बी के झा
NSK


नई दिल्ली, 24 नवंबर
देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार, 24 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली और शपथ ग्रहण के कुछ ही मिनटों बाद वे सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर कार्यभार में जुट गए।नए CJI के पहले दिन का अंदाज़ न सिर्फ न्यायिक गंभीरता का परिचायक रहा, बल्कि अदालत परिसर उनके स्वागत में गूंजती गर्मजोशी और सम्मानपूर्ण भावनाओं से भी सराबोर रहा।महात्मा गांधी और बाबा साहेब को नमन, फिर न्याय यात्रा की शुरुआतसुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने कोर्ट परिसर में लगी महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी—बल्कि यह संदेश था कि भारतीय न्याय व्यवस्था का आधार विचार, मूल्य और संविधान ही हैं, जिन पर न्यायिक संस्थान टिका है।पहले ही दिन 2 घंटे में 17 मामलों की सुनवाई मुख्यमंत्री ख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पहले दिन तीन जजों की पीठ का नेतृत्व किया। उनके साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर भी शामिल थे।सिर्फ दो घंटों में उन्होंने 17 मामलों की सुनवाई की—जो उनके कार्य-प्रणाली की गति और दृढ़ता को प्रदर्शित करता है।उनका पहला निर्णय हिमाचल प्रदेश की एक निजी फर्म द्वारा दायर याचिका पर आया—जिसे न्यायिक समुदाय ने “सुगठित और तीक्ष्ण शुरुआत” कहा।
अदालत में वकीलों की भीड़ और भावनाएं—“किसान का बेटा आज CJI”सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन नायर ने भरे न्यायालय में उनका स्वागत किया।एक वरिष्ठ वकील ने मुस्कुराते हुए कहा—किसान का बेटा आज देश का मुख्य न्यायाधीश बन गया है।”यह सुनकर जस्टिस सूर्यकांत के चेहरे पर हल्की मुस्कान खिल उठी और उन्होंने जवाब दिया—शुक्रिया। मैं चंडीगढ़ के युवा वकीलों को भी देख सकता हूं।”उनका यह उत्तर उनकी विनम्रता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सरलता का परिचायक था।
पहला प्रशासनिक संदेश: ‘तत्काल सूचीबद्धता केवल असाधारण मामलों में’दिन की शुरुआत में ही उन्होंने स्पष्ट किया कि—किसी भी मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध सिर्फ लिखित रूप में किया जाए।”उन्होंने कहा कि मौखिक उल्लेख (oral mentioning) सिर्फ उन परिस्थितियों में स्वीकार होगा जहाँ—किसी की स्वतंत्रता दांव पर हो,मृत्युदंड का प्रश्न हो,या असाधारण स्थिति मौजूद हो।अन्य मामलों में, वकील लिखित नोट देकर रजिस्ट्री को सौंपें और जांच के बाद उसे सूचीबद्ध किया जाएगा।यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व CJI संजीव खन्ना ने मौखिक उल्लेख की परंपरा को बंद किया था, जबकि जस्टिस गवई ने इसे फिर से शुरू कर दिया था।
जस्टिस सूर्यकांत ने एक संतुलित रुख अपनाया है—न तो परंपरा का पूर्ण निषेध और न ही अनियंत्रित ढील।जस्टिस सूर्यकांत की शैली: दृढ़ता + संवेदनशीलता का संतुलन
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनके पहले दिन की कार्यशैली में तीन प्रमुख बातें स्पष्ट दिखीं—
1. व्यवस्था को गति देने की प्रतिबद्धता 17 मामलों की तेजी से सुनवाई बताती है कि वे लंबित मामलों, बैकलॉग और सुनवाई में गति के लिए गंभीर हैं।
2. अनुशासन और संरचना पर जोरमौखिक उल्लेख पर सीमा तय कर उन्होंने कोर्ट के भीतर व्यवस्था और समय प्रबंधन को स्पष्ट किया।
3. विनम्रता और जमीनी अपनापन‘किसान का बेटा’ कहे जाने पर उनकी सहज प्रतिक्रिया अदालत के माहौल को गर्मजोशी से भर गई।नया CJI, नई उम्मीदें जस्टिस
सूर्यकांत के कार्यकाल को न्यायिक सुधार,आम आदमी की पहुंच,और तेज न्याय प्रणालीके संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।उनका पहला दिन ही संकेत देता है कि वे“सख्ती और संवेदनशीलता—दोनों के साथ न्याय प्रणाली में नई ऊर्जा भरने आए हैं।
