बी के झा
नई दिल्ली/इस्लामाबाद/रावलपिंडी, 28 नवंबर
पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर उबल पड़ी है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन आलीमा खान ने अडियाला जेल प्रशासन के खिलाफ इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) में अवमानना याचिका दायर कर राजनीतिक माहौल में नया भूचाल ला दिया है। याचिका का आरोप साफ है—कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें अपने भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है।इस याचिका ने न केवल जेल प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि शहबाज सरकार, पंजाब प्रशासन और तालिबान नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट ने दिया था हफ्ते में दो मुलाकात का अधिकार, लेकिन…24 मार्च 2024 के IHC आदेश के मुताबिक 73 वर्षीय इमरान खान से हर मंगलवार और गुरुवार मुलाकात की अनुमति दी गई थी। पर आलीमा का आरोप है कि पिछले कई हफ्तों से उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है।
याचिका में उन्होंने यह भी दावा किया है कि इमरान का स्वास्थ्य ठीक नहीं है और जेल प्रशासन उन्हें आवश्यक कानूनी सुविधाएँ भी नहीं दे रहा।याचिका में जिन अधिकारियों को नामजद किया गया है, उनमें शामिल हैं—
अडियाला जेल सुपरिंटेंडेंट अब्दुल गफूर अनजुम SHO राजा ऐजाज अजीमसंघीय गृह सचिव कैप्टन (रि.) खुर्रम आगा पंजाब गृह सचिव नूरुल अमीन16 घंटे का धरना—पर इमरान तक पहुंच नहींखान की बहन आलीमा और खैबर पख्तूनख्वा के नए मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी ने गुरुवार को अडियाला जेल के बाहर 16 घंटे का शांतिपूर्ण धरना दिया।लेकिन इसके बावजूद मुलाकात की अनुमति नहीं मिली।धरने के दौरान आफरीदी ने कड़े शब्दों में कहा—
“मैंने हर संवैधानिक रास्ता आजमाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ। अब मेरे नेता से मिलने का कौन-सा रास्ता बचा है?हाईकोर्ट में मुलाकात की कोशिश भी नाकामधरने के बाद आफरीदी ने IHC के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की कोशिश की, पर सफलता नहीं मिली।इससे नाराज़ PTI ने ऐलान किया कि शुक्रवार को“न नेशनल असेंबली चलेगी, न सीनेट।”संसद में PTI सांसदों ने नारेबाजी कर सरकार को घेरने की कोशिश की।सरकार का दावा—इमरान ठीक हैं, ‘VIP सुविधाएँ’ दी जा रहीं सरकार और जेल प्रशासन ने इमरान की तबीयत खराब होने की खबरों को खारिज किया है।संसद में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने व्यंग्य में कहा—“इमरान खान को तो निजी शेफ जैसी सुविधाएँ मिल रही हैं। उन्हें बाकी कैदियों से बेहतर व्यवहार मिल रहा है।”सरकार का यह बयान PTI के दावों से बिल्कुल अलग है, जिसके मुताबिक इमरान खान को अकेला रखा जा रहा है और उनके अधिकार छीने जा रहे हैं।
अडियाला जेल का किला—सुरक्षा और मजबूत इमरान समर्थकों की बढ़ती भीड़ और PTI के लगातार प्रदर्शनों को देखते हुए जेल परिसर और उसके आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। पर्यवेक्षक इसे “राजनीतिक टकराव के नए दौर” का संकेत मान रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक क्या कह रहे हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि—यह मामला सिर्फ मुलाकात का नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति परीक्षण का संकेत है।IHC पर बढ़ते राजनीतिक दबाव और प्रशासन पर निर्देश लागू न करने के आरोप पाकिस्तान में संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।KP के मुख्यमंत्री का धरना देना बताता है कि PTI अब टकराव के रास्ते पर पूरी तरह उतर आया है।इस्लामाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इमरान शाहिद का विश्लेषण—
“इमरान खान पर दबाव बढ़ रहा है, पर PTI की सड़कों पर ताकत भी उसी अनुपात में बढ़ी है। यह टकराव 2025 की राजनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित करेगा।PTI का अगला कदम—अगले मंगलवार ‘शक्ति प्रदर्शन’सोहेल आफरीदी ने घोषणा की है कि अगले मंगलवार को हाईकोर्ट और अडियाला जेल के बाहर बड़े पैमाने पर जुटान होगा।PTI इसे “इमरान की न्यायिक स्वतंत्रता की लड़ाई” बता रहा है।
निष्कर्ष—
इमरान खान की जेल से बाहर कौन? अदालत या सड़क?अदालत अपने आदेशों की अवमानना पर सख्ती दिखाती है या राजनीतिक दबाव बढ़कर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी करता है—यह आने वाले दिनों की सबसे बड़ी कहानी होगी।पर एक बात साफ है—इमरान खान जेल में हैं, लेकिन पाकिस्तान की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूम रही है।
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