बी के झा
नई दिल्ली, 9 मई
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों, समुद्री सुरक्षा के बदलते समीकरणों और भारतीय नौसेना के तीव्र आधुनिकीकरण के बीच केंद्र सरकार ने अनुभवी सैन्य अधिकारी Vice Admiral Krishna Swaminathan को देश का नया नौसेना प्रमुख नियुक्त किया है। वर्तमान में पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रहे वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 31 मई को भारतीय नौसेना प्रमुख का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।
भारतीय नौसेना के इतिहास में यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है। चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुके हैं। ऐसे दौर में वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन जैसे अनुभवी अधिकारी का नेतृत्व नौसेना के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
1987 में नौसेना में हुए थे शामिल वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त किया था। वे संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ माने जाते हैं। लगभग चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने नौसेना के कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और रणनीतिक पदों पर कार्य किया है।उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित युद्धपोतों और सैन्य जहाजों की कमान संभाली है। इनमें विमान वाहक पोत INS Vikramaditya, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS Mysore और मिसाइल कार्वेट INS Kulish जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा वाइस
एडमिरल स्वामीनाथन केवल सैन्य संचालन में ही नहीं, बल्कि अकादमिक और रणनीतिक अध्ययन में भी गहरी पकड़ रखते हैं। वे National Defence Academy, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। इसके अलावा उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के संयुक्त सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज, अमेरिका के प्रतिष्ठित नेवल वॉर कॉलेज और मुंबई विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके स्वामीनाथन को वैश्विक समुद्री रणनीति और रक्षा कूटनीति का गहरा जानकार माना जाता है। यही कारण है कि उन्हें नौसेना के भविष्य के रणनीतिक ढांचे को मजबूत करने वाला अधिकारी माना जा रहा है।
आधुनिक नौसेना निर्माण में अहम भूमिका
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दक्षिणी नौसेना कमान में चीफ ऑफ स्टाफ ऑफिसर (ट्रेनिंग) के रूप में उन्होंने नौसेना की प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक बनाने और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कीं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना स्वदेशी रक्षा तकनीक, आधुनिक युद्ध प्रणाली और समुद्री निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूत करने पर विशेष जोर दे सकती है।
कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित
देश के प्रति उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है। ये सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों में असाधारण नेतृत्व और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं।
क्या होती है नौसेना प्रमुख की भूमिका?
भारतीय नौसेना प्रमुख देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी होते हैं। उनका मुख्य दायित्व भारतीय समुद्री सीमाओं की रक्षा, युद्धकालीन रणनीति तैयार करना, नौसैनिक अभियानों की निगरानी करना और नौसेना के आधुनिकीकरण को दिशा देना होता है।इसके अलावा नौसेना प्रमुख सरकार को समुद्री सुरक्षा और सामरिक मामलों पर सलाह भी देते हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को देखते हुए यह पद राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
चुनौतियां भी कम नहीं
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ऐसे समय में नौसेना की कमान संभाल रहे हैं, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। चीन की समुद्री विस्तार नीति, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, ड्रोन और साइबर युद्ध जैसी नई चुनौतियां भारतीय नौसेना के सामने बड़ी परीक्षा बनकर उभर रही हैं।
ऐसे में रक्षा विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना न केवल तकनीकी रूप से और अधिक आधुनिक बनेगी,
बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक ताकत को भी नई मजबूती मिलेगी।
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