बी के झा
NSK

लखनऊ/ नई दिल्ली, 18 मई
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता Rajkumar Bhati के बयान को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच अब सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संयमित भाषा अपनाने की सीख दी है।लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में रविवार को हुई मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने राजकुमार भाटी से स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक जीवन में ऐसी कोई बात नहीं कही जानी चाहिए जिससे किसी भी समाज, वर्ग या व्यक्ति को अपमानित अथवा आहत महसूस हो।
दरअसल, हाल ही में राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाकर समाजवादी पार्टी को घेरने की कोशिश की, वहीं ब्राह्मण समाज के कई संगठनों ने भी नाराजगी जाहिर की थी। बढ़ते विवाद के बीच अखिलेश यादव की यह मुलाकात और संदेश राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।“
संविधान और लोकतंत्र बचाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य”
मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने पार्टी की विचारधारा और सामाजिक नीति पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करके ही सामाजिक न्याय की स्थापना संभव है। इसके लिए समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना जरूरी है।अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की मूल भावना “सबका सम्मान” है और पार्टी की राजनीति सामाजिक समरसता पर आधारित है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को चेतावनी भरे अंदाज में यह भी संकेत दिया कि व्यक्तिगत बयानबाजी पार्टी की व्यापक सामाजिक रणनीति को नुकसान पहुंचा सकती है।
पीडीए फॉर्मूले पर फिर जताया भरोसा
सपा प्रमुख ने इस दौरान अपने चर्चित “पीडीए” फॉर्मूले को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि पीड़ित अगड़े, वंचित तबके और महिलाओं को जोड़ने वाला व्यापक सामाजिक गठबंधन है।अखिलेश ने दावा किया कि यही सामाजिक एकता वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
सपा ने भी जारी किया संदेश
Samajwadi Party ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस मुलाकात की जानकारी साझा की। पार्टी की ओर से बताया गया कि राजकुमार भाटी और अखिलेश यादव के बीच सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही सभी कार्यकर्ताओं को सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और मर्यादित आचरण करने का निर्देश दिया गया।
ब्राह्मण समाज ने किया स्वागत
अखिलेश यादव के संयम और सामाजिक सम्मान वाले बयान का ब्राह्मण समाज के कई संगठनों ने स्वागत किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा प्रमुख ने समय रहते विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश की है, ताकि पार्टी की सामाजिक छवि पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में नेताओं के बयान केवल व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक दल की सोच के रूप में देखे जाते हैं।
यही वजह है कि अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर तुरंत हस्तक्षेप कर पार्टी को स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है।
