बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 9 दिसंबर
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए धार्मिक अल्पसंख्यक शरणार्थियों के मन में एक सवाल लंबे समय से उठ रहा था—क्या चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया से उनकी नागरिकता और भविष्य के वोटर अधिकार प्रभावित होंगे?मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर शंका पर महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी करते हुए तस्वीर साफ कर दी।
मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि—सीएए के तहत नागरिकता मिलना स्वचालित नहीं है।प्रत्येक दावे की सख़्त जांच होगी और दावा सही साबित होने पर ही नागरिकता मिलेगी।इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नागरिकता मिलने के बाद शरणार्थी वैधानिक रूप से वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं।एनजीओ ने उठाई थी शरणार्थियों को ‘स्टेटलेस’ हो जाने की आशंका सुनवाई एनजीओ आत्मादीप की याचिका पर हुई, जिसमें कहा गया था कि—इन तीन देशों से भागकर आए धार्मिक अल्पसंख्यक सीएए के तहत नागरिकता के पात्र हैं।लेकिन सरकार की ओर से नागरिकता सर्टिफिकेट जारी होने में देरी के कारण एफआईआर प्रक्रिया के दौरान उनके दस्तावेज अधूरे रह जाएंगे जिससे वे “कहीं के भी नहीं” (Stateless) हो सकते हैं।
याचिका में दलील दी गई कि—सीएए के मुताबिक 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यक अवैध प्रवासी नहीं माने जाते, इसलिए उनके अधिकारों को खतरे में डालना संवैधानिक संकट पैदा करेगा।सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया—“नागरिकता दावे की सच्चाई पर निर्भर”कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि केवल सीएए का हवाला देने से नागरिकता नहीं मिल जाती।इसके लिए कुछ आवश्यक कानूनी मानकों को पूरा करना होगा, जैसे—
1. क्या याचिकाकर्ता वास्तव में उस देश का धार्मिक अल्पसंख्यक है?
2. क्या वह सीएए में सूचीबद्ध तीन देशों में से किसी का मूल निवासी था?
3. क्या वह भारत उचित पात्रता के अंतर्गत आया था?4. क्या उसके दावे का दस्तावेज़ी सत्यापन संभव है?
बेंच ने कहा—“नागरिकता आपका अधिकार तभी बनेगी जब आप कानून में निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, न कि स्वचालित लाभ।”नागरिकता के बाद वोटर बनना पूरी तरह संभव सीजेआई ने यह महत्वपूर्ण स्पष्टता भी दी कि—“जैसे ही कोई व्यक्ति स्वाभाविक नागरिकता प्राप्त कर लेता है, वह वैध तरीके से वोटर बनने के लिए आवेदन कर सकता है।वोटर सूची की समीक्षा समय-समय पर होती है और पात्र नाम शामिल किए जा सकते हैं।”
अर्थात्—सीएए शरणार्थियों का भविष्य के मताधिकार से कोई स्थायी टकराव नहीं है।सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक प्रभाव कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी तीन मुख्य स्तरों पर असर डालती है—
1. शरणार्थियों का भय कम हुआSIR प्रक्रिया से “Stateless” हो जाने का डर काफी हद तक दूर हुआ है।
2. प्रशासनिक स्पष्टता बढ़ीराज्य और केंद्र के अधिकारी अब सीएए दावों के सत्यापन के लिएऔर व्यवस्थित दस्तावेजी तंत्र अपना सकते हैं।
3. राजनीतिक वाद-विवाद पर भी विरामCAA–NRC–Voter Rights पर लंबे समय से चल रही आशंकाओं मेंपहली बार अदालत स्तर से साफ़ दिशा मिली है
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्थापित किया है कि—सीएए शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी, यदि वेसत्यापन प्रक्रिया में अपने दावे प्रमाणित कर पाते हैं।नागरिकता मिलने के बादभारत के हर नागरिक की तरह उन्हें वोट देने का अधिकार भी मिलेगा।SIR की प्रक्रिया नागरिकता के अधिकार को स्वतः समाप्त नहीं करती।
यह टिप्पणी CAA से जुड़े लाखों शरणार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत और भविष्य की स्पष्ट कानूनी राह लेकर आई है।
