मोदी के बाद कौन?— RSS प्रमुख का जवाब, सियासत में नई हलचल उत्तराधिकारी पर संघ की चुप्पी, BJP की स्पष्टता और विपक्ष–वैचारिक जगत की तीखी प्रतिक्रियाएँ

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 11 दिसंबर

2029 के चुनाव से पहले सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न—“नरेंद्र मोदी के बाद प्रधानमंत्री कौन?”—अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।BJP बार–बार स्पष्ट कर चुकी है कि 2029 में भी चुनाव मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, मगर इस बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा तेज कर दी है।

संघ प्रमुख का बयान: “ये मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर”एक कार्यक्रम के दौरान जब मोहन भागवत से पूछा गया कि मोदी जी के बाद अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?उन्होंने संयमित लेकिन अर्थपूर्ण जवाब दिया—“कुछ सवाल मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इसमें मैं राय नहीं दे सकता।

मैं केवल शुभकामनाएं दे सकता हूँ। मोदी जी के बाद कौन होगा, यह तय मोदी जी और BJP करेंगी।”भागवत का यह जवाब कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है—RSS ने सीधे तौर पर उत्तराधिकारी चर्चा से स्वयं को अलग किया।फैसला पूरी तरह BJP और मोदी पर छोड़ा।उत्तराधिकार पर चल रही अफवाहों को न तो नकारा और न स्वीकारा।

भाजपा का दो-टूक: “2029 में भी नेता मोदी ही”NDTV के कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा—“किसी और का नाम सोचने की जरूरत ही नहीं है।मोदी जी स्वस्थ हैं, ऊर्जावान हैं और 2029 में भी हमारे नेता वही होंगे।”

फडणवीस ने मोदी की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा—वह दिन में 17 घंटे से अधिक काम करते हैं,40 वर्ष के व्यक्ति से भी अधिक ऊर्जा रखते हैं,बैठकों में कभी थकान नहीं दिखती।इस बयान के बाद BJP की औपचारिक लाइन स्पष्ट है—उत्तराधिकारी नहीं, केवल नरेंद्र मोदी।

राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया:राजनीतिक जगत में इस पूरे मुद्दे को कई स्तरों पर देखा जा रहा है।

1. उत्तराधिकार पर चर्चा—भविष्य की सत्ता संरचना का संकेतवरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अरविंद कुलकर्णी कहते हैं—“RSS का यह कहना कि यह BJP का विषय है, दिखाता है कि संगठन और सरकार के बीच अब सत्ता-निर्णय स्पष्ट रूप से पार्टी हाईकमान के हाथ में है। यह 2014 के बाद उभरी नई शक्ति संरचना का संकेत है।

”2. BJP में स्वाभाविक नेतृत्व प्रतियोगिता को रोकने की कोशिश चुनाव विश्लेषक मनीष वर्मा कहते हैं—“मोदी के बाद कौन?—इस पर चर्चा BJP को कभी पसंद नहीं रही।क्योंकि इससे अंदरूनी खेमेबाजी तेज होती है। इसलिए पार्टी लगातार कह रही है कि 2029 में भी मोदी ही चेहरे होंगे।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया:जहाँ BJP और RSS ने संयमित बयान दिए, वहीं विपक्ष ने निशाना साधने में देर नहीं की।कांग्रेस प्रवक्ता का हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया—“BJP और RSS को पता है कि मोदी मॉडल अब पुराना हो रहा है। इसलिए उत्तराधिकार को लेकर भ्रम बनाए रखा जा रहा है, ताकि जनता का ध्यान असल मुद्दों से हटे।

”सपा–RJD की प्रतिक्रिया समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा—

“मोदी के बाद कौन—यह सवाल BJP को परेशान करता है, क्योंकि पार्टी में लोकतांत्रिक उत्तराधिकार की व्यवस्था है ही नहीं।”RJD ने भी तंज करते हुए कहा—“सत्ता एक व्यक्ति पर टिकी है, यही BJP की सबसे बड़ी कमजोरी है।”

हिन्दू धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया:

प्रसिद्ध संत और सामाजिक–आध्यात्मिक चिंतक आचार्य विभूति नाथ ने कहा—“राष्ट्र नेतृत्व कोई परिवार या वंश का मामला नहीं।जो भी प्रधानमंत्री बने, वह राष्ट्रहित, धर्मसम्मत नीति और भारत की वैश्विक ताकत बढ़ाने वाला होना चाहिए।मोदी जी ने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई है, लेकिन उत्तराधिकारी पर निर्णय जल्दबाजी में नहीं होना चाहिए।

”वाराणसी के एक प्रमुख शैव मठ के महंत ने प्रतिक्रिया दी—“हिंदू समाज स्थिर नेतृत्व चाहता है। मोदी ने धर्म–संस्कृति के लिए कार्य किया है, लेकिन आगे कौन आएगा यह समय तय करेगा।

निष्कर्ष

मोहन भागवत का बयान शांत है, परंतु राजनीति के विशेषज्ञ इसे गहरा संकेत मान रहे हैं।BJP इसे टालना चाहती है।विपक्ष इसे मुद्दा बनाना चाहता है।धार्मिक–वैचारिक जगत कह रहा है कि निर्णय राष्ट्रहित में होना चाहिए।लेकिन एक बात स्पष्ट है—2029 का चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा,पर 2034 की राजनीति की ज़मीन अभी से तैयार हो रही है।

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