सत्ता, सस्पेंस और सुरक्षा… कर्नाटक में एक साथ गरम हुई दो बड़ी लड़ाइयाँ

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/बेंगलूर, 25 मई

दक्षिण की राजनीति में इन दिनों कर्नाटक सबसे बड़ा अखाड़ा बना हुआ है। एक तरफ मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी तापमान उबाल पर है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई बड़ी चूक ने प्रशासनिक मशीनरी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक सत्ता के गलियारों में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, बल्कि यह भी है कि क्या कांग्रेस अपने भीतर उठ रहे नेतृत्व संकट को संभाल पाएगी?

दिल्ली बुलावे ने बढ़ाई हलचल

कर्नाटक के मुख्यमंत्री Siddaramaiah को अचानक दिल्ली तलब किए जाने के बाद राजनीतिक अटकलों ने नई रफ्तार पकड़ ली है। सूत्रों के मुताबिक 26 मई को होने वाली यह बैठक सामान्य औपचारिकता नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन का निर्णायक पड़ाव मानी जा रही है। चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान बंद कमरे में ऐसा फार्मूला तलाशना चाहता है जिससे सरकार भी बची रहे और दोनों बड़े गुट भी संतुष्ट रहें।दिलचस्प बात यह है कि खुद सिद्धारमैया पहले कह चुके थे कि वे केवल आलाकमान के बुलावे पर ही दिल्ली जाएंगे।

अब जब बुलावा आया है, तो इसका राजनीतिक अर्थ भी निकाला जा रहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व अब उस “ढाई-ढाई साल” वाले कथित समझौते पर अंतिम निर्णय लेने के दबाव में है जिसकी चर्चा सरकार बनने के दिन से होती रही है।

डीके कैंप का शक्ति प्रदर्शन

उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के समर्थकों ने पिछले कुछ दिनों में जिस तरह खुलकर शक्ति प्रदर्शन किया है, उसने कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मैसूर में जन्मदिन समारोह के दौरान “नेक्स्ट सीएम डीके बॉस” लिखे केक से लेकर बेंगलुरु, बेलगावी और कई शहरों में लगे विशाल पोस्टरों तक, हर जगह एक ही संदेश देने की कोशिश हुई— अब नेतृत्व परिवर्तन का समय आ चुका है।दरअसल शिवकुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि संगठन और संसाधनों पर मजबूत पकड़ रखने वाले रणनीतिक खिलाड़ी माने जाते हैं। कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर लगातार रेखांकित किया जाता रहा है। यही वजह है कि उनका खेमा अब खुलकर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश कर रहा है।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा डर

कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन हुआ तो सिद्धारमैया समर्थक नाराज हो सकते हैं, और यदि बदलाव नहीं हुआ तो शिवकुमार गुट में असंतोष गहरा सकता है। यही कारण है कि पार्टी अब “कैबिनेट सर्जरी” के रास्ते से संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।सूत्र बताते हैं कि सरकार के तीन साल पूरे होने पर कई मंत्रियों की छुट्टी संभव है। युवा चेहरों को मौका देकर कांग्रेस एक नया राजनीतिक संदेश देना चाहती है। यह कवायद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि अंदरूनी असंतोष को ठंडा करने की रणनीति भी मानी जा रही है।

क्या राहुल-खड़गे निकालेंगे समाधान?

दिल्ली में होने वाली बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि मामला बेहद संवेदनशील हो चुका है। पार्टी नहीं चाहती कि कर्नाटक में वही स्थिति बने जो कई राज्यों में नेतृत्व संघर्ष के कारण बन चुकी है।कांग्रेस अच्छी तरह जानती है कि कर्नाटक दक्षिण भारत में उसका सबसे मजबूत किला है। यदि यहां अंदरूनी कलह खुलकर बाहर आई, तो इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

दूसरी तरफ… पीएम मोदी की सुरक्षा में सेंध से हड़कंप

जहां कांग्रेस सत्ता संतुलन में उलझी है, वहीं कर्नाटक प्रशासन प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई गंभीर चूक को लेकर सवालों के घेरे में है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की 10 मई की बेंगलुरु यात्रा के दौरान जिस तरह संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली, उसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।अब इस मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें एक पीएसआई, एक एएसआई और चार कांस्टेबल शामिल हैं।

यह कार्रवाई केवल अनुशासनात्मक कदम नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र को दिया गया सख्त संदेश माना जा रहा है।

आधे घंटे पहले मिली थी विस्फोटक सामग्री

घटना कनकपुरा रोड स्थित Art of Living Foundation के पास वाडेराहल्ली गेट पर हुई थी। प्रधानमंत्री के काफिले के गुजरने से महज कुछ समय पहले सुरक्षा टीम को संदिग्ध बॉक्स दिखाई दिया। जांच में उसमें जिलेटिन स्टिक्स, बैटरियां और टाइमर जैसी सामग्री मिली।बम निरोधक दस्ते ने तुरंत इलाके को घेरा और स्थिति को नियंत्रित किया।

हालांकि विस्फोट नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे बेहद गंभीर चूक मान रही हैं। सवाल उठ रहा है कि इतनी हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान रूट सैनिटाइजेशन में आखिर चूक कहां हुई?

जांच के घेरे में पूरा सुरक्षा तंत्र

घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। पुलिस ने छह विशेष जांच टीमें बनाई हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जिलेटिन की खरीद-फरोख्त की जांच हो रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी National Investigation Agency को भी जांच सौंपे जाने पर चर्चा हुई। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है और न ही यह साफ हो पाया है कि विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची।

सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठे बड़े सवाल

यह घटना ऐसे समय हुई है जब देशभर में वीआईपी सुरक्षा को लेकर पहले से ही अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री के रूट पर विस्फोटक सामग्री मिलना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है।

कर्नाटक पुलिस अब सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त करने की बात कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे सरकार की बड़ी नाकामी बताकर हमला बोलने की तैयारी में है।

कर्नाटक में राजनीति और प्रशासन— दोनों पर दबाव

एक तरफ कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष चरम पर है, दूसरी तरफ सुरक्षा चूक ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में होने वाली बैठक सिर्फ मुख्यमंत्री बदलने या बचाने की कवायद नहीं होगी, बल्कि यह तय करेगी कि कांग्रेस कर्नाटक में स्थिरता बनाए रख पाती है या नहीं।आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। सत्ता का सिंहासन अभी भले सिद्धारमैया के पास हो, लेकिन उसके चारों तरफ राजनीतिक भूकंप की आहट साफ सुनाई देने लगी है।

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