“गांधी मैदान से सत्ता का शक्ति प्रदर्शन” : मोदी की मौजूदगी में सम्राट कैबिनेट विस्तार” 30 मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तैयारी, बारिश की आशंका के बीच सियासी तापमान चरम पर; विपक्ष बोला— ‘जनता परेशान, सरकार उत्सव में मशगूल’

बी के झा

NSK

पटना, 7 मई

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान गुरुवार को एक बार फिर बिहार की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। यह केवल शपथ ग्रहण समारोह नहीं, बल्कि 2026 के बाद बदलते बिहार की सत्ता संरचना, जातीय समीकरणों और राजनीतिक संदेशों का बड़ा मंच माना जा रहा है।

राजधानी पटना के गांधी मैदान में दोपहर 12 बजे होने वाले इस भव्य आयोजन में करीब 29 से 30 मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं। पहली बार बिहार में किसी मंत्रिमंडल विस्तार को गांधी मैदान जैसे जन-राजनीतिक प्रतीक स्थल पर आयोजित किया जा रहा है। इसे भाजपा और जदयू की ओर से “जनता के बीच सरकार” का संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है।

मोदी-शाह की मौजूदगी से बढ़ा राजनीतिक महत्व

समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के साथ केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi, Chirag Paswan, Lalan Singh और उपेंद्र कुशवाहा जैसे कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल बिहार सरकार का विस्तार नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एनडीए की एकजुटता का राष्ट्रीय प्रदर्शन भी है।

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संजय उपाध्याय कहते हैं—

“सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का बड़ा दांव खेला है। अब मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधकर पार्टी 2029 की राजनीति की नींव मजबूत करना चाहती है।”

पुराने चेहरों पर भरोसा, नए समीकरणों की तलाश

सूत्रों के अनुसार भाजपा और जदयू को 16-16 मंत्री पद मिले हैं। जदयू से 12 और भाजपा से 13 या 14 विधायक शपथ ले सकते हैं। इसके अलावा Lok Janshakti Party (Ram Vilas) को दो, जबकि हम (से.) और रालोमो को एक-एक मंत्री पद मिलने की संभावना है।हालांकि चर्चा इस बात की भी है कि भाजपा इस बार सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए अति पिछड़ा, दलित और युवा चेहरों को आगे ला सकती है। वहीं जदयू अपने पारंपरिक संगठनात्मक चेहरों पर भरोसा बनाए रख सकती है।

विपक्ष का हमला— “सरकार उत्सव में, जनता संकट में”

विपक्षी दलों ने इस भव्य समारोह को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। Rashtriya Janata Dal नेताओं का कहना है कि बिहार बेरोजगारी, अपराध और शिक्षा संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार “इवेंट मैनेजमेंट” में व्यस्त है।

राजद प्रवक्ताओं ने कहा—“बिहार में अस्पतालों में दवाएं नहीं,

स्कूलों में शिक्षक नहीं और गांवों में सुरक्षा नहीं;

लेकिन सत्ता पक्ष करोड़ों रुपये के शक्ति प्रदर्शन में लगा है।”कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाया कि क्या मंत्रिमंडल विस्तार से आम जनता की समस्याओं का समाधान होगा या यह केवल राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास है।

सांस्कृतिक संदेश:-

पर समारोह से पहले अमित शाह, नितिन नवीन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पंचरूपी हनुमान मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई हिंदू संगठनों ने इसे “सनातन सांस्कृतिक चेतना” का प्रतीक बताया है।Vishwa Hindu Parishad से जुड़े नेताओं का कहना है कि बिहार की राजनीति अब “तुष्टिकरण” से निकलकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ओर बढ़ रही है।

वहीं कुछ शिक्षाविद इसे राजनीतिक प्रतीकवाद बताते हैं।पटना विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजीत कुमार कहते हैं—“भारतीय राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नया नहीं है, लेकिन अब यह चुनावी रणनीति का स्थायी हिस्सा बन चुका है। मंदिर दर्शन केवल आस्था नहीं, राजनीतिक संदेश भी होता है।

मौसम बना प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता

राजनीतिक गर्मी के बीच मौसम ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को हुई बारिश से गांधी मैदान में जलजमाव हो गया था। देर रात मौसम विभाग ने पटना समेत कई जिलों में आंधी, बारिश और वज्रपात का रेड अलर्ट जारी किया।हालांकि गुरुवार के लिए राजधानी पटना में भारी बारिश की संभावना कम बताई गई है, लेकिन प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी में जुटा है। गांधी मैदान में 20 हजार लोगों के बैठने की क्षमता वाला वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किया गया है। पंखा, कूलर, जेनरेटर और विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम

प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी को देखते हुए एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल, ड्रोन निगरानी और ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक कई प्रमुख मार्ग बंद रहेंगे।जिला प्रशासन ने आम लोगों से वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की अपील की है। समारोह का लाइव प्रसारण फेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर भी किया जाएगा।

बिहार की राजनीति के लिए क्या संकेत?

सम्राट चौधरी का यह मंत्रिमंडल विस्तार बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा पहली बार राज्य में अपने नेतृत्व को निर्णायक रूप से स्थापित करने की कोशिश कर रही है। वहीं जदयू अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की जद्दोजहद में दिख रही है।गांधी मैदान में होने वाला यह शपथ ग्रहण केवल सत्ता विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति का ट्रेलर माना जा रहा है —

जहां जातीय समीकरण, हिंदुत्व, संगठन शक्ति और नेतृत्व की नई लड़ाई एक साथ दिखाई दे रही

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