रायसेन की मासूम से दरिंदगी पर फूटा जनआक्रोश; शिवराज सिंह चौहान बोले—“मन आक्रोशित है, अपराधी पकड़े बिना चैन से नहीं बैठूंगा” समाजसेवियों, राजनीतिक विश्लेषकों और पत्रकारों ने जताया दुख, कहा—“यह सिर्फ अपराध नहीं, हमारी सामूहिक विफलता है”

बी के झा

NSK

रायसेन/भोपाल, 24 नवंबर

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में 6 साल की मासूम के साथ हुए अमानवीय दुष्कर्म ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। घटना के तीन दिन बाद भी आरोपी के गिरफ्त से बाहर होने पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा। जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग घंटों जाम रहा और लोग न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे।यह इलाका विदिशा संसदीय क्षेत्र में आता है, जहाँ के सांसद एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं घटनास्थल पर प्रतिक्रिया देने और पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे। शिवराज ने बेहद भावुक शब्दों में कहा—

“मेरे संसदीय क्षेत्र में मासूम के साथ हुई दरिंदगी से मन अत्यंत व्यथित और आक्रोशित है। अपराधी पकड़े बिना मैं चैन से नहीं बैठूंगा।”शिवराज सिंह चौहान अस्पताल पहुँचे, परिवार को दिया भरोसा—“न्याय हर हाल में मिलेगा”भोपाल के केंद्रीय अस्पताल में भर्ती पीड़ित बच्ची का हाल जानने पहुँचे शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बच्ची के उपचार में किसी भी तरह की कमी नहीं रहने दी जाएगी।उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए—इलाज की सर्वोच्च व्यवस्था हो विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार स्थिति पर नजर रखेंपरिवार को किसी भी प्रकार की आर्थिक व चिकित्सीय चिंता न हो केंद्रीय मंत्री ने प्रशासन को सख्त आदेश देते हुए कहा—“आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। गिरफ्तारी के बाद केस को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।”—

अभियुक्त सलमान की तलाश में ड्रोन, कुत्ता दल और 8 पुलिस टीमें; 10 हजार का इनाम घोषित23 वर्षीय आरोपी सलमान, जो घटना के बाद फरार हो गया, पिछले 2–3 महीने से इसी गांव में रह रहा था।पुलिस की 8 टीमें लगातार:जंगलों में सर्च पहाड़ियों की तलाशी ड्रोन द्वारा एरियल स्कैन सीहोर में दबिश जारी रखे हुए हैं।डीजीपी कार्यालय ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।समाजसेवी बोले—“यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, सामाजिक तंत्र की विफलता है”

प्रख्यात समाजसेवी माया वर्मा ने कहा—“एक 6 साल की बच्ची का यूँ निशाना बनना बताता है कि समाज में भय और नैतिकता दोनों घट रहे हैं। कानून सख्त हो सकते हैं, लेकिन संवेदनशीलता और सामाजिक जागरूकता का अभाव भी जिम्मेदार है।”बाल अधिकार कार्यकर्ता अनिल भट्ट का कहना है—

“रेप सिर्फ पुलिस का मसला नहीं है। यह समाज की मानसिक बीमारी है। हमें स्कूलों, पंचायतों और मोहल्लों में जागरूकता अभियान अनिवार्य करने होंगे।”राजनीतिक विश्लेषकों की

टिप्पणी—“

आरोपी का फरार होना पुलिस तंत्र की कमजोरी उजागर करता है”वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक संदीप तिवारी ने इसे गंभीर सुरक्षा विफलता बताया।उन्होंने कहा—“घटना शुक्रवार को हुई, लेकिन तीन दिन बाद भी आरोपी का न पकड़ा जाना प्रदेश की पुलिस-संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है। जनता का सड़क पर उतरना गुस्से और अविश्वास का संकेत है।”

वरिष्ठ लेखक अभय मिश्रा ने कहा—“शिवराज सिंह चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जो स्वाभाविक है। लेकिन जब जनता खुद हाईवे रोक दे, तो यह प्रशासन के प्रति बढ़ते अविश्वास का स्पष्ट संकेत है।”पत्रकारों की प्रतिक्रिया—“हमें सिर्फ घटना नहीं, सिस्टम की हालत भी दिखानी होगी”सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट रश्मि दुबे ने कहा—“अखबारों और चैनलों को सिर्फ सनसनी नहीं, सिस्टम की असफलता भी उजागर करनी चाहिए। यह केस केवल एक बच्ची का दर्द नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र की चूक का दर्पण है।

”इंडिपेंडेंट पत्रकार राहुल शेखावत ने लिखा—“ड्रोन उड़ाने और टीमें भेजने से ज्यादा जरूरी है—जमीनी स्तर पर पुलिस की चौकसी और स्थानीय इंटेलिजेंस की मजबूती। वरना ऐसे अपराध बार-बार दोहराए जाएंगे।”

निष्कर्ष—

एक मासूम की चीख से हिल गया मध्य प्रदेश रायसेन की घटना ने एक बार फिर सवाल उठाया है—क्या हमारी बेटियाँ सुरक्षित हैं?क्या कस्बों और गांवों में सुरक्षा तंत्र पर्याप्त है?क्या हमारा सामाजिक ढाँचा इस हद तक कमजोर हो चुका है?शिवराज सिंह चौहान की सख्त चेतावनी और जनता का उबाल बताता है कि यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की आत्मा पर किया गया क्रूर प्रहार है।

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