बी के झा
NSK News

हापुड़, 29 जुलाई
सावन महीने में शुरू होने वाली ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। लाखों शिवभक्तों की आस्था से जुड़े इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी लगातार जमीनी निरीक्षण कर रहे हैं।इसी क्रम में मेरठ मंडल के आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी हापुड़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ब्रजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने कांवड़ यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान घाटों पर अव्यवस्था, सफाई और प्रकाश व्यवस्था में कमी देखकर कमिश्नर नाराज हो गए।
उन्होंने मौके पर मौजूद नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (EO) पवित्रा त्रिपाठी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा—“तैयारी क्या कर रखी है आपने?
यहां हम घूमने आए हैं क्या?
पिकनिक मनाने आए हैं?
व्यवस्था बहुत अव्यवस्थित है। तुरंत काम में लग जाइए।”कमिश्नर के इस सख्त रवैये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई।
डीएम-एसपी की मौजूदगी में अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान हापुड़ की जिलाधिकारी कविता मीणा, पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह और डीआईजी कलानिधि नैथानी भी मौजूद रहे।कमिश्नर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि—कांवड़ मार्गों पर साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर हो पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहें सेवा शिविरों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच हो यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए रूट डायवर्जन का सख्ती से पालन कराया जाए।
दिल्ली-नेशनल हाईवे पर विशेष निगरानी
कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली-नेशनल हाईवे सहित प्रमुख मार्गों पर विशेष योजना तैयार की है।अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यातायात बाधित न हो और श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम लोगों को भी कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया है।
कौन हैं IAS भानु चंद्र गोस्वामी?
मेरठ मंडल के आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी 2009 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। मंडल आयुक्त के रूप में यह उनकी पहली तैनाती है।इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह—आगरा के जिलाधिकारी रह चुके हैं ,श्रावस्ती के डीएम रहे हैं, प्रयागराज और जौनपुर में भी जिलाधिकारी की जिम्मेदारी निभाई है संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में उन्होंने देशभर में 33वां स्थान हासिल किया था।
रांची में जन्म, प्रशासनिक परिवार से मिला संस्कार
भानु चंद्र गोस्वामी का जन्म 20 अगस्त 1984 को रांची (झारखंड) में हुआ था।उनके पिता हरिश्चंद्र गोस्वामी बिहार-झारखंड सरकार में श्रम अधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे, जबकि उनके दादा नवल गोस्वामी हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC), रांची में पदस्थ थे।प्रशासनिक माहौल वाले परिवार से आने के कारण बचपन से ही उन्हें सरकारी सेवा और जनहित कार्यों की समझ मिली।
संघर्ष और मेहनत से UPSC तक का सफर
भानु चंद्र गोस्वामी ने हजारीबाग के सेंट कोलंबस कॉलेज से संस्कृत ऑनर्स में स्नातक की पढ़ाई प्रथम श्रेणी में पूरी की।इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रयागराज का रुख किया। लगभग एक वर्ष तैयारी करने के बाद वह दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा की तैयारी जारी रखी।कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने UPSC में शानदार सफलता हासिल की और देशभर में 33वां स्थान प्राप्त किया।
प्रशासनिक सख्ती या जवाबदेही की मिसाल?
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े आयोजनों में जमीनी स्तर की छोटी-छोटी कमियां भी बड़ी समस्या पैदा कर सकती हैं।एक प्रशासनिक विशेषज्ञ के अनुसार—”वरिष्ठ अधिकारियों का मौके पर जाकर व्यवस्था की समीक्षा करना और कमियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश देना प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा है।
कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजन में लाखों लोगों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
“सामाजिक संगठनों की नजर में चुनौती बड़ा आयोजन, बड़ी जिम्मेदारी
सामाजिक संगठनों का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी परीक्षा होती है।उनका मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए सफाई, सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत व्यवस्था करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष: कांवड़ यात्रा से पहले प्रशासन की अग्निपरीक्षा
ब्रजघाट निरीक्षण के दौरान कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी की नाराजगी ने साफ संकेत दे दिया है कि कांवड़ यात्रा की तैयारियों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, सुरक्षा और सुविधा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करे।कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि यह शासन व्यवस्था की कार्यक्षमता की भी परीक्षा होगी।
