भोजशाला में 700 साल बाद जली अखंड ज्योति, बंगाल में अभिषेक पर शिकंजा; देश की राजनीति में तेज हुआ ‘धर्म बनाम भ्रष्टाचार’ का नया विमर्श, “धार से कोलकाता तक सियासी और धार्मिक हलचल, अदालत के फैसलों ने बदला माहौल”

बी के झा

NSK

धार (मध्यप्रदेश) / नई दिल्ली, 19 मई

मध्यप्रदेश के धार स्थित Bhojshala में मंगलवार को वह दृश्य देखने को मिला, जिसने वर्षों पुराने धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर में विशेष हवन-पूजन, महाआरती और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन का आयोजन किया गया। दावा किया जा रहा है कि करीब 700 वर्षों बाद यहां अखंड ज्योति जलाई गई है।इधर पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार और कथित अवैध संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है।

Abhishek Banerjee को Kolkata Municipal Corporation की ओर से नोटिस भेजे जाने के बाद बंगाल की राजनीति भी उबाल पर है।दोनों घटनाओं ने देशभर में “धर्म, न्याय, सत्ता और राजनीतिक जवाबदेही” को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

भोजशाला में उमड़ा आस्था का सैलाब

हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार की भोजशाला में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-कुंडों से उठता धुआं और “जय मां सरस्वती” के उद्घोष के बीच परिसर पूरी तरह भगवामय नजर आया।Hemant Dauraya ने कहा कि भोजशाला कोई साधारण स्थल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक मां सरस्वती मंदिर है। उन्होंने इसे “23 वर्षों के सत्याग्रह की विजय” बताया।उनके अनुसार, 2003 से हर मंगलवार को सकल हिंदू समाज यहां सत्याग्रह करता आ रहा था। अब अदालत के फैसले के बाद पहली बार यहां बदले नियमों के बीच पूरे विधि-विधान से पूजा हो रही है।

23 साल का संघर्ष और अदालत का फैसला

हाईकोर्ट ने हालिया आदेश में भोजशाला को हिंदू मंदिर बताते हुए पूजा-अर्चना की अनुमति का दायरा बढ़ा दिया। इसके बाद वर्षों पुरानी व्यवस्था बदलने लगी है।2003 से लागू उस बोर्ड को भी हटाया गया, जिसमें मंगलवार को हिंदुओं और शुक्रवार को मुसलमानों के लिए सीमित समय तय था। अब नई नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।विशेष बात यह रही कि मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित किया गया और आंदोलन में शामिल तीन “शहीदों” की तस्वीरें भी पहली बार गर्भगृह में रखी गईं।

हिंदू धर्मगुरुओं और संगठनों की प्रतिक्रिया

देशभर के कई हिंदू संगठनों और संतों ने इसे “सनातन आस्था की ऐतिहासिक जीत” बताया।Vishwa Hindu Parishad से जुड़े नेताओं ने कहा कि भोजशाला केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रतीक है।कुछ संतों ने इसे “काशी और अयोध्या के बाद सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया अध्याय” बताया।

एक प्रमुख धर्माचार्य ने कहा,“यह केवल मंदिर की जीत नहीं, बल्कि उस सभ्यता की जीत है जिसे सदियों तक दबाने की कोशिश की गई।”

मुस्लिम समाज और मौलानाओं की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर मुस्लिम समाज के भीतर इस फैसले को लेकर चिंता भी दिखाई दी। कई मौलानाओं ने अदालत के आदेश का सम्मान करने की बात कही, लेकिन सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।कुछ मुस्लिम संगठनों ने कहा कि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि अदालत का फैसला अंतिम है, लेकिन सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।

एक वरिष्ठ मौलाना ने कहा,“देश संविधान से चलता है। अदालत का सम्मान जरूरी है, लेकिन समाज में भाईचारा भी उतना ही जरूरी है।”

राजनीतिक विश्लेषकों की राय: “2026 की राजनीति का नया एजेंडा”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भोजशाला मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, भाजपा अब “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रही है। अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद भोजशाला का मुद्दा उसी श्रृंखला का विस्तार माना जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इससे भाजपा के कोर वोट बैंक को और मजबूती मिलेगी, जबकि विपक्ष “संविधान और सामाजिक संतुलन” का नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश करेगा।

कानूनविदों की राय: “अदालत के फैसले का दूरगामी असर”

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि भोजशाला पर आया फैसला भविष्य में कई धार्मिक विवादों के लिए मिसाल बन सकता है।कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, यदि ऐतिहासिक दस्तावेज, पुरातात्विक प्रमाण और धार्मिक परंपराएं अदालत में मजबूत रूप से स्थापित होती हैं, तो अन्य विवादित स्थलों पर भी इसी प्रकार की कानूनी बहस तेज हो सकती है।

हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि न्यायपालिका को हर मामले में संतुलन और सामाजिक शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर बढ़ा दबाव

इधर पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है।Abhishek Banerjee को कोलकाता नगर निगम की ओर से भेजे गए नोटिस ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।सूत्रों के मुताबिक, साउथ कोलकाता स्थित उनके आवास के निर्माण, अतिरिक्त निर्माण कार्य और बिल्डिंग प्लान को लेकर जानकारी मांगी गई है।नगर निगम ने पूछा है कि निर्माण के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा हमला

Suvendu Adhikari ने मंच से अभिषेक बनर्जी समेत टीएमसी से जुड़े चार नेताओं के नाम लेते हुए दावा किया कि उनके पास करोड़ों की अवैध संपत्तियां हैं।उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि अभिषेक बनर्जी की 24 संपत्तियां जांच के दायरे में हैं।

आरजी कर केस में भी बड़ा फैसला

इसी बीच Enforcement Directorate को आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में बड़ी कानूनी मंजूरी मिली है।पूर्व प्रिंसिपल Sandip Ghosh के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अब PMLA के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।राजनीतिक जानकार इसे बंगाल में भाजपा सरकार की “सख्त प्रशासनिक नीति” का संकेत मान रहे हैं।

विपक्ष का पलटवार

टीएमसी और विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर एजेंसियों और प्रशासनिक संस्थाओं के “राजनीतिक इस्तेमाल” का आरोप लगाया है।विपक्ष का कहना है कि भाजपा धार्मिक मुद्दों और जांच एजेंसियों के जरिए राजनीतिक ध्रुवीकरण कर रही है।टीएमसी नेताओं का दावा है कि जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं।

देश की राजनीति में नया दौर

धार की भोजशाला से लेकर बंगाल की राजनीतिक कार्रवाई तक, देश में एक नया राजनीतिक और वैचारिक दौर आकार लेता दिख रहा है।

एक तरफ सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का उभार है, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार और जवाबदेही की राजनीति तेज होती नजर आ रही है।अब देखना यह होगा कि अदालतों के फैसले, धार्मिक आंदोलनों और राजनीतिक कार्रवाई के इस त्रिकोण का असर आने वाले चुनावों और देश के सामाजिक ताने-बाने पर कितना गहरा पड़ता है।

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