नीट पेपर लीक पर केजरीवाल का बड़ा हमला: “नेपाल-बांग्लादेश का जेन जी सरकार बदल सकता है तो भारत का युवा भ्रष्टाचारियों को जेल क्यों नहीं भेज सकता?”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 13 मई

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहे संकट के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री तथा Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर अब तक का सबसे तीखा राजनीतिक हमला बोला है। नीट पेपर लीक विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने न केवल भाजपा सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए, बल्कि देश के युवाओं—विशेषकर “जेन जी” यानी नई पीढ़ी—से सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की खुली अपील भी कर दी।

केजरीवाल के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि उन्होंने अपने संबोधन में पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की युवा पीढ़ी ने सत्ता परिवर्तन तक कर दिया, तो भारत के युवा पेपर लीक कराने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले नेताओं को जेल क्यों नहीं भेज सकते।

“देश का युवा कब तक लुटता रहेगा?”

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि देश के करोड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य लगातार दांव पर लगाया जा रहा है और सरकारें केवल बयानबाजी तक सीमित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद अब तक 93 बड़े पेपर लीक मामले सामने आए हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले उन राज्यों से जुड़े हैं जहां भाजपा की सरकारें रही हैं।

उन्होंने कहा—“उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड… जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां सबसे ज्यादा पेपर लीक हुए। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ सिस्टम फेल है या इसके पीछे कोई संगठित राजनीतिक संरक्षण भी है?”

केजरीवाल ने दावा किया कि नीट पेपर लीक मामले की जांच की सुई भी राजस्थान तक पहुंच रही है और जिन लोगों पर शक जताया जा रहा है, उनमें भाजपा से जुड़े नाम सामने आ रहे हैं।“

सीबीआई क्या करेगी, जब ऊपर तक खेल चल रहा हो?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोगों पर ही आरोप हों तो जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कैसे करेंगी।

उन्होंने कहा—“सीबीआई उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जिन पर पेपर लीक कराने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां बेचारी क्या करेंगी?

अगर ऊपर से संरक्षण मिलेगा तो नीचे का नेटवर्क कैसे टूटेगा?”

केजरीवाल का यह बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर हमला माना जा रहा है।“नेपाल और बांग्लादेश का जेन जी कर सकता है तो भारत का युवा क्यों नहीं?”

अपने संबोधन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने सबसे ज्यादा जोर युवाओं की भूमिका पर दिया। उन्होंने पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश में हाल के वर्षों में हुए बड़े छात्र आंदोलनों और सत्ता परिवर्तन का जिक्र करते हुए भारतीय युवाओं को राजनीतिक रूप से जागरूक होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा—“मेरा देश के जेन जी से सीधा सवाल है

क्या इसी तरह पेपर लीक होते रहेंगे और आप चुप रहेंगे?

अगर नेपाल और बांग्लादेश का जेन जी अपनी सरकारों को बदल सकता है, तो क्या भारत का युवा पेपर लीक कराने वाले मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकता?

मुझे देश के युवाओं पर भरोसा है।”उन्होंने आगे कहा कि देश के बड़े नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, इसलिए उन्हें भारतीय छात्रों की समस्याओं की गंभीरता का एहसास नहीं है।“हमारे देश के बड़े नेताओं ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो झोला उठाकर चले जाएंगे।

लेकिन इस देश का आम युवा कहां जाएगा?

उसकी जिंदगी, उसका भविष्य, उसका परिवार सब यहीं है। इसलिए देश को बचाने की जिम्मेदारी भी इसी युवा पीढ़ी की है।”“सिस्टम नहीं, टॉप जिम्मेदार है”अरविंद केजरीवाल ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो पेपर लीक को केवल “सिस्टम फेलियर” कहकर मामला खत्म करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि “सिस्टम” कोई अदृश्य शक्ति नहीं, बल्कि उसके पीछे बैठे लोग असली जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा—“जब हर साल पेपर लीक हो रहा है तो इसका मतलब है कि पैसा ऊपर तक पहुंच रहा है। सिस्टम की बात करके आप उन लोगों को बचा रहे हैं जो इस पूरे खेल के असली मास्टरमाइंड हैं। सीधे आरोप लगाइए, जिम्मेदार लोगों को जेल भेजिए और सड़कों पर उतरकर आंदोलन कीजिए।”

भाजपा का पलटवार

केजरीवाल के बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल युवाओं को भड़काने और देश में अराजक माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।भाजपा नेताओं का कहना है कि नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों के हिंसक आंदोलनों का उदाहरण देकर भारत में आंदोलन की अपील करना “गैर-जिम्मेदाराना राजनीति” है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि नीट पेपर लीक मामले की जांच जारी है और दोषियों पर कार्रवाई हो रही है।

विपक्षी राजनीति का नया केंद्र बना “युवा आक्रोश

”राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दे विपक्ष के सबसे बड़े हथियार बन सकते हैं। देशभर में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों खर्च करते हैं और जब परीक्षा रद्द होती है या पेपर लीक सामने आता है तो युवाओं में गहरा असंतोष पैदा होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार केजरीवाल अब उसी युवा असंतोष को राजनीतिक आंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

“जेन जी” शब्द का प्रयोग भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे सोशल मीडिया और डिजिटल दौर की नई पीढ़ी को संबोधित करता है।

क्या आंदोलन की नई राजनीति शुरू होगी?

देश में पिछले कुछ वर्षों में किसान आंदोलन, अग्निवीर योजना के विरोध और बेरोजगारी को लेकर युवाओं के प्रदर्शन पहले ही सरकार के लिए चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में केजरीवाल की अपील यह संकेत दे रही है कि विपक्ष अब छात्र और युवा आंदोलनों को केंद्र में रखकर नई राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहता है।

हालांकि सवाल यह भी है कि क्या भारत का युवा वर्ग वास्तव में संगठित होकर बड़े राजनीतिक आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ेगा या यह बयान केवल राजनीतिक दबाव बनाने तक सीमित रहेगा।लेकिन इतना तय है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं रह गया है। यह देश की राजनीति, युवाओं के भरोसे और व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा राष्ट्रीय विमर्श बन चुका है।

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