बी. के. झा
NSK

पटना, 14 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा जिले की हाई-प्रोफाइल जाले सीट पर भाजपा उम्मीदवार और राज्य के मंत्री जिवेश कुमार उर्फ जीवेश मिश्रा ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी ऋषि मिश्रा को 21,862 वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार यह सीट अपने नाम कर ली।इस जीत के साथ जाले विधानसभा ने एक बार फिर साफ संदेश दे दिया है कि यहां राजनीतिक समीकरणों से अधिक जनता विकास, कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता देती है।
फाइनल रिज़ल्ट
जाले 2025: किसे मिले कितने वोट(शाम 7 बजे जारी आधिकारिक आंकड़े)उम्मीदवार पार्टी कुल वोटजिवेश मिश्रा BJP 1,00,496ऋषि मिश्रा कांग्रेस 78,634रणजीत शर्मा जन सुराज 5,150फैसल रहमान AIMIM 4,6669 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुकाबला शुरू से अंत तक भाजपा और कांग्रेस के बीच दोतरफा ही बना रहा।
सुबह से शाम तक—कैसे बढ़त बढ़ाकर ‘जिवेश लहर’ बनी हैट्रिक की सुनामीजाले चुनाव की मतगणना सुबह 8 बजे पोस्टल बैलट से शुरू हुई। पहले ही राउंड में भाजपा के जीवेश ने बढ़त बनाई, और फिर यह बढ़त रुकने के बजाय हर राउंड में बढ़ती चली गई।राउंड-वाइज बढ़त का पूरा क्रॉनिकलसुबह
8:45 बजे – शुरुआती रुझानजीवेश आगेराउंड 2 (10:39 बजे):जिवेश– 8771ऋषि– 5807> बढ़त: 2,964राउंड 5 (11:57 बजे):जिवेश– 20,301ऋषि– 13,628> बढ़त: 6,673राउंड 7 (12:50 बजे):जिवेश– 26,237ऋषि– 21,347बढ़त स्थिर रूप से बढ़ती रहीराउंड 13 (03:19 बजे):जिवेश– 45,670ऋषि– 38,650 बढ़त: 7,020शाम तक यह बढ़त तोड़कर 21,862 तक पहुंच गई और जाले ने तीसरी बार जिवेश मिश्रा पर भरोसा जताया।जन सुराज और AIMIM का कमजोर प्रदर्शनप्रशांत किशोर की जन सुराज के उम्मीदवार रणजीत शर्मा और AIMIM प्रत्याशी फैसल रहमान मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाए। दोनों मिलकर भी कुल वोटों में 10% तक का हिस्सा नहीं ले सके।यह दिखाता है कि जाले की लड़ाई पारंपरिक ताकतों के बीच ही सिमटी रही, और मतदाता नए प्रयोगों के बजाय केंद्र-बिंदु उम्मीदवारों पर भरोसा कर रहे थे।
पृष्ठभूमि:
जाले की राजनीति का समीकरण क्यों है खासजाले से 2015 और 2020 में भी भाजपा के जिवेश मिश्रा विजयी रहे थे।2020 में उन्होंने कांग्रेस के मशकूर उस्मानी को 21 हजार से अधिक वोटों से हराया था।कांग्रेस ने इस बार पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा को उतारकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की, लेकिन उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं बदला।2014 के उपचुनाव में ऋषि मिश्रा जदयू टिकट पर जाले से विधायक बने थे।जाले में इस बार मतदान 63.51% रहा, जो बड़ी संख्या में मतदान के प्रति जनता के उत्साह को दिखाता है।
जाले ने क्यों दिया हैट्रिक
जनादेश?एक संपादकीय विश्लेषण
जीवेश मिश्रा की स्थानीय पकड़ और संगठनात्मक मजबूत जमीनी नेटवर्क
भाजपा की राज्यव्यापी लहर और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभावविपक्ष में कांग्रेस का बिखरा हुआ समीकरणजाले की सामाजिक संरचना में भाजपा की बढ़ती स्वीकार्यता मतगणना केंद्रों पर माहौल पूरी तरह भाजपा के पक्ष में था। हर राउंड में बढ़त का बढ़ना इस बात का संकेत था कि जाले की जनता ने इस बार भी कोई दुविधा नहीं रखी।
निष्कर्ष:
जाले ने इतिहास दोहराया—हैट्रिक के साथ भरोसा भी गहरा हुआइस धमाकेदार जीत के साथ जिवेश मिश्रा ने साबित कर दिया कि जाले न केवल उनका राजनीतिक गढ़ है, बल्कि प्रदेश की सियासत के बड़े नेताओं में उनकी गिनती भी मजबूती के साथ हो रही है।लगातार तीसरी जीत यह संदेश देती है कि जाले के मतदाता किसी प्रयोग के मूड में नहीं, बल्कि स्थिर नेतृत्व और लगातार विकास कार्यों पर भरोसा कर रहे हैं।
