बी के झा
पटना/गांधी मैदान:, 20 नवंबर
बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक ऐसी राजनीतिक मिसाल कायम की, जिसकी बराबरी करना देश के किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होगा।
पटना का गांधी मैदान सत्ता, संतुलन और रणनीति का साक्षी बना, जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमंत्री समेत 26 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।इस समारोह की भव्यता का अंदाज़ इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, और देशभर के मुख्यमंत्री मंच पर मौजूद थे—जो बताता है कि
बिहार अब भाजपा–जेडीयू गठबंधन की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
डिप्टी सीएम की जोड़ी जस की तस: सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा शपथ ग्रहण की शुरुआत मुख्यमंत्री के बाद राज्य की सबसे शक्तिशाली जोड़ी से हुई—
सम्राट चौधरी (डिप्टी सीएम-1)
विजय सिन्हा (डिप्टी सीएम-2)
दोनों नेता न सिर्फ पिछली सरकार का अहम हिस्सा थे, बल्कि भाजपा ने इन दोनों पर फिर से भरोसा जताते हुए संदेश दिया कि पार्टी संगठनात्मक अनुशासन और मैदान के प्रदर्शन को सर्वोच्च तरजीह देती है।
कैबिनेट में अनुभव का दम—बिजेंद्र, विजय चौधरी, मंगल पांडेय जैसे दिग्गज नीतीश कुमार की नई टीम में एक ओर भारी-भरकम अनुभव वाले
वही पुराने तपे-तपाए चेहरे हैं—
विजय कुमार चौधरी
बिजेंद्र प्रसाद यादव
श्रवण कुमार
मंगल पांडेय
अशोक चौधरी
दिलीप जायसवाल
इनमें से कई मंत्री पिछले 15–20 वर्षों से बिहार कैबिनेट की धुरी रहे हैं, और इस सूची में उनकी मौजूदगी बताती है कि नीतीश कुमार अभी भी “अनुभव की राजनीति” को सबसे अधिक महत्व देते हैं।
पहली बार कैबिनेट में, लेकिन उच्च उम्मीदें—
श्रेयसी सिंह और अन्य नए चेहरे श्रेयसी सिंह, अंतरराष्ट्रीय शूटिंग चैंपियन से विधायक बनीं और अब मंत्री, इस कैबिनेट की सबसे चर्चित नई प्रविष्टि हैं।यह संकेत है कि भाजपा युवाओं, महिलाओं और खेल जगत के प्रतिनिधित्व को भी सत्ता में जगह देने की इच्छुक है।इसके साथ ही केंद्र रोशन,दीपक प्रकाश,संजय कुमार सिंह,संजय कुमार,प्रमोद कुमारजैसे नाम नए दौर की राजनीति का प्रतीक हैं, जिन पर प्रदर्शन का दबाव और अपेक्षाओं का भार दोनों रहेगा।
रामकृपाल यादव—लालू परिवार की छाया से सत्ता के शिखर तक
इस कैबिनेट में सबसे ज्यादा राजनीतिक विमर्श जिस नाम को लेकर हो रहा है, वह है रामकृपाल यादव। पाँच बार के लोकसभा सांसद, कभी लालू यादव के सबसे करीबी, फिर मीसा भारती के खिलाफ बगावत कर भाजपा में शामिल… और अब पहली बार विधायक बनकर मंत्री।
उनका शामिल होना दो संदेश देता है
1. भाजपा यादव समाज को गंभीर प्रतिनिधित्व दे रही है।
2. आरजेडी से कभी जुड़े रहे बड़े चेहरे अब एनडीए की राजनीति का स्थायी हिस्सा बन चुके हैं।इसी सामाजिक समीकरण को मजबूत करने के लिए बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत कई यादव नेताओं को भी जिम्मेदारी दी गई है।
कैबिनेट का सामाजिक–राजनीतिक समीकरण: हर जाति, हर क्षेत्र, हर शक्ति केंद्र को संबोधित संदेश नई कैबिनेट की संरचना दिखाती है कि नीतीश कुमार और भाजपा ने मिलकर एक बेहद संतुलित टीम तैयार की है—
ओबीसी–यादव:रामकृपाल यादव बिजेंद्र यादव मदन सहनी
सवर्ण:
नितिन नवीन मंगल पांडेय विजय चौधरी अशोक चौधरी
दलित–अति पिछड़ा:
संतोष सुमन
रमा निषाद
सुनील कुमार
अल्पसंख्यक:
मोहम्मद जमा खान
स्पष्ट है कि इस बार कैबिनेट सिर्फ प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि 2029 और 2030 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नीतीश कैबिनेट की पूरी लिस्ट:
सरकार का नया पॉवर मैप**
1. नीतीश कुमार —
मुख्यमंत्री कैबिनेट के सदस्य:
2. सम्राट चौधरी
3. विजय सिन्हा
4. विजय कुमार चौधरी
5. बिजेंद्र प्रसाद यादव
6. श्रवण कुमार
7. मंगल पांडेय
8. दिलीप जायसवाल
9. अशोक चौधरी
10. लेशी सिंह
11. मदन सहनी
12. नितिन नवीन
13. रामकृपाल यादव
14. संतोष सुमन
15. सुनील कुमार
16. मोहम्मद जमा खान
17. संजय सिंह टाइगर
18. अरुण शंकर प्रसाद
19. सुरेंद्र मेहता
20. नारायण प्रसाद
21. रमा निषाद
22. लखेंद्र रोशन
23. श्रेयसी सिंह
24. प्रमोद कुमार
25. संजय कुमार
26. संजय कुमार सिंह
27. दीपक प्रकाश
निष्कर्ष:
नीतीश की 10वीं पारी—अनुभव + युवा ऊर्जा + भाजपा की रणनीति =
एक नई राजनीतिक संरचना**यह कैबिनेट एक साधारण मंत्रिमंडल लिस्ट नहीं, बल्कि बिहार के अगले 5 वर्षों का राजनीतिक खाका है।
जहाँ भाजपा की पकड़ मजबूत है,नीतीश का अनुभव केंद्रीय भूमिका में है,समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व मिला है,और 2029 की राजनीति के लिए नींव तैयार हो चुकी है।
NSK

