बी के झा
NSK

लखनऊ / नई दिल्ली, 1 दिसंबर
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के हालिया बयान ने देश की राजनीति और सामाजिक माहौल को एक बार फिर गर्मा दिया है। मदनी द्वारा ‘जेहाद’ शब्द के अर्थ और उसके प्रयोग पर दिए गए विवादित बयान के बाद भाजपा के फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने अत्यंत कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी।सोम ने मदनी पर निशाना साधते हुए कहा—
मदनी जैसे लोग बीमार मानसिकता के हैं। ऐसा न हो कि किसी दिन सनातन सड़क पर उतरे और इन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पाकिस्तान तक छोड़ आए।सोम ने आरोप लगाया कि मदनी और उनके जैसे मौलाना देश के संविधान की दुहाई तो देते हैं, लेकिन मौका मिलते ही शरिया कानून की बात करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यह दोहरी मानसिकता देश के माहौल को जहरीला करती है।
संगीत सोम के आरोप:
“भारत का खाएँगे, गाएँगे पाकिस्तान की”मीडिया से बातचीत में सोम ने आगे कहा—मदनी देश के मामलों में ज़हर घोलने की कोशिश कर रहे हैं देश की सुरक्षा और आतंकवाद पर ऐसे मौलाना कभी आवाज़ नहीं उठाते देवबंद और अन्य मदरसों को आतंकवाद से जोड़ते हुए सोम ने कहा—मदरसे बंद होने चाहिए… यही जगह है जहां से आतंकी निकलते हैं।”
एसआईआर पर भी उन्होंने टिप्पणी की कि घुसपैठियों की वोट सूची से हटना स्वाभाविक है“भारत में मुसलमान सबसे सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ मौलाना लगातार ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और अब ‘वोट जिहाद’ को बढ़ावा दे रहे हैं।”उनकी बयानबाज़ी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
मदनी का विवादित बयान: “ज़ुल्म होगा, तो जेहाद होगा
”मौलाना मदनी ने शनिवार को कहा था कि—“जेहाद” शब्द का गलत अर्थ फैलाकर मुस्लिम समुदाय को बदनाम किया जा रहा है असल मायने में जेहाद ज़ुल्म के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है सरकार और मीडिया के कई जिम्मेदार लोग भी बिना समझे ‘जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं
जब-जब ज़ुल्म होगा, तब-तब जेहाद होगा।इसी बयान को लेकर हिंदू संगठनों और विश्लेषकों में गहरी नाराज़गी है।
हिंदू संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया:
“देश को आग में झोंकने का प्रयास”स्थानीय हिंदू संगठनों ने मदनी के बयान को सीधे देश की शांति पर हमला बताया है। उनका कहना है—मदनी लगातार ऐसे बयान देकर हिंदू-मुस्लिम संबंधों में तनाव पैदा करना चाहते हैं वंदेमातरम् को ‘मुर्दों का गीत’ बताकर उन्होंने करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।
मदनी जैसे कट्टरपंथी नेताओं पर सरकार को तुरंत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए एक हिंदू संगठन के नेता ने कहा—यह बयान देश को सांप्रदायिक आग में झोंकने की कोशिश है। देश सहिष्णु है, लेकिन उकसावे पर चुप नहीं रहेगा।”
कानूनविद भी नाराज़: सुप्रीम कोर्ट को बेवजह विवाद में घसीटा कई वरिष्ठ कानूनविदों ने मदनी के बयान को ‘सीधा न्यायपालिका के प्रति अपमान’ बताया है।मदनी ने यह कहा था कि यदि वंदेमातरम् गाने को अनिवार्य किया गया, तो “सुप्रीम कोर्ट को इसका जवाब देना होगा।”कानून विशेषज्ञों के मुताबिक—
ऐसा बयान न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी पर स्वतः संज्ञान लिया जा सकता है यह बयान समाज को भड़काने की श्रेणी में भी आ सकता है ।
राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी: “सरकार तुरंत कार्रवाई करे”कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि मदनी की भाषा और तर्क कट्टरपंथ को हवा देने वाले हैं।
एक वरिष्ठ विश्लेषक ने सरकार और न्यायपालिका से अपील करते हुए कहा—मदनी जैसे कट्टरपंथी मौलानाओं को अविलंब हिरासत में लिया जाना चाहिए।अन्यथा देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का खतरा है।”उनका कहना है कि ऐसे बयान एक सुनियोजित कोशिश का हिस्सा लगते हैं, जिसका उद्देश्य समाज में भ्रम और घृणा फैलाना है।वर्तमान माहौल और बढ़ती कटुता मदनी और सोम दोनों के बयान से देश में बयानबाज़ी का तापमान बढ़ गया है।एक तरफ कट्टर धार्मिक व्याख्याएँ, तो दूसरी तरफ राजनीतिक विरोध—
इन दोनों ने सामाजिक तनाव को बढ़ाने वाला माहौल तैयार कर दिया है।राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों पक्षों की तीखी भाषा लोकतांत्रिक चर्चा के स्तर को नीचे गिरा रही है और ऐसी बयानबाज़ी संवेदनशील माहौल को अस्थिर कर सकती है।
