बी के झा
NSK




वॉशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद, 8 अप्रैल
पश्चिम एशिया में युद्ध के कगार पर खड़ी दुनिया को उस समय राहत की सांस मिली, जब Donald Trump ने अचानक ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्ष विराम (सीजफायर) का ऐलान कर दिया।यह फैसला इसलिए और चौंकाने वाला है क्योंकि महज कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने तेहरान को “पूरी सभ्यता मिटा देने” जैसी कड़ी चेतावनी दी थी। ऐसे में सवाल उठता है—आखिर वह कौन-सी मजबूरी या रणनीति थी जिसने अमेरिका को अचानक पीछे हटने पर मजबूर कर दिया?
सीजफायर की पटकथा: पर्दे के पीछे पाकिस्तान?
ट्रंप ने अपने बयान में साफ किया कि यह समझौता शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के साथ हुई बातचीत के बाद संभव हुआ।ट्रंप ने लिखा:“उनके अनुरोध पर मैंने आज रात ईरान पर होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का फैसला किया।”इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पाकिस्तान ने इस पूरे घटनाक्रम में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
शर्तों के साथ राहत: होर्मुज स्ट्रेट बना केंद्र बिंदु हालांकि यह सीजफायर बिना शर्त नहीं है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोला जाए
वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिएविशेषज्ञों के अनुसार, यही वह बिंदु है जिसने अमेरिका को सैन्य कार्रवाई से ज्यादा कूटनीति की ओर मोड़ा।
रणनीतिक यू-टर्न या सोची-समझी चाल?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की “प्रेशर पॉलिटिक्स” का हिस्सा है:पहले आक्रामक बयान देकर दबाव बनानाफिर बातचीत के जरिए समझौता करनाएक वरिष्ठ विश्लेषक के अनुसार:“यह ट्रंप की क्लासिक रणनीति है—पहले डर पैदा करो, फिर समाधान देने वाले नेता बनो।”
रक्षा विशेषज्ञों की राय: “अमेरिका ने हासिल कर लिया लक्ष्य”
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:
अमेरिका पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा चुका है
लंबा युद्ध आर्थिक और सामरिक रूप से महंगा होता
इसलिए सीमित कार्रवाई के बाद कूटनीति को चुना गयाएक रक्षा विशेषज्ञ ने कहा:“यह पीछे हटना नहीं, बल्कि रणनीतिक विराम है।”
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: बातचीत की नई नींव
ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरान की ओर से 10-सूत्रीय प्रस्ताव आया है, जिसमें अधिकांश विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान इस प्रस्ताव को गंभीरता से ले रहा है।
पाकिस्तान पर उठा विवाद: “ड्राफ्ट” से खुला राज?
सीजफायर की इस कूटनीतिक सफलता के बीच शहबाज शरीफ एक नए विवाद में घिर गए हैं।सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में “Draft – Pakistan’s PM Message” लिखा हुआ पाया गया, जिससे यह सवाल उठने लगे कि:❓
क्या पाकिस्तान की विदेश नीति स्वतंत्र है?❓
क्या संदेश वॉशिंगटन से तैयार होकर आ रहे हैं?
विपक्ष का हमला: “अमेरिका की कठपुतली
”पाकिस्तान के विपक्षी दलों और आलोचकों ने आरोप लगाया:-
सरकार अमेरिकी दबाव में काम कर रही है कूटनीतिक संप्रभुता कमजोर हो रही है एक विपक्षी नेता ने कहा:“अगर संदेश भी बाहर से लिखकर आ रहे हैं, तो यह कूटनीति नहीं, नियंत्रण है।”
वैश्विक राजनीति पर असरइस पूरे घटनाक्रम के कई बड़े संकेत हैं:
अमेरिका अब सीधे युद्ध से बचना चाहता है
क्षेत्रीय देशों की भूमिका बढ़ रही है
तेल और ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक राजनीति का केंद्र बनी हुई है
आगे क्या?
अब दुनिया की नजरें अगले 14 दिनों पर टिकी हैं:क्या ईरान होर्मुज खोलता है?क्या स्थायी समझौता हो पाएगा?या यह केवल अस्थायी विराम है?
निष्कर्ष
:यह सीजफायर केवल दो देशों के बीच समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है।Donald Trump का यह फैसला जहां एक ओर युद्ध के खतरे को टालता है, वहीं पाकिस्तान की भूमिका और उसकी कूटनीतिक स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े करता है।दुनिया फिलहाल राहत की सांस ले रही है, लेकिन यह राहत कितनी स्थायी होगी—
यह आने वाले दिनों की कूटनीति तय करेगी।
