अमेरिका-ईरान संघर्ष ने फिर बढ़ाया पश्चिम एशिया का तापमान
NSK


बी के झा
वाशिंगटन/ इस्लामाबाद/ तेहरान/नई दिल्ली, 28 मई
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खुले सैन्य टकराव की तरफ बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 ड्रोन मार गिराने और पांचवें ड्रोन को लॉन्च होने से पहले ही नष्ट करने का दावा किया। अमेरिका ने इसे “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार इसे आने वाले बड़े भू-राजनीतिक संकट की प्रस्तावना मान रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी ड्रोन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे। यही वह समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जलमार्ग पर तनाव और बढ़ा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई के बाद कहा कि “ईरान अब कमजोर स्थिति में बातचीत कर रहा है।” ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि उनकी सरकार तेहरान के साथ एक ऐसे समझौते की दिशा में बढ़ रही है, जिससे ईरान की परमाणु क्षमता सीमित हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर सामान्य रूप से खुल सके।
‘शांति’ की भाषा या युद्ध की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन एक तरफ समझौते की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान को झुकाने की रणनीति अपना रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के शिक्षाविद प्रो. आरिफ हसन के अनुसार, “अमेरिका की यह नीति ‘डिप्लोमेसी विद डिटरेंस’ का उदाहरण है, जहां बातचीत की मेज पर बैठाने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जाता है।”हालांकि ट्रंप को अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
रिपब्लिकन पार्टी के भीतर कई नेता मानते हैं कि ईरान के खिलाफ आक्रामक नीति अमेरिका को लंबे युद्ध में धकेल सकती है। विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने आरोप लगाया कि ट्रंप मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रवादी माहौल बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।डेमोक्रेटिक सांसदों ने कहा कि “लगातार सैन्य कार्रवाइयों से तेल की कीमतें और महंगाई बढ़ेगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी जनता पर पड़ेगा।”
वहीं कुछ मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो पश्चिम एशिया में मानवीय संकट गहरा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की सैन्य रणनीति प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय “ड्रोन और प्रॉक्सी वॉर” पर आधारित है। इसलिए अमेरिका के लिए चुनौती सिर्फ ईरान की सेना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैले उसके सहयोगी गुट हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका असर भारत समेत एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।भारत के रणनीतिक मामलों के जानकारों ने भी चिंता जताई है कि पश्चिम एशिया में युद्ध की आग तेज होने पर कच्चे तेल की कीमतें नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकती हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
बलूचिस्तान में गोलियों की गूंज: पाकिस्तान फिर बेनकाब
जहां एक ओर पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका मंडरा रही है, वहीं पाकिस्तान के भीतर अराजकता और हिंसा की तस्वीर लगातार भयावह होती जा रही है। बलूचिस्तान के हरनाई जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने दिनदहाड़े 5 लोगों को गोलियों से भून दिया। इस हमले में 3 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने सड़क किनारे अस्थायी चौकी बनाकर लोगों के CNIC यानी राष्ट्रीय पहचान पत्र की जांच शुरू कर दी थी। जब कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, तो बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी।मृतकों में धार्मिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटी हैं, लेकिन पाकिस्तान में ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर जांच राजनीतिक बयानबाजी में दबकर रह जाती है।‘
फेल स्टेट’ की ओर बढ़ता पाकिस्तान?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान की सबसे अस्थिर इकाई बना हुआ है। वहां अलगाववाद, आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों के बीच आम नागरिक पिस रहे हैं।
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) एस.के. चौहान के अनुसार, “बलूचिस्तान की स्थिति बताती है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। जब हथियारबंद लोग खुलेआम पहचान पत्र जांचने लगें, तो यह राज्य की संप्रभुता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि शहबाज सरकार देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को दबाने में व्यस्त है, जबकि आम नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।
कराची की घटना ने फिर उठाए ‘ऑनर किलिंग’ पर सवाल
बलूचिस्तान की घटना के बीच कराची में नवविवाहित दंपती की हत्या ने पाकिस्तान समाज के एक और काले सच को सामने ला दिया। अदालत से शादी को कानूनी मान्यता दिलाकर लौट रहे दंपती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जांच में महिला के रिश्तेदारों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे “ऑनर किलिंग” का मामला बताते हुए कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं की स्वतंत्रता आज भी कट्टर सामाजिक ढांचे की कैद में है। विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कार्रवाई हो और महिलाओं की सुरक्षा के लिए कठोर कानून लागू किए जाएं।
दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका-ईरान तनाव और पाकिस्तान की आंतरिक हिंसा, दोनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि एशिया का भू-राजनीतिक संतुलन तेजी से बदल रहा है। एक तरफ वैश्विक शक्तियां सैन्य दबाव की राजनीति कर रही हैं,
वहीं दूसरी ओर कमजोर देशों के भीतर कानून-व्यवस्था और सामाजिक ढांचा चरमराता जा रहा है।दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत से समाधान निकाल पाएंगे, और क्या पाकिस्तान अपने भीतर बढ़ती हिंसा और कट्टरता पर नियंत्रण कर पाएगा। फिलहाल दोनों मोर्चों से उठता धुआं आने वाले समय में और बड़े विस्फोट की आशंका जता रहा है।
