बी के झा
NSK


नई दिल्ली/तेहरान/मस्कट, 19 अप्रैल
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक भारतीय जहाज को बीच समुद्र में रोकते हुए स्पष्ट संदेश दिया—“होर्मुज बंद है, तुरंत वापस जाएं।”
इस संवाद की ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। भारत सरकार ने घटना को गंभीर मानते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया है।
क्या हुआ समुद्र में?
सूत्रों के अनुसार, “भाग्य लक्ष्मी” नामक भारतीय जहाज जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहा था, तभी ईरानी सैन्य इकाई ने रेडियो संदेश भेजा कि जलडमरूमध्य फिलहाल बंद है और जहाज तुरंत लौट जाए। भारतीय कप्तान ने संदेश की पुष्टि की और जहाज ने अपना रास्ता बदल लिया।इसी दौरान दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर फायरिंग की भी खबर सामने आई, हालांकि चालक दल सुरक्षित बताया गया है। यह घटनाक्रम बताता है कि समुद्र में तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक नौवहन संकट में बदल चुका है।
भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने नई दिल्ली में ईरान के राजदूत को बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश सचिव ने साफ कहा कि भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा भारत-गामी जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाए।सरकार के भीतर यह चिंता गहरी है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारत के तेल, गैस, उर्वरक और व्यापारिक आयात पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय: सिर्फ समुद्री विवाद नहीं, शक्ति प्रदर्शन भी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल जहाज रोकने की कार्रवाई नहीं, बल्कि तीन स्तरों पर शक्ति प्रदर्शन है:
1. अमेरिका को संदेशईरान यह दिखाना चाहता है कि यदि उसके बंदरगाहों पर आर्थिक दबाव डाला जाएगा, तो वह वैश्विक व्यापारिक मार्गों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
2. वैश्विक तेल बाजार पर दबावहोर्मुज से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। इस मार्ग पर संकट का मतलब तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक महंगाई का खतरा है।
3. क्षेत्रीय शक्ति संतुलनईरान यह संकेत दे रहा है कि पश्चिम एशिया में उसकी सामरिक भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
समुद्री कानून विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां निर्दोष मार्गाधिकार (Right of Innocent Passage) और ट्रांजिट पैसेज जैसे सिद्धांत लागू होते हैं।विशेषज्ञों का कहना है:किसी देश को मनमाने ढंग से वैश्विक जलमार्ग बंद करने का अधिकार नहीं है।व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी या धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून के गंभीर प्रश्न खड़े करती है।यदि संकट बढ़ता है, तो मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों तक जा सकता है।हालांकि ईरान अपने सुरक्षा हितों का हवाला दे सकता है, लेकिन व्यापारिक जहाजों को रोकना वैश्विक समुदाय के लिए चिंताजनक संकेत है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: सरकार सतर्क थी या नहीं?
भारत में विपक्षी दलों ने इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष का कहना है कि:भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए पहले से क्या रणनीति थी?क्या भारतीय नौसैनिक एस्कॉर्ट बढ़ाए जाएंगे?
ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर वैकल्पिक योजना क्या है?
कुछ नेताओं ने कहा कि सरकार को संसद और जनता के सामने स्पष्ट रोडमैप रखना चाहिए ताकि देश को भरोसा मिल सके कि आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित है।
आर्थिक असर: पेट्रोल से रसोई तक चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज में तनाव जारी रहा तो असर कई स्तरों पर दिख सकता है:
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है
एलपीजी और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है
उर्वरक आयात महंगा पड़ सकता है
शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं, घरेलू अर्थव्यवस्था का भी प्रश्न है।
बड़ा सवाल: निर्णय तेहरान में या IRGC के हाथ में?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है—
क्या ईरान की चुनी हुई सरकार और उसकी सैन्य संरचना एक ही रणनीति पर काम कर रही हैं?
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री ने मार्ग खुला होने का संकेत दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर IRGC ने सख्त नियंत्रण फिर लागू कर दिया। यदि यह सही है, तो इसका अर्थ है कि कूटनीति और सैन्य नीति में अंतर है।
निष्कर्ष:
समुद्र में संकट, दुनिया सांस रोके देख रही
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल पानी का रास्ता नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन-रेखा है। भारतीय जहाज को लौटाने की घटना ने बता दिया है कि पश्चिम एशिया का तनाव अब सीधे भारत के व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा हितों को छू रहा है।भारत के सामने चुनौती दोहरी है—एक ओर अपने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा, दूसरी ओर संतुलित कूटनीति।
आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संकट अस्थायी तनाव है या वैश्विक आर्थिक भूचाल की शुरुआत।
