बी. के. झा
NSK News


नई दिल्ली, 20 जुलाई
संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर ऐसा राजनीतिक तंज कसा, जिसकी गूंज संसद से लेकर सोशल मीडिया तक सुनाई देने लगी। प्रधानमंत्री ने भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस की ऐतिहासिक सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी की टीम की औसत आयु केवल 28 वर्ष है और फिर मुस्कुराते हुए बोले, “मैं 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा हूं।” इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा राजनीतिक कटाक्ष माना जा रहा है, जिनकी उम्र 56 वर्ष है।
उपलब्धियों के बहाने विपक्ष पर निशाना
संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक महीने में भारत ने विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष और वैश्विक मंच पर कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति आज दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है और यही नया भारत की सबसे बड़ी ताकत है।प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण से इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि इस स्टार्टअप की टीम की औसत उम्र केवल 28 वर्ष है। इसके बाद उन्होंने कहा, “मैं 56 साल के युवा व्यक्ति की बात नहीं कर रहा हूं। मैं उस युवा टीम की बात कर रहा हूं जिसने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का झंडा बुलंद किया है।
“भारत की अंतरिक्ष शक्ति का नया अध्याय
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता केवल एक कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिक क्षमता और युवा प्रतिभा की जीत है। विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल रॉकेट विकसित और प्रक्षेपित करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का विषय है और आने वाले वर्षों में देश के अंतरिक्ष उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
राहुल गांधी पर सीधा राजनीतिक संदेश
हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन “56 साल के युवा” वाले बयान को राजनीतिक हलकों में कांग्रेस नेता पर सीधा तंज माना गया। संसद का सत्र शुरू होने से पहले ही इस टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने विज्ञान और नवाचार की उपलब्धि को विपक्ष पर राजनीतिक प्रहार के साथ जोड़ते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि देश को आगे बढ़ाने वाली शक्ति युवा नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति है।
संसद सत्र से पहले ही तेज हुई सियासी तल्खी
मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। विपक्ष जहां महंगाई, बेरोजगारी, चुनावी मुद्दों और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं प्रधानमंत्री ने पहले ही दिन विकास, विज्ञान और युवा शक्ति के मुद्दे को केंद्र में रखकर राजनीतिक विमर्श की दिशा तय करने का प्रयास किया।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों पक्षों के बीच तीखे राजनीतिक हमले और जवाबी हमले देखने को मिल सकते हैं।
ऐसे में यह मॉनसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी बड़ा मंच बनने की संभावना है।
प्रधानमंत्री की एक पंक्ति—”मैं 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा हूं”—ने पहले ही दिन यह संकेत दे दिया है कि संसद के इस सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक मुकाबला बेहद तीखा रहने वाला है।
