रेगिस्तान से उठी भारत की मिसाइल गूंज: ब्रह्मोस-आकाश के लिए अरब देशों में होड़, दुनिया में बढ़ा हिंदुस्तान का सामरिक दबदबा”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 25 मई

मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत की स्वदेशी रक्षा शक्ति अब वैश्विक रणनीति का अहम केंद्र बनती दिखाई दे रही है। कभी हथियारों का सबसे बड़ा आयातक माना जाने वाला भारत आज दुनिया के देशों को अत्याधुनिक मिसाइलें बेचने की स्थिति में पहुंच चुका है। भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम से तैयार की जा रही सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल और स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली ने अब खाड़ी देशों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

सूत्रों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर ने भारत से रक्षा सौदों को लेकर संपर्क साधा है। माना जा रहा है कि ये देश कम और मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणालियों के जरिए अपनी सुरक्षा क्षमता को मजबूत करना चाहते हैं।

दुनिया को दिखा ‘मेक इन इंडिया’ का सैन्य दम

एक समय था जब भारत विदेशी हथियारों पर अत्यधिक निर्भर था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने जिस तेजी से आत्मनिर्भरता हासिल की है, उसने वैश्विक सामरिक समीकरण बदल दिए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान ब्रह्मोस की क्षमता ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमलों और ड्रोन हमलों को रोकने में आकाश प्रणाली की प्रभावशीलता ने भारत की रक्षा तकनीक को नई पहचान दी।

रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार,“आज दुनिया केवल अमेरिकी या रूसी हथियारों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। भारत कम लागत, विश्वसनीय तकनीक और तेज आपूर्ति क्षमता के कारण नया रक्षा केंद्र बनकर उभरा है।

ब्रह्मोस क्यों बन रही दुनिया की पसंद?

ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 300 किलोमीटर तक बताई जाती है। समुद्र, जमीन और हवा—तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकने वाली यह मिसाइल दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम मानी जाती है।वहीं आकाश मिसाइल प्रणाली मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली है, जो ड्रोन, लड़ाकू विमान और मिसाइलों को रोकने में सक्षम है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्य-पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी रक्षा प्रणाली की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

फिलीपींस के बाद अब अरब देशों की नजर

भारत अब तक केवल फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेच चुका है। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात इतिहास में मील का पत्थर माना गया था। अब आधा दर्जन से अधिक देश इस मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखा चुके हैं। अरब देशों की दिलचस्पी ने संकेत दे दिया है कि भारतीय हथियार अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक बाजार का हिस्सा बन चुके हैं।

सऊदी अरब की चुप्पी और पाकिस्तान फैक्टर

दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब की ओर से अभी तक भारत से किसी औपचारिक रक्षा खरीद की चर्चा सामने नहीं आई है। रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं।हालांकि हाल के घटनाक्रमों में जब ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, तब पाकिस्तान खुलकर सऊदी समर्थन में नहीं आया। ऐसे में मध्य-पूर्व की राजनीति में नए सामरिक समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने बदली तस्वीर

बीते वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 सैलानियों की हत्या के बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की। इसके बाद चार दिनों तक चले तनावपूर्ण सैन्य संघर्ष ने पूरे दक्षिण एशिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इसी ऑपरेशन ने भारतीय मिसाइल प्रणालियों की विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।

भारत की नई वैश्विक पहचान

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत अब केवल “विश्वगुरु” की सांस्कृतिक अवधारणा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामरिक शक्ति के रूप में भी अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। जिस भारत को कभी रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी दरवाजों पर निर्भर रहना पड़ता था, वही भारत आज दुनिया के देशों की सुरक्षा जरूरतों का भरोसेमंद साझेदार बनता जा रहा है।

मध्य-पूर्व में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारतीय मिसाइलों की मांग केवल व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि वैश्विक राजनीति में भारत की रणनीतिक साख लगातार मजबूत हो रही है।

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