बी के झा
नई दिल्ली, 27 नवंबर
भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर, क्वांटम तकनीक और नई पीढ़ी के हथियारों तक फैल चुकी हैं। ऐसे दौर में भारतीय सेना को भविष्य-उन्मुख और तकनीक-संचालित बनाने के लिए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चार बड़े रणनीतिक लक्ष्य तय किए हैं, जिन्हें उन्होंने “2047 की आत्मनिर्भर, सक्षम और स्मार्ट भारतीय सेना का स्प्रिंगबोर्ड” बताया।दो दिवसीय चाणक्य डिफेंस डायलॉग के उद्घाटन पर पेश की गई यह दृष्टि न सिर्फ महत्वाकांक्षी है, बल्कि आने वाली वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अत्यंत आवश्यक भी मानी जा रही है।
1. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी सैन्य प्रौद्योगिकी — भविष्य की रीढ़जनरल द्विवेदी ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य है—‘अत्मनिर्भर भारत’ के तहत सेना की री-इक्विपमेंट और तेजी से इंडियनाइजेशन।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में—स्वदेशी मिसाइलें उपग्रह तकनीक लड़ाकू ड्रोनआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड हथियार प्रणाली तेजी से सेना की संरचना में शामिल हुई हैं।उन्होंने कहा कि “रक्षा निर्माण में भारत का आत्मविश्वास पहले से कई गुना बढ़ा है और यह 2047 की नई सेना की नींव बनेगा।”
रक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:रक्षा विश्लेषक लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) विनोद भाटिया कहते हैं—स्वदेशीकरण के बिना भारत न तो 21वीं सदी के युद्ध लड़ सकता है और न ही वैश्विक शक्ति बन सकता है। जनरल द्विवेदी का पहला लक्ष्य बिल्कुल समयानुकूल है।”
2. इनोवेशन: AI, क्वांटम, साइबर और स्पेस में निर्णायक बढ़तसेना प्रमुख ने कहा—“हमें प्रयोगशाला की सोच से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर प्रभाव पैदा करना होगा। AI, क्वांटम, साइबर डोमेन अब लक्ज़री नहीं, आवश्यकता हैं।”उन्होंने बताया कि भारतीय सेना अब सिर्फ भूमि युद्ध के लिए नहीं, बल्किAI-संचालित युद्ध,ड्रोन-स्वॉर्म,क्वांटम एन्क्रिप्शन,स्पेस मॉनिटरिंग,एडवांस मटेरियल युद्धकी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
रक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:रक्षा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. सुब्रमण्यम कृष्णमूर्ति कहते हैं—2047 की लड़ाई डेटा, अंतरिक्ष और सूचना की गति से लड़ी जाएगी। भारतीय सेना का AI और क्वांटम पर फोकस आने वाले वर्षों में उसे दुनिया की पांच सबसे आधुनिक सेनाओं में शामिल कर देगा।
”3. अनुकूलन और नई सैन्य संरचना—इकोसिस्टम को बेहतर बनानाजनरल द्विवेदी ने कहा कि युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि सिस्टम, ट्रेनिंग, और संरचना से जीते जाते हैं।उन्होंने बताया कि सेना अब नए इकोसिस्टम की ओर बढ़ेगी जिसमें—युद्धक निर्णयों में AI-सहायतातेज़ कमांड-एंड-कंट्रोलथिएटर कमांड संरचना डिजिटल प्रशिक्षण मॉडल जैसी तकनीकें शामिल होंगी।
उन्होंने कहा—“परिवर्तन सिर्फ हथियारों में नहीं, बल्कि संगठनात्मक संस्कृति में भी आवश्यक है।”रक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:पूर्व DGMO ले. जन. सतबीर सिंह (रि.) का कहना है—भारतीय सेना आज के मुकाबले 2047 में पूरी तरह अलग रूप में होगी—अधिक चुस्त, अधिक हल्की और अधिक तकनीक-आधारित।”
4. मिलिट्री-सिविल फ्यूजन — ‘एक राष्ट्र, एक सुरक्षा-लक्ष्य’ की अवधारणाचौथे लक्ष्य के रूप में सेना प्रमुख ने मिलिट्री-सिविल फ्यूजन को भविष्य का निर्णायक मॉडल बताया।यह मॉडल कहता है कि—सेनाशिक्षाविदउद्योगअनुसंधान संस्थानसभी मिलकर भारत की युद्ध क्षमता को अगले स्तर तक ले जाएँगे।
उन्होंने कहा—“युद्ध क्षमता का विकास मल्टी-एजेंसी प्रयास है। एकजुट होकर ही हम भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।”रक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:सैन्य शोधकर्ता प्रवीण साहू कहते हैं—इजराइल, अमेरिका और चीन की सैन्य प्रगति मिलिट्री-सिविल फ्यूजन पर टिकी है। भारत का इस दिशा में बढ़ना निर्णायक कदम है।
”2047 की ओर—तीन चरणों में बदलेगी भारतीय सेनाजनरल द्विवेदी ने बताया कि परिवर्तन की इस यात्रा को तीन चरणों में बांटा गया है—पहला चरण (2032 तक): बुनियादी संरचना और तकनीक को अपग्रेड करने का समय।दूसरा चरण (2032–2037): नई तकनीकों का सेना में व्यापक समावेशन।तीसरा चरण (2037–2047): भारतीय सेना का पूर्ण तकनीकी-सशक्त रूप तैयार होगा।“नई दुनिया, नया युद्ध
—नई भारतीय सेना”सेना प्रमुख ने चेताया कि दुनिया अब बहुध्रुवीय और अधिक प्रतिस्पर्धी हो रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा अब पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन हाइब्रिड युद्ध का रूप ले चुकी है।बदलती दुनिया में सिर्फ वह सेना टिक पाएगी, जो तेजी से बदलेगी। भारतीय सेना इस बदलाव के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”— जनरल उपेंद्र द्विवेदी
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