बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ वॉशिंगटन/ओटावा, 20 अप्रैल
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर आक्रामक व्यापार नीति का संकेत देते हुए कनाडा को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कनाडा ने चीन के साथ अपने व्यापारिक समझौते समाप्त नहीं किए, तो अमेरिका उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से पीछे नहीं हटेगा।ट्रंप के इस बयान ने न केवल उत्तर अमेरिकी व्यापार संबंधों में नई हलचल पैदा कर दी है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी चिंता की लहर दौड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा कदम उठाया गया तो इसका असर सिर्फ कनाडा-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।“
अमेरिकी हितों से कोई समझौता नहीं”
ट्रंप लंबे समय से “अमेरिका फर्स्ट” नीति के पैरोकार रहे हैं। उनका कहना है कि दुनिया के कई देश अमेरिकी बाजार और अर्थव्यवस्था का लाभ उठाते रहे हैं, जबकि अमेरिका को समान लाभ नहीं मिला। कनाडा पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने संकेत दिया कि अब वॉशिंगटन किसी भी असंतुलित व्यापार व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेगा।उनका संदेश साफ था—जो देश अमेरिकी आर्थिक हितों के खिलाफ जाएंगे, उन्हें भारी कीमत चुकानी होगी।
वाणिज्य सचिव ने भी साधा निशाना
अमेरिका के वाणिज्य सचिव Howard Lutnick ने भी कनाडा की व्यापार रणनीति पर तीखी टिप्पणी की। एक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कनाडा की बातचीत की रणनीति बेहद कमजोर और अप्रभावी है।लुटनिक ने कहा कि कनाडा यह सोच रहा है कि धीमी बातचीत और समय खींचने की नीति से उसे फायदा होगा, लेकिन यह अब तक की सबसे खराब रणनीति साबित हो सकती है।“
30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का फायदा”
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के प्रवक्ता ने दावा किया कि कनाडा अमेरिका की विशाल 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का अनुचित लाभ उठा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि मौजूदा व्यापार ढांचा कनाडा को ज्यादा लाभ देता है, जबकि अमेरिकी उद्योग और श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है।यह बयान साफ दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन केवल शुल्क बढ़ाने की चेतावनी नहीं दे रहा, बल्कि वह पूरे व्यापार ढांचे की समीक्षा के मूड में है।
USMCA पर भी संकट के बादल
जब अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते यानी United States-Mexico-Canada Agreement (USMCA) के भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया, तो लुटनिक ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इसे “खराब डील” मानते हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता अमेरिका के औद्योगिक हितों को कमजोर करता है और लंबे समय में अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुंचाता है।
कनाडा के लिए दोहरी चुनौती
कनाडा के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—चीन के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखना।
अमेरिका जैसे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार को नाराज होने से बचाना।
यदि ट्रंप अपनी धमकी को अमल में लाते हैं, तो कनाडा के निर्यात, उद्योग, ऑटो सेक्टर और रोजगार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दुनिया क्यों चिंतित है?
अमेरिका और कनाडा दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में गिने जाते हैं। दोनों देशों के बीच प्रतिदिन अरबों डॉलर का कारोबार होता है। ऐसे में 100% टैरिफ जैसी कठोर कार्रवाई वैश्विक बाजारों, निवेशकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल व्यापारिक चेतावनी नहीं, बल्कि चीन को घेरने की व्यापक अमेरिकी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
संदेश स्पष्ट है
ट्रंप के बयान से यह साफ है कि उनकी वापसी के साथ अमेरिका फिर आक्रामक आर्थिक राष्ट्रवाद की राह पर बढ़ सकता है। कनाडा पर दबाव बनाकर उन्होंने दुनिया को संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में व्यापार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक हथियार भी बनेगा।
