युद्ध की दहलीज पर दुनिया! ईरान पर ट्रंप का निर्णायक दांव, व्हाइट हाउस में हाई वोल्टेज मंथन तेज

बी के झा

NSK

वाशिंगटन/ नई दिल्ली, 24 मई

दुनिया एक बार फिर पश्चिम एशिया में बड़े विस्फोट के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से simmer कर रहा तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक फैसला पूरे मध्य-पूर्व की दिशा बदल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि वह रविवार तक यह तय कर सकते हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जाए या फिर किसी नए समझौते के जरिए टकराव को टाला जाए।

व्हाइट हाउस में जारी इस रणनीतिक मंथन ने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि हालात “50-50” की स्थिति में हैं। यानी युद्ध और शांति — दोनों रास्ते अभी खुले हैं। यही वजह है कि पूरी दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिक गई हैं।

व्हाइट हाउस में युद्ध या समझौते पर मंथन

सूत्रों के मुताबिक ट्रंप अपने विशेष दूत Steve Witkoff, दामाद Jared Kushner और उपराष्ट्रपति JD Vance के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर रहे हैं। चर्चा का केंद्र ईरान का नया प्रस्ताव है, जिसमें युद्धविराम और अगले 30 दिनों तक विस्तृत वार्ता जारी रखने का प्रारंभिक खाका बताया जा रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने नई दिल्ली में बड़ा संकेत देते हुए कहा कि “किसी भी वक्त बड़ा ऐलान हो सकता है।” हालांकि उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।रूबियो के बयान से साफ है कि वॉशिंगटन की रणनीति अब केवल युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कूटनीतिक दबाव और सामरिक शक्ति — दोनों का इस्तेमाल साथ-साथ करना चाहता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा केंद्र

इस पूरे संकट के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री मार्ग बिना किसी रुकावट और शुल्क के खुला रहे। वहीं ईरान इसे अपनी सामरिक ताकत के रूप में इस्तेमाल करता रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत विफल होती है और ईरान जलडमरूमध्य पर दबाव बनाता है, तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। भारत, चीन और यूरोप जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

पाकिस्तान की सक्रियता ने बढ़ाई बेचैनी

इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir का तेहरान पहुंचना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। कूटनीतिक हलकों में इसे केवल औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान इस संकट में खुद को मध्यस्थ या क्षेत्रीय संतुलनकर्ता के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि भारतीय रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की भूमिका सीमित ही रहेगी, क्योंकि अमेरिका और ईरान दोनों अपने बड़े फैसले सीधे कूटनीतिक चैनलों से लेना पसंद करेंगे।

ट्रंप ने बेटे की शादी छोड़ी, दुनिया को दिया संदेश

इस पूरे संकट के बीच ट्रंप का अपने बेटे Donald Trump Jr. की शादी में शामिल न होने का फैसला भी राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि “यह समय वॉशिंगटन में रहने का है, क्योंकि दुनिया बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है।”राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप खुद को एक ऐसे “युद्धकालीन राष्ट्रपति” की छवि में प्रस्तुत करना चाहते हैं, जो निजी जीवन से ऊपर राष्ट्रीय और वैश्विक संकट को रखता है। यह कदम अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी बड़ा संदेश माना जा रहा है, खासकर तब जब ट्रंप अपने समर्थकों के बीच मजबूत नेतृत्व की छवि बनाए रखना चाहते हैं।

नेतन्याहू फैक्टर भी अहम

हालांकि ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि Benjamin Netanyahu किसी संभावित समझौते को लेकर चिंतित हैं, लेकिन इजरायल इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद करीब से नजर बनाए हुए है।इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता रहा है। ऐसे में यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई नरम समझौता होता है, तो तेल अवीव की बेचैनी बढ़ सकती है। दूसरी ओर यदि सैन्य कार्रवाई होती है, तो पूरा पश्चिम एशिया युद्ध की आग में झुलस सकता है।

दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है — क्या ट्रंप “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत युद्ध का रास्ता चुनेंगे, या फिर एक ऐसी डील करेंगे जो उन्हें कूटनीतिक जीत दिला सके?

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप फिलहाल “मैक्सिमम प्रेशर” की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यानी ईरान पर इतना दबाव बनाया जाए कि वह परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को लेकर अमेरिका की शर्तें मानने को मजबूर हो जाए।लेकिन यदि बातचीत टूटती है, तो आने वाले दिन केवल मध्य-पूर्व ही नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शांति के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।

फिलहाल पूरी दुनिया उस फैसले का इंतजार कर रही है, जो व्हाइट हाउस के बंद कमरों में लिखा जा रहा है।

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