बी के झा
NSK

पटना, 8 अप्रैल
बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली “जीविका दीदियों” के लिए सरकार ने एक बड़ा सामाजिक सुरक्षा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। राज्य की करीब एक करोड़ महिलाओं को बीमा के दायरे में लाने के उद्देश्य से 15 अप्रैल के बाद “बीमा सुरक्षा उत्सव” अभियान चलाया जाएगा।यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देगी, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए संकट की घड़ी में एक मजबूत सहारा भी बनेगी।
क्या है “बीमा सुरक्षा उत्सव”?
यह अभियान राज्य के हर ग्राम पंचायत में चलाया जाएगा, जिसमें जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं को दो प्रमुख सरकारी बीमा योजनाओं से जोड़ा जाएगा:प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजनाप्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजनाअभियान का उद्देश्य है कि जो महिलाएं अभी तक बीमा से वंचित हैं, उन्हें भी इस सुरक्षा कवच से जोड़ा जाए।
कैसे मिलेगा लाभ?
1, जीवन बीमा (PMJJBY)आयु सीमा: 18 से 50 वर्ष वार्षिक प्रीमियम: 436 रुपये लाभ: प्राकृतिक मृत्यु पर 2 लाख रुपये
2, दुर्घटना बीमा (PMSBY)आयु सीमा: 18 से 70 वर्ष वार्षिक प्रीमियम: मात्र 20 रुपये लाभ: दुर्घटना में मृत्यु पर 2 लाख रुपये
यानी यदि किसी महिला की दुर्घटना में मृत्यु होती है, तो दोनों योजनाओं के तहत कुल 4 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है।
अभियान की समय-सीमा15 अप्रैल से 31 मई:
विशेष अभियान1 जून से बीमा प्रभावीकवरेज अवधि: एक वर्षहालांकि, 31 मई के बाद भी नामांकन जारी रहेगा ताकि कोई भी पात्र महिला इस योजना से वंचित न रहे।
“दीदी से परिवार तक” — अब पति को भी जोड़ा जाएगा इस बार अभियान की एक खास बात यह है कि:महिलाओं को अपने पति का भी बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा परिवार स्तर पर सुरक्षा कवच तैयार करने की कोशिश इससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में पूरे परिवार को आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
पहले से मिल रहा लाभ, अब होगा विस्तार
जानकारी के अनुसार:अभी तक करीब 72 लाख दीदियां बीमित हैंअब लक्ष्य इसे बढ़ाकर 1 करोड़ तक ले जाना हैअब तक करीब 10 हजार परिवारों को बीमा का लाभ मिल चुका हैपहले यह बीमा किसी अन्य नाम से कराया जाता था, लेकिन अब इसे अधिक संगठित और व्यापक रूप दिया जा रहा है।
जमीनी स्तर पर कैसे चलेगा अभियान?
ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाएंगेजीविका कर्मी और प्रशिक्षित महिलाएं जागरूकता फैलाएंगीआवेदन के साथ ही प्रीमियम राशि बैंक खाते से स्वतः कटेगी
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल कई स्तरों पर असर डालेगी:
महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी
ग्रामीण परिवारों में जोखिम कम होगा
आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास मजबूत होगा एक समाजसेवी का कहना है:“यह सिर्फ बीमा योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान का कवच है।”
निष्कर्ष:
बिहार की “जीविका दीदियां” अब केवल आत्मनिर्भरता का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के नए मॉडल की आधारशिला बन रही हैं।“बीमा सुरक्षा उत्सव” के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि विकास केवल रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि संकट के समय सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।यदि यह अभियान अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, तो यह देशभर के लिए एक उदाहरण बन सकता है—
जहां महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा साथ-साथ चलते हैं।
