बी के झा
NSK



पटना/अररिया/वैशाली, 21 अप्रैल
बिहार में मंगलवार की सुबह दो अलग-अलग जिलों से आई सनसनीखेज घटनाओं ने आम लोगों को झकझोर दिया। एक ओर अररिया में 32 वर्षीय युवक की गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई, तो दूसरी ओर वैशाली में हथियारबंद डकैतों ने बम धमाकों और फायरिंग के बीच एक स्वर्ण व्यवसायी के घर पर धावा बोलकर लूटपाट की।इन दोनों वारदातों ने राज्य में कानून-व्यवस्था, ग्रामीण सुरक्षा और अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अररिया: कब्रिस्तान के पास मिला युवक का शव
अररिया जिले के जोकीहाट थाना क्षेत्र के काकन गांव स्थित कब्रिस्तान के पास मंगलवार की अहले सुबह खून से लथपथ एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान 32 वर्षीय मो. सबुल के रूप में हुई है, जो सिकटिया गांव निवासी जमाल का पुत्र था।पुलिस के अनुसार युवक की बेरहमी से गला रेतकर हत्या की गई है। घटना स्थल मृतक के घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर बताया जा रहा है।सुबह जब ग्रामीणों की नजर शव पर पड़ी तो पूरे इलाके में खबर आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जुट गई।
तीन दिन पहले ही लौटा था घर
परिजनों ने बताया कि मो. सबुल दूसरे राज्य में मजदूरी करता था और तीन दिन पहले ही घर लौटा था। सोमवार दोपहर वह बाइक लेकर घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा।रात करीब दो बजे उसकी मोटरसाइकिल घटनास्थल से कुछ दूरी पर उड़ान टोली गांव के पास मिली, जिसे परिजन घर ले आए। लेकिन सुबह जब शव मिला तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
मां-बाप और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
भू-विवाद की आशंका
हालांकि परिजनों ने अभी खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों को आशंका है कि हत्या के पीछे जमीन विवाद हो सकता है। गांव के लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में कुछ तनाव की चर्चा थी और संभव है कि इसी रंजिश में साजिश रचकर हत्या की गई हो।थानाध्यक्ष Rajiv Kumar Jha ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है। पुलिस ने दावा किया है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
वैशाली: आधी रात बम-गोलियों के बीच डकैती
उधर वैशाली जिले के महनार थाना क्षेत्र के प्रमानन्दपुर गांव में अपराधियों ने पुलिस को खुली चुनौती देते हुए बड़ी डकैती को अंजाम दिया।मंगलवार देर रात करीब 12:40 बजे डेढ़ दर्जन से अधिक हथियारबंद नकाबपोश अपराधियों ने स्वर्ण व्यवसायी रंजीत कुमार साह के घर को घेर लिया। पहले बम धमाके कर पूरे इलाके में दहशत फैलाई गई, फिर फायरिंग करते हुए अपराधी घर में घुस गए।
परिवार को बनाया बंधक
डकैतों ने लोहे के औजारों से मुख्य गेट, अलमारियां और कमरों के ताले तोड़ दिए। घर में घुसते ही परिवार के सदस्यों को हथियार के बल पर बंधक बना लिया गया।इसके बाद अपराधियों ने पूरे घर की तलाशी ली और कीमती सामान समेट लिया। परिजनों के अनुसार डकैत लगभग:50 ग्राम सोना भारी मात्रा में चांदी क़रीब ₹50 हजार नकदअन्य कीमती सामान लूटकर फरार हो गए।विरोध करने पर घर के दो लोगों के साथ मारपीट की गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पुलिस गश्ती पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अपराधियों का गांव में प्रवेश करना, करीब एक घंटे तक तांडव मचाना और फिर आराम से फरार हो जाना पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक अपराधी भाग चुके थे। घटनास्थल से बम के अवशेष और कारतूस के खोखे बरामद किए गए हैं। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
विपक्ष का हमला
इन घटनाओं को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस और राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों का मनोबल बढ़ चुका है और आम जनता भय के माहौल में जी रही है।विपक्ष का कहना है कि यदि अपराधी खुलेआम हत्या, डकैती और बमबाजी कर रहे हैं तो सरकार के “सुशासन” के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।जनता में डर, प्रशासन पर दबाव अररिया और वैशाली की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और भय दोनों है।
अररिया में लोग हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।वैशाली में ग्रामीण रात की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठा रहे हैं।दोनों जिलों में पुलिस पर दबाव बढ़ गया है कि जल्द कार्रवाई कर विश्वास बहाल करे।
क्या कहती है तस्वीर?
दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन संदेश एक ही है—अपराधियों का दुस्साहस बढ़ा है।एक तरफ व्यक्तिगत रंजिश और जमीन विवाद हत्या का कारण बन रहे हैं, तो दूसरी ओर संगठित गिरोह ग्रामीण इलाकों में डकैती कर रहे हैं। इससे साफ है कि कानून-व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर नई रणनीति की जरूरत है।
निष्कर्ष
अररिया की दर्दनाक हत्या और वैशाली की दुस्साहसिक डकैती ने बिहार को फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अपराधियों के खिलाफ मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है। जनता जवाब चाहती है, कार्रवाई चाहती है और सुरक्षा चाहती है।अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं—
क्या दोषियों तक कानून का हाथ समय पर पहुंचेगा, या ये घटनाएं भी आंकड़ों में दर्ज होकर रह जाएंगी।
