बी के झा
NSK


नई दिल्ली/तेल अवीव / यरुशलम / यूरोपीय राजधानियाँ, 26 दिसंबर
गाज़ा युद्ध, हिज़्बुल्लाह की चुनौती और ईरान के साये के बीच घिरे इज़रायल ने अब पश्चिमी सहयोगियों को भी सख़्त संदेश दे दिया है। वेस्ट बैंक (जुडिया–सामरिया) में नई यहूदी बस्तियों को मंज़ूरी देने के फैसले पर जब 14 देशों ने संयुक्त अपील जारी कर आपत्ति जताई, तो इज़रायल ने उसे सीधे-सीधे खारिज कर दिया। इज़रायली विदेश मंत्री गिदोन सार का बयान असाधारण रूप से तीखा था—“विदेशी सरकारें इज़रायल की भूमि में रहने के यहूदियों के अधिकार को सीमित नहीं कर सकतीं।”
यह प्रतिक्रिया केवल एक कूटनीतिक असहमति नहीं, बल्कि इज़रायल और पश्चिम के बीच गहराते वैचारिक टकराव का संकेत मानी जा रही है।
मामला क्या है?
इज़रायली कैबिनेट ने हाल ही में वेस्ट बैंक में 11 नई यहूदी बस्तियों की स्थापना को मंज़ूरी दी है। इसके साथ ही 8 अन्य बस्तियों को औपचारिक मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इज़रायल का तर्क है कि यह फैसला—यहूदियों के ऐतिहासिक और धार्मिक अधिकारों से जुड़ा है राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करता है आतंकवाद और फिलिस्तीनी सशस्त्र गुटों पर रणनीतिक दबाव बनाता है लेकिन पश्चिमी देशों का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) की भावना के खिलाफ है।
14 देशों की आपत्ति क्यों?
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, जापान समेत 14 देशों ने साझा बयान में कहा कि—वेस्ट बैंक में बस्तियों का विस्तार अवैध है इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी इज़रायल–फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंचेगा इन देशों ने इज़रायल से फैसला वापस लेने की अपील की थी।
इज़रायल का पलटवार: सिर्फ राजनीति नहीं, पहचान का सवाल राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इज़रायल की प्रतिक्रिया के पीछे केवल सुरक्षा या भूमि का मुद्दा नहीं, बल्कि यहूदी पहचान और संप्रभुता का प्रश्न है।
एक वरिष्ठ मध्य-पूर्व विशेषज्ञ कहते हैं,“इज़रायल इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं, बल्कि यहूदियों के ऐतिहासिक अधिकारों पर नैतिक हमला मानता है।विदेश मंत्री गिदोन सार ने साफ कहा कि इस फैसले को पलटने की अपील“नैतिक रूप से गलत और यहूदियों के खिलाफ भेदभाव”है।
शिक्षाविदों की राय:
अंतरराष्ट्रीय कानून बनाम ऐतिहासिक दावा
अंतरराष्ट्रीय कानून के विद्वानों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुसार वेस्ट बैंक अधिकृत क्षेत्र (Occupied Territory) है, जहां बस्तियों का विस्तार अवैध माना जाता है।
वहीं, इज़रायली और यहूदी इतिहास के अध्येता कहते हैं—“जुडिया और सामरिया यहूदी सभ्यता का केंद्र रहे हैं। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कानून इस ऐतिहासिक निरंतरता को नज़रअंदाज़ करता है।यहीं से टकराव पैदा होता है—
कानून बनाम स्मृति, वैश्विक नियम बनाम धार्मिक-राष्ट्रीय पहचान।
अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार बस्तियों का विस्तार केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य रणनीति का हिस्सा भी है।“इज़रायल मानता है कि वेस्ट बैंक में मज़बूत यहूदी मौजूदगी उसकी गहराई वाली सुरक्षा (Strategic Depth) को बढ़ाती है,”एक पूर्व सैन्य अधिकारी का कहना है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि इससे—फिलिस्तीनी आक्रोश बढ़ेगा वेस्ट बैंक में हिंसा तेज हो सकती है गाज़ा युद्ध के बाद पहले से ही दबाव में चल रहे इज़रायल पर कूटनीतिक अलगाव का खतरा बढ़ेगा पश्चिम और इज़रायल: दोस्ती में दरार?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद दिखाता है कि—
पश्चिमी देश मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून को प्राथमिकता दे रहे हैंजबकि इज़रायल सुरक्षा, इतिहास और धार्मिक अधिकार कोएक यूरोपीय मामलों के जानकार कहते हैं,“यह इज़रायल और पश्चिम के बीच मूलभूत दृष्टिकोण का टकराव है, जिसे केवल बयानबाज़ी से नहीं सुलझाया जा सकता।”
निष्कर्ष:
यह सिर्फ बस्तियों का विवाद नहीं
वेस्ट बैंक की बस्तियों पर उठा यह तूफ़ान दरअसल—यहूदी अधिकार बनाम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सुरक्षा बनाम शांति प्रक्रिया संप्रभुता बनाम वैश्विक दबाव का संघर्ष है।इज़रायल ने साफ कर दिया है कि वह अपने फैसलों पर विदेशी हिदायतें स्वीकार नहीं करेगा, चाहे आलोचना मित्र देशों की ओर से ही क्यों न आए।
अब सवाल यह नहीं कि बस्तियाँ बनेंगी या नहीं—
सवाल यह है कि क्या पश्चिम और इज़रायल एक ही भाषा में बात कर पा रहे हैं, या यह दरार आगे चलकर और गहरी होगी?
