दूध के बाद अब तेल का वार: बिहार में पेट्रोल-डीजल 3 रुपये से ज्यादा महंगा, महंगाई पर सियासत तेज” पश्चिम एशिया युद्ध की आग बिहार तक पहुंची, जनता बेहाल; विपक्ष बोला— ‘महंगाई मैन चला रहे वसूली अभियान’

बी के झा

NSK

पटना, 15 मई

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध की तपिश अब बिहार की सड़कों और आम आदमी की रसोई तक पहुंच गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये से अधिक की भारी बढ़ोतरी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दूध की कीमतों में हालिया उछाल से पहले ही परेशान जनता पर अब ईंधन महंगाई का नया बोझ पड़ गया है। राजधानी पटना में पेट्रोल 108.67 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.65 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर समेत कई जिलों में आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।पेट्रोल में 3 रुपये 32 पैसे और डीजल में 3 रुपये 13 पैसे की बढ़ोतरी ने बाजार से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बस, ऑटो और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ेगा, जिसका सीधा असर सब्जी, अनाज, दूध, दवा और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ेगा। यानी महंगाई की नई लहर अब हर घर का बजट बिगाड़ सकती है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “महंगाई मैन” बताते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही जनता से “वसूली अभियान” शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात का बहाना बनाकर जनता की जेब पर लगातार बोझ डाल रही है।

वहीं राजद ने भी “डबल इंजन सरकार” को घेरते हुए कहा कि बिहार की जनता को विकास नहीं, सिर्फ महंगाई मिली है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि सीधे जनता की नाराजगी और वोट की राजनीति से जुड़ा विषय बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा तो आने वाले दिनों में महंगाई और भी विकराल रूप ले सकती है।

पटना विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि डीजल महंगा होने का सबसे ज्यादा असर परिवहन और खेती पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक प्रभावित होगी।

बिहार सरकार हालांकि इस बढ़ोतरी को वैश्विक संकट का परिणाम बता रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईंधन बचत का संदेश देते हुए अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या घटा दी है और शुक्रवार को पैदल सचिवालय पहुंचे। सरकार का कहना है कि केंद्र हालात पर नजर बनाए हुए है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण यह स्थिति बनी है।लेकिन जनता के बीच सरकार की सफाई से ज्यादा महंगाई का दर्द दिखाई दे रहा है।

पटना के ऑटो चालक रमेश साह कहते हैं, “कमाई पहले ही कम है, अब तेल महंगा हो गया। किराया बढ़ाएं तो यात्री नाराज, नहीं बढ़ाएं तो परिवार चलाना मुश्किल।” वहीं मुजफ्फरपुर की गृहिणी नीलम देवी का कहना है, “दूध महंगा हुआ, अब पेट्रोल-डीजल भी। हर हफ्ते खर्च बढ़ रहा है लेकिन आमदनी नहीं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत की अपील के बाद भाजपा नेता सादगी का संदेश देने में जुटे हैं, लेकिन विपक्ष इसे सिर्फ “प्रतीकात्मक राजनीति” बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि जनता को सलाह नहीं, राहत चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बढ़ोतरी कुछ दिनों की है या बिहार महंगाई के नए दौर में प्रवेश कर चुका है?

फिलहाल जनता के बीच यही चर्चा है कि दूध के बाद अब तेल ने भी रसोई और जेब—दोनों का संतुलन बिगाड़ दिया है।

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