बी के झा
NSK


नई दिल्ली/ लखनऊ, 7 जुन
देश की राजनीति और जनजीवन के दो अलग-अलग लेकिन चर्चित मुद्दे रविवार को सुर्खियों में छाए रहे। एक ओर घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित चर्चित गजल होटल पर मालिकाना हक को लेकर नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। दोनों घटनाएं अपने-अपने स्तर पर सत्ता, व्यवस्था और आम नागरिकों के सरोकारों को प्रभावित करती नजर आ रही हैं।
रसोई गैस पर फिर बढ़ी महंगाई की आंच
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि कर दी है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
दिल्ली में अब घरेलू गैस सिलेंडर 942 रुपये,
मुंबई में 941.50 रुपये,
कोलकाता में 968 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये का हो गया है।
बिहार की राजधानी पटना में यह कीमत 1031.50 रुपये तक पहुंच चुकी है, जो प्रमुख शहरों में सबसे अधिक है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती ऊर्जा कीमतों का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। तेल कंपनियों का तर्क है कि लंबे समय से हो रहे घाटे की आंशिक भरपाई के लिए यह बढ़ोतरी आवश्यक थी।
विपक्ष का हमला, सरकार बचाव की मुद्रा में
एलपीजी कीमतों में वृद्धि को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। उनका कहना है कि रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है।विपक्ष ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि महंगाई नियंत्रण में लाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
वहीं सरकार और तेल कंपनियों का पक्ष है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते मूल्य वृद्धि अपरिहार्य हो गई थी।
गाजीपुर का गजल होटल फिर सुर्खियों में
उधर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में स्थित चर्चित गजल होटल को लेकर कानूनी लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। माफिया से नेता बने दिवंगत मुख्तार अंसारी और उनके परिवार से जुड़े इस होटल पर अब दो अलग-अलग व्यक्तियों ने स्वामित्व का दावा ठोक दिया है।पहले मोती वर्मा ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि होटल जिस जमीन पर बना है, वह उनकी संपत्ति है। अब अभिषेक अग्रवाल नामक एक अन्य दावेदार भी अदालत पहुंच गए हैं और उन्होंने भी उसी भूमि पर अपने परिवार का स्वामित्व होने का दावा किया है।एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के दावे सामने आए, जबकि विधायक अब्बास अंसारी के पक्ष की ओर से समय मांगा गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की है।
अदालत के सामने तीन बड़े सवाल
गजल होटल विवाद अब केवल कब्जे के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूर्ण स्वामित्व निर्धारण के मुकदमे का स्वरूप ले चुका है। अदालत के सामने अब मुख्य रूप से तीन प्रश्न हैं—जमीन का वास्तविक मालिक कौन है?
स्वामित्व साबित करने के लिए किन दस्तावेजों का आधार लिया जाएगा?
अवैध कब्जे के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं?
इन प्रश्नों के उत्तर आने वाले दिनों में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों से स्पष्ट होंगे।
बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर?
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव दिखाई दिया है। उनका कहना है कि एक समय ऐसा भी था जब राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बाहुबलियों पर संपत्तियों पर कब्जे के आरोप लगते थे और पीड़ित पक्ष न्याय के लिए संघर्ष करता था। अब ऐसे मामलों में न्यायालय और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से दावों की जांच हो रही है।
हालांकि अंतिम सत्य क्या है, इसका निर्णय केवल अदालत ही करेगी। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम नहीं माना जा सकता।
दो तस्वीरें, एक संदेश
रविवार की इन दोनों बड़ी घटनाओं ने देश के सामने दो अलग-अलग तस्वीरें रखी हैं। पहली तस्वीर उस आम परिवार की है जिसकी रसोई पर बढ़ती महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी तस्वीर उस कानूनी संघर्ष की है जिसमें वर्षों पुराने प्रभाव और शक्ति के प्रतीकों से जुड़ी संपत्तियों का भविष्य अदालत की चौखट पर तय हो रहा है।
एक तरफ जनता महंगाई की मार झेल रही है, तो दूसरी तरफ न्यायालय यह तय करने में जुटा है कि चर्चित गजल होटल की जमीन का वास्तविक मालिक कौन है।
आने वाले दिनों में दोनों मुद्दों पर देश की नजर बनी रहेगी।
