बी के झा
NSK

नई दिल्ली / श्रीनगर, 6 दिसंबर
नई दिल्ली में आयोजित हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के मंच से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली, संवाद शीलता और आर्थिक सुधारों को लेकर किए जा रहे प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सीतारमण ने कहा कि पहलगाम के भीषण आतंकवादी हमले के बाद घाटी में पर्यटन और उससे जुड़ी अर्थव्यवस्था जिस तरह धराशायी हुई थी, उसके पुनर्जीवन में राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।सीतारमण ने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दो बार उनसे मिलकर पर्यटन क्षेत्र के पतन से लेकर व्यापक आर्थिक पुनर्निर्माण तक की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा कर चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था फिर से उठ खड़ी होने के लिए तैयार है और केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है।वित्तमंत्री की इस प्रशंसा पर जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने मुस्कराते हुए एक सहज, विनम्र और थोड़ा चुटीला जवाब दिया—“
यह उनकी दयालुता है कि उन्होंने मेरी तारीफ की। मैं तो यही कहूंगा कि मैडम अब पैसे भी भेज दीजिए… क्योंकि उसकी सप्लाई थोड़ी कम है! हालांकि, यह भी कहना चाहूंगा कि भारत सरकार लगातार हमारी मदद कर रही है। बस एक मुद्दा बाकी है, और उम्मीद है कि उस पर भी हम जल्द ही सहमति तक पहुंचेंगे।”उमर अब्दुल्ला के इस जवाब में जहां विनम्रता झलकती है, वहीं घाटी की आर्थिक चुनौतियों का यथार्थ भी साफ दिखाई देता है।
सीतारमण ने उठाए बड़े मुद्दे — वैश्विक चुनौतियाँ, सीमाई हालात और जम्मू-कश्मीर बैंक का पुनरुद्धार वित्तमंत्री ने अपने संबोधन में बीते छह वर्षों की भारतीय अर्थव्यवस्था की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि 2019 से अब तक देश ने वैश्विक महामारी, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अस्थिरता, जियो-पॉलिटिकल तनाव, और घरेलू चुनौतियों को दृढ़ता के साथ झेला है। उन्होंने कहा कि हमारी सीमाओं पर “हमेशा ही परेशानी” का सामना करना पड़ा है, परन्तु देश ने आर्थिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर संयमित, स्थिर और सशक्त प्रतिक्रिया दी है।सीतारमण ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर बैंक के पुनरुद्धार को एक “ऐसा कार्य बताया जिस पर पूरा देश गर्व कर सकता है।”
वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से बैंकिंग तंत्र को पुनर्जीवित करने को उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ‘रीढ़ की हड्डी जैसा कदम’ बताया।पर्यटन को पहलगाम हमले ने दिया था करारा झटका सीतारमण का स्पष्ट संकेत 26 भारतीय पर्यटकों की मृत्यु वाले उस दर्दनाक पहलगाम आतंकी हमले की ओर था, जिसे पाकिस्तान से आए आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले के बाद जम्मू-कश्मीर का पर्यटन क्षेत्र लगभग ठप पड़ गया था। होटल, ट्रैवल व्यवसाय, स्थानीय कारीगर, टूर ऑपरेटर—सब पर भारी आर्थिक असर पड़ा।लेकिन सरकार के प्रोत्साहन, सुरक्षा व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और राज्य सरकार के स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों से पर्यटन ने फिर से रफ्तार पकड़नी शुरू की है। इस पुनरुत्थान के प्रयासों को सीतारमण ने “संवेदनशील, श्रमसाध्य और प्रशंसनीय” बताया।
विश्लेषण:
सहयोग की नई शुरुआत या राजनीतिक सौहार्द का संदेश?सीतारमण की ओर से एक गैर-भाजपा मुख्यमंत्री की इस तरह सार्वजनिक प्रशंसा दुर्लभ है।
यह संकेत है कि जम्मू-कश्मीर की संवेदनशील परिस्थिति में सरकार राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर प्रदेश की स्थिरता और विकास को प्राथमिकता दे रही है। वहीं उमर अब्दुल्ला का संयत लेकिन हास्यपूर्ण जवाब राजनीतिक परिपक्वता, विनम्रता और केंद्र-राज्य संबंधों में सौहार्दपूर्ण माहौल का संदेश देता है।एक तरफ घाटी में निवेश, बैंकिंग सुधार और पर्यटन पुनर्जीवन की कोशिशें जारी हैं; दूसरी तरफ यह संवाद केंद्र और राज्य के बीच एक सकारात्मक साझेदारी की ओर इशारा करता है।
