बी के झा
NSK



पटना, 15 मई
बिहार में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल अब एक जनअभियान का रूप लेती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने “नो व्हीकल डे” मनाते हुए ऐसा संदेश दिया, जिसकी गूंज अब पूरे बिहार में सुनाई देने लगी है।पटना स्थित अपने सरकारी आवास ‘लोकसेवक आवास’ से मुख्यमंत्री पैदल ही सचिवालय पहुंचे। उनके साथ सुरक्षाकर्मी, अधिकारी और सीएम कार्यालय के कर्मचारी भी पैदल चलते नजर आए। सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति जब खुद सड़क पर उतरकर उदाहरण पेश करे तो उसका प्रभाव केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है।
मुख्यमंत्री का यह कदम महज प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि बदलते समय की जरूरत और जिम्मेदारी का स्पष्ट संदेश था।देश और दुनिया जिस दौर से गुजर रहे हैं, उसमें ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी नीति नहीं बल्कि सामाजिक कर्तव्य बन चुका है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। ऐसे समय में बिहार सरकार का यह प्रयास न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक पहल माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव कर बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। यदि सप्ताह में एक दिन भी लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें तो पेट्रोल-डीजल की खपत में भारी कमी लाई जा सकती है। इससे प्रदूषण घटेगा, यातायात का दबाव कम होगा और लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।मुख्यमंत्री की इस पहल का असर उनके मंत्रिमंडल और प्रशासनिक अमले में भी स्पष्ट दिखा।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी पैदल चलकर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील समय की मांग है और हर नागरिक को इसमें भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने आम जनता से सप्ताह में कम-से-कम एक दिन निजी वाहनों से दूरी बनाने की अपील की।
इसी क्रम में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा केवल एक इलेक्ट्रिक कार से कार्यालय पहुंचे। वहीं खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने वंदे भारत ट्रेन का सफर चुना। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ट्रेन यात्रा के दौरान आम यात्रियों से संवाद का अवसर मिला और जनसमस्याओं को करीब से समझने का मौका भी।इस अभियान का असर अब जिलों में भी दिखने लगा है।
वर्षा सिंह ने वैशाली में शनिवार को “नो व्हीकल डे” घोषित कर दिया है। सरकारी कर्मियों से निजी वाहन का प्रयोग नहीं करने की अपील की गई है। साथ ही लोगों से बस, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल का आग्रह किया गया है। अनावश्यक यात्राओं से बचने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई है।दरअसल, यह पहल केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है। यह बदलती जीवनशैली, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का नया अध्याय है। बिहार जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य में यदि यह अभियान जनभागीदारी का रूप लेता है तो आने वाले समय में यह देश के लिए मिसाल बन सकता है।
राजनीति में अक्सर घोषणाएं और भाषण सुर्खियां बनते हैं, लेकिन जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं पैदल चलकर जनता को संदेश देता है तो वह खबर से आगे बढ़कर प्रेरणा बन जाती है। बिहार में शुरू हुआ यह “नो व्हीकल डे” अभियान अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनचेतना का नया प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है।
