बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 25 मई
अफ्रीका का दिल कहे जाने वाले कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक बार फिर मौत ने दस्तक दी है। जंगलों और खनिज संपदा से भरे इस देश पर अब इबोला वायरस का ऐसा कहर टूटा है, जिसने पूरे इलाके में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। गांवों से लेकर शहरों तक अस्पतालों में अफरा-तफरी है, स्वास्थ्यकर्मी चौबीसों घंटे मोर्चे पर डटे हैं और लोग हर बुखार को मौत का संकेत मानकर सहमे हुए हैं।कांगो सरकार के ताजा आंकड़ों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
देश के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस के संदिग्ध मामलों की संख्या 900 के पार पहुंच चुकी है। सरकारी जानकारी के मुताबिक अब तक 904 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 119 लोगों की संदिग्ध मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा केवल बीमारी नहीं, बल्कि उस मानवीय त्रासदी की कहानी कह रहा है जो धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है।
पूर्वी कांगो बना महामारी का केंद्र
इबोला का सबसे ज्यादा असर कांगो के इतुरी प्रांत में देखा जा रहा है। यह वही इलाका है जो पहले भी हिंसा, विस्थापन और कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण संकट झेलता रहा है। अब इबोला ने यहां हालात और भयावह बना दिए हैं।स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक कई गांवों में लोग डर के कारण अस्पतालों तक नहीं पहुंच रहे। कहीं इलाज की कमी है तो कहीं जागरूकता का अभाव। यही वजह है कि संक्रमण की श्रृंखला तेजी से फैलती दिखाई दे रही है। कई मामलों में मरीजों की पहचान तब हो रही है जब संक्रमण परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंच चुका होता है।
WHO ने जताई गंभीर चिंता
World Health Organization ने इस प्रकोप को कांगो के लिए “हाई रिस्क” करार दिया है। संगठन का कहना है कि स्थानीय स्तर पर यह स्थिति बेहद गंभीर है, हालांकि फिलहाल वैश्विक स्तर पर इसके व्यापक फैलाव का खतरा सीमित माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला की सबसे बड़ी चुनौती इसकी तेज मृत्यु दर और सीमित स्वास्थ्य संसाधन हैं। यदि शुरुआती चरण में संक्रमित मरीजों की पहचान न हो पाए तो वायरस तेजी से समुदायों में फैल सकता है।
भारत भी सतर्क, एयरपोर्ट्स पर बढ़ी निगरानी
इबोला के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने भी अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय यानी DGHS ने राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।सरकार ने खास तौर पर Democratic Republic of the Congo, Uganda और South Sudan से आने वाले यात्रियों पर विशेष नजर रखने को कहा है। एयरपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय प्रवेश बिंदुओं पर स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य सलाह में कहा गया है कि यदि किसी यात्री में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो वह तुरंत स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना दे।दरअसल, कोरोना महामारी के बाद दुनिया अब किसी भी संक्रामक बीमारी को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। भारत भी शुरुआती सतर्कता के जरिए किसी संभावित खतरे को रोकना चाहता है।
क्या है इबोला?
क्यों इतना खतरनाक है यह वायरस?
इबोला वायरस दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। कई बार संक्रमित जानवरों से भी यह संक्रमण इंसानों तक पहुंच जाता है।बीमारी की शुरुआत सामान्य वायरल संक्रमण जैसी लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करने लगती है। गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव और अंगों के फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
इबोला के प्रमुख लक्षण
भारत सरकार द्वारा जारी स्वास्थ्य सलाह के मुताबिक इबोला के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं—
तेज बुखार
अत्यधिक कमजोरी
मांसपेशियों में दर्द
सिरदर्द गले में खराश
उल्टी और दस्त
पेट दर्द
त्वचा पर चकत्ते
आंखों का लाल होना
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा जांच बेहद जरूरी है, खासकर यदि व्यक्ति हाल में प्रभावित देशों की यात्रा करके लौटा हो।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा दबाव
कांगो में स्वास्थ्यकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमित लोगों की पहचान और उन्हें अलग रखना है। कई इलाकों में चिकित्सा सुविधाएं बेहद कमजोर हैं। वहीं अफवाहें और डर भी स्थिति को और खराब कर रहे हैं। कुछ जगहों पर लोग स्वास्थ्य टीमों का विरोध तक कर रहे हैं।मानवीय संगठनों का कहना है कि यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है। खासकर सीमावर्ती इलाकों में संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।
दुनिया के लिए चेतावनी
इबोला का यह नया प्रकोप दुनिया को एक बार फिर याद दिला रहा है कि महामारी का खतरा कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता। विज्ञान और चिकित्सा ने भले बड़ी प्रगति की हो, लेकिन कमजोर स्वास्थ्य ढांचा और जागरूकता की कमी किसी भी बीमारी को भयावह रूप दे सकती है।
कांगो आज सिर्फ एक देश की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी बनकर उभरा है— क्योंकि वायरस सीमाएं नहीं देखते, और लापरवाही अक्सर बहुत भारी पड़ती है।
