैं।रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके तो इजरायल अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि पहली बार अमेरिकी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से इजरायल की रणनीति को लेकर असहज दिखाई दे रहा है।
लेबनान बना नई जंग का मैदान
गाजा और ईरान के मोर्चे पर तनाव अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि लेबनान एक बार फिर संघर्ष का केंद्र बन गया। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान का विस्तार करते हुए कई रणनीतिक ठिकानों पर कब्जे का दावा किया है।इस कार्रवाई को लेकर कई पश्चिमी देशों ने भी चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में चल रही शांति प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि लेबनान संघर्ष केवल इजरायल और हिज्बुल्ला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार सीधे अमेरिका-ईरान वार्ता से भी जुड़े हुए हैं।
ईरान का पलटवार: होर्मुज फिर बन सकता है हथियार
इजरायल की कार्रवाई से नाराज ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइफलाइन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की चेतावनी देकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लेबनान में जारी सैन्य अभियान युद्धविराम की भावना के खिलाफ है और इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।ईरान का यह संकेत केवल राजनीतिक बयान नहीं माना जा रहा। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग प्रभावित होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।
ट्रंप की उम्मीद: अगले सप्ताह हो सकती है बड़ी डील
तनाव के बीच भी ट्रंप प्रशासन उम्मीद नहीं छोड़ रहा। एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ समझौते की दिशा में बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है और संभव है कि अगले सप्ताह कोई बड़ी प्रगति देखने को मिले।ट्रंप ने कहा कि युद्ध के मैदान में मिली जीत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण एक ऐसा समझौता होगा जो पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति की नींव रख सके।हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लेबनान संकट फिलहाल इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
कूटनीति बनाम सैन्य रणनीति
पिछले 48 घंटों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से अलग-अलग बातचीत कर तनाव कम करने की कोशिश की है। प्रस्तावित योजना के तहत हिज्बुल्ला को मिसाइल हमले रोकने और इजरायल को आगे सैन्य कार्रवाई से बचने का सुझाव दिया गया है।लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि राजनीतिक समझौते और सैन्य वास्तविकता के बीच की दूरी अभी भी काफी बड़ी है।
पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व परमध्य पूर्व का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है। इसके प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकते हैं।यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल होती है तो यह वर्षों से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है। लेकिन यदि लेबनान में संघर्ष और बढ़ता है तथा होर्मुज को लेकर टकराव गहराता है तो पूरी दुनिया को एक नए भू-राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
एक तरफ ट्रंप शांति समझौते का सपना देख रहे हैं, दूसरी तरफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई और ईरान की कड़ी चेतावनियां उस सपने को चुनौती दे रही हैं। फोन पर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई तीखी बातचीत केवल दो नेताओं के बीच मतभेद नहीं, बल्कि मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीतिक तस्वीर का संकेत है।
अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगले कुछ दिनों में कूटनीति जीतती है या फिर बारूद की गंध एक बार फिर पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक देती है।
