बी के झा
NSK




पटना, 17 जुन
बिहार की राजनीति में विकास के नए आख्यान गढ़ने की कोशिश के बीच राज्य सरकार ने पर्यटन, मत्स्यपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और निवेश को लेकर कई बड़ी घोषणाएं की हैं। एक ओर जहां 15 जुलाई से मात्र 2100 रुपये में पटना की हेलीकॉप्टर सैर शुरू करने का ऐलान किया गया है, वहीं दूसरी ओर मछली उत्पादन, सौर ऊर्जा, ग्रामीण बाजार और उद्योगों के लिए स्वतः लाइसेंस जैसी योजनाओं ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन में राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाल रहे सम्राट चौधरी ने राज्य के विकास का एक ऐसा खाका प्रस्तुत किया जिसमें पर्यटन, कृषि, मत्स्यपालन, ऊर्जा और उद्योग को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
बिहार के आसमान में नया अध्याय
सरकार की सबसे चर्चित घोषणा हेलीकॉप्टर पर्यटन सेवा रही। यदि यह योजना सफल होती है तो पहली बार आम नागरिक अपेक्षाकृत कम शुल्क में पटना शहर को आसमान से देख सकेंगे।सरकार का दावा है कि राजगीर, मुंडेश्वरी धाम, तुतला भवानी, वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व और प्राकृतिक जलप्रपातों तक हवाई पर्यटन सेवा बिहार की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई पहचान दे सकती है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को हवाई संपर्क से जोड़ना राज्य के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। विशेष रूप से राजगीर और वाल्मीकिनगर जैसे क्षेत्रों में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बिहार का सपनाकार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष मत्स्य क्षेत्र का विस्तार रहा।सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार अपनी आवश्यकता की लगभग 95 प्रतिशत मछली का उत्पादन स्वयं कर रहा है। अब सरकार की नजर निर्यात बाजार पर है।
शिक्षाविदों का मानना है कि यदि बिहार गुणवत्तापूर्ण मत्स्य उत्पादन और कोल्ड चेन नेटवर्क विकसित कर लेता है तो यह क्षेत्र कृषि के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा रोजगार स्रोत बन सकता है।कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार मछली उत्पादन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें छोटे किसानों, भूमिहीन परिवारों और महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी संभव है।
तालाब के ऊपर सोलर, नीचे मछली: विकास का नया मॉडल
सरकार की सबसे अभिनव योजना तालाबों पर सोलर पैनल लगाने की है।विशेषज्ञ इसे “डबल इनकम मॉडल” बता रहे हैं। इसके तहत एक ही जलाशय से मछली उत्पादन और बिजली उत्पादन दोनों किए जा सकेंगे।ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल हुआ तो बिहार देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का अनूठा संगम दिखाई देगा।
उद्योगों को 30 दिन में लाइसेंस या स्वतः मंजूरी
सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक और बड़ा संकेत दिया है।घोषणा के अनुसार यदि उद्योग स्थापित करने के लिए आवेदन करने वाले को 30 दिनों के भीतर लाइसेंस नहीं मिलता है तो 31वें दिन उसे स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।उद्योग जगत के कुछ प्रतिनिधियों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि बिहार में निवेश का सबसे बड़ा अवरोध प्रशासनिक देरी रही है। यदि सरकार इस वादे को जमीन पर उतार पाती है तो औद्योगिक माहौल बेहतर हो सकता है।
हालांकि प्रशासनिक विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना मजबूत निगरानी व्यवस्था के स्वतः स्वीकृति व्यवस्था भविष्य में विवादों का कारण भी बन सकती है।
समाजसेवी संगठनों की प्रतिक्रिया
ग्रामीण विकास और किसान हितों से जुड़े कई सामाजिक संगठनों ने मछली उत्पादन, ग्रामीण हाट और सस्ती ऋण व्यवस्था की घोषणा का स्वागत किया है।उनका कहना है कि गांवों में दूध, सब्जी और मछली के संयुक्त बाजार बनने से किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।हालांकि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है। पिछले वर्षों में भी कई योजनाएं कागजों पर अधिक और जमीन पर कम दिखाई दी थीं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
महागठबंधन के नेताओं ने सरकार की घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत चुनौतियां अभी भी गंभीर बनी हुई हैं।विपक्षी दलों का आरोप है कि हेलीकॉप्टर पर्यटन जैसी योजनाएं आकर्षक जरूर हैं, लेकिन आम जनता की प्राथमिकता रोजगार, सिंचाई, बेहतर सड़क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है।विपक्ष का यह भी कहना है कि राज्य में पहले से मौजूद पर्यटन स्थलों की आधारभूत सुविधाएं अभी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में हवाई पर्यटन से पहले बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी पूछा कि हेलीकॉप्टर सेवा पर दी जाने वाली सब्सिडी का वास्तविक लाभ किन वर्गों को मिलेगा और क्या यह खर्च ग्रामीण विकास पर अधिक उपयोगी नहीं हो सकता था।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए सरकार विकास और निवेश के मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है।उनके अनुसार हेलीकॉप्टर पर्यटन, उद्योगों को स्वतः लाइसेंस, मत्स्य क्षेत्र में निवेश और सोलर परियोजनाएं केवल प्रशासनिक फैसले नहीं बल्कि बिहार की नई राजनीतिक कथा का हिस्सा हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि ये योजनाएं धरातल पर सफल होती हैं तो सरकार को राजनीतिक लाभ मिल सकता है, लेकिन यदि घोषणाएं केवल मंचों तक सीमित रह गईं तो विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया अवसर मिलेगा।
विकास बनाम घोषणा की राजनीति
बिहार लंबे समय से विकास और संभावनाओं के बीच खड़ा राज्य रहा है। नई घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि सरकार कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को पर्यटन, ऊर्जा और उद्योग से जोड़कर विकास का नया मॉडल तैयार करना चाहती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हेलीकॉप्टर से शुरू हुई यह उड़ान बिहार की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, या फिर यह भी राजनीतिक घोषणाओं के लंबे इतिहास का एक और अध्याय बनकर रह जाएगी।आने वाले महीनों में इसका जवाब जमीन पर दिखने वाले परिणाम तय करेंगे, क्योंकि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि बदलाव देखना चाहती
