बी के झा
पटना, 29 जुलाई
बिहार सरकार ने रोजगार, ग्रामीण विकास, शहरी सुविधाओं और औद्योगिक विस्तार को केंद्र में रखते हुए बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 24 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। इनमें सबसे प्रमुख निर्णय समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) के तहत आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर नियुक्ति का है।सरकार के इस फैसले को रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। नई नियुक्तियों से जहां हजारों परिवारों को रोजगार मिलेगा, वहीं आंगनबाड़ी व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आंगनबाड़ी बहाली से गांवों तक पहुंचेगा रोजगार का अवसर
कैबिनेट के फैसले के बाद राज्य के हजारों युवाओं और महिलाओं में रोजगार की उम्मीद जगी है। सरकार का कहना है कि आंगनबाड़ी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए मानव संसाधन को मजबूत करना जरूरी है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिहार जैसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्य में आंगनबाड़ी भर्ती का फैसला केवल रोजगार का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पोषण, महिला स्वास्थ्य और बाल विकास से भी जुड़ा हुआ है।
सब्जी उत्पादन से बाजार तक मजबूत होगी व्यवस्था
कैबिनेट ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत वेजफेड की त्रिस्तरीय सहकारी व्यवस्था के विस्तार के लिए 106.39 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।इस योजना के तहत प्रखंड स्तर पर आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी, सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी और रीफर वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।सरकार का मानना है कि इससे किसानों को अपनी सब्जियों का बेहतर बाजार मिलेगा और उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में सब्जी उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन भंडारण और बाजार व्यवस्था की कमी के कारण किसानों को अक्सर उचित मूल्य नहीं मिल पाता। नई योजना इस समस्या को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
लखीसराय और किशनगंज को मिलेगा पेयजल का बड़ा तोहफा
कैबिनेट ने केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 मिशन के तहत लखीसराय और किशनगंज जलापूर्ति परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है।लखीसराय जलापूर्ति परियोजना: 150.96 करोड़ रुपयेकिशनगंज जलापूर्ति परियोजना: 53.71 करोड़ रुपये इन परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरों में पेयजल व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में अमृत मिशन के तहत होने वाले काम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण हैं।
मिथिलांचल में बंद चीनी मिलों से फिर जगेगी उद्योग की उम्मीद
कैबिनेट का एक बड़ा फैसला मिथिलांचल के औद्योगिक विकास से जुड़ा रहा। सरकार ने दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद पड़ी चीनी मिल परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलों तथा गन्ना आधारित उपोत्पाद उद्योगों की स्थापना से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।इस फैसले को लंबे समय से बंद पड़े औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, मिथिलांचल में चीनी उद्योग का पुराना इतिहास रहा है। यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो गन्ना किसानों को नया बाजार मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
जमुई में पुल निर्माण को मंजूरी, बढ़ेगी कनेक्टिविटी
कैबिनेट ने पथ निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर जमुई जिले में दो महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय आरसीसी पुलों के निर्माण को भी मंजूरी दी है।इनमें शामिल हैं—नरियाना घाट (क्यूल नदी) पर पुल निर्माणलागत: 93.82 करोड़ रुपयेमंगोबंदर-सुकनर नदी पर पुल निर्माणलागत: 55.96 करोड़ रुपयेये पुल NH-333A के खैरा-सोनो मार्ग पर बनाए जाएंगे।सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और व्यापार, कृषि तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
राजनीतिक संदेश: विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट के फैसलों में रोजगार, किसान, पेयजल और आधारभूत संरचना जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है।एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार,”बिहार की राजनीति में रोजगार और विकास हमेशा बड़े मुद्दे रहे हैं। सरकार द्वारा एक साथ कई क्षेत्रों में फैसले लेना यह संकेत देता है कि वह जनता के बीच विकास आधारित छवि को मजबूत करना चाहती है।”हालांकि विपक्षी दलों की नजर अब इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर होगी। विपक्ष अक्सर आरोप लगाता रहा है कि सरकारी योजनाओं की असली परीक्षा जमीन पर उनके प्रभाव से होती है।
शिक्षाविदों और समाज विशेषज्ञों की राय
शिक्षाविदों का कहना है कि आंगनबाड़ी जैसी योजनाएं केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य और शिक्षा की नींव तैयार करती हैं।समाज विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उद्योग, कृषि और रोजगार योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं तो बिहार से पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष:
विकास की नई तस्वीर पेश करने की कोशिश
सम्राट चौधरी सरकार की कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले रोजगार, कृषि, उद्योग और आधारभूत संरचना के चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित दिखाई देते हैं।22 हजार आंगनबाड़ी नियुक्तियों से लेकर मिथिलांचल में औद्योगिक पुनर्जीवन और शहरों में पेयजल योजनाओं तक, सरकार ने विकास का व्यापक खाका पेश करने की कोशिश की है।अब इन फैसलों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषणाएं कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ जमीन पर उतरती हैं।
बिहार की जनता की नजर अब कैबिनेट के इन फैसलों के वास्तविक परिणामों पर रहेगी।
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