फिर शर्मसार हुआ रांची: युवती से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, सात युवकों पर प्राथमिकी दर्ज

बी. के. झा

NSK

नई दिल्ली/रांची , 7 जुन

झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के केंद्र में आ गई है। मांडर थाना क्षेत्र के एक गांव में एक युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और चिंता का माहौल है। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर सात युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

घर से ले जाकर रातभर अत्याचार का आरोप

पीड़िता द्वारा पुलिस को दिए गए बयान के अनुसार वह पिछले दो वर्षों से एक युवक के साथ रह रही थी। करीब डेढ़ माह पूर्व युवक रोजगार के सिलसिले में केरल चला गया, जिसके बाद वह उसके घर में रह रही थी।पीड़िता का आरोप है कि शुक्रवार शाम कुछ युवक उसके घर पहुंचे और उसे जबरन अपने साथ ले गए। इसके बाद उसे नदी किनारे सुनसान इलाके में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने उसे शनिवार सुबह छोड़ा, जिसके बाद वह किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।परिजनों की शिकायत पर मामला तत्काल पुलिस तक पहुंचा और प्राथमिकी दर्ज की गई।

पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

मांडर थाना पुलिस ने बताया कि पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया है तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

कानूनविदों ने उठाए कड़े सवाल

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला भारतीय दंड संहिता के तहत अत्यंत गंभीर श्रेणी में आएगा। उनके अनुसार ऐसे मामलों में त्वरित जांच और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके और समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे।

समाजसेवी संगठनों की प्रतिक्रिया

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले कई सामाजिक संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए कहा है कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उनका कहना है कि केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे।

शिक्षाविदों की चिंता

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि महिलाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व पर विशेष कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है।

विपक्ष का हमला

विपक्षी दलों ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा।

बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों के सामने यह प्रश्न खड़ा करती है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावे जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी हैं।

अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।

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