बी के झा
NSK

पटना/नई दिल्ली, 12 दिसंबर
बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। बाजपट्टी से पार्टी के विधायक रामेश्वर महतो के एक फेसबुक पोस्ट ने सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। पोस्ट भले ही संकेतों में लिखा गया हो, लेकिन उसके राजनीतिक मायने इतने साफ हैं कि यह कुशवाहा नेतृत्व पर खुली चोट जैसा प्रतीत होता है।क्या लिखा महतो ने?—
एक पोस्ट और कई संकेत शुक्रवार को महतो ने फेसबुक पर लिखा:“राजनीति में सफलता भाषणों से नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और दृढ़ नीति से मिलती है। जब नेतृत्व की नीयत धुंधली हो जाए और नीतियां जनहित से अधिक स्वार्थ की दिशा में मुड़ जाएं, तब जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता।”नाम भले ही किसी का न हो, लेकिन तीर साफ तौर पर एक ही दिशा में जाता दिखा—
उपेंद्र कुशवाहा की ओर।सियासी हलकों में यह पोस्ट “बगावत का एलान” माना जा रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब कुशवाहा के फैसलों से पार्टी के भीतर नाराजगी फूटी हो, लेकिन इस बार यह नाराजगी विधायक स्तर तक पहुंच चुकी है।पार्टी के भीतर उथल-पुथल कैसे शुरू हुई?नीतीश सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान RLM के कोटे से मंत्री बनाए जाने की बारी आई तो चारों विधायकों को नजरअंदाज कर कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश का नाम आगे कर दिया।दीपक न तो किसी सदन के सदस्य हैं, न ही उन्होंने कोई चुनाव लड़ा है। इस फैसले ने पार्टी नेताओं में गहरा असंतोष पैदा कर दिया।
इसके बाद—राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ,प्रदेश महासचिव राहुल कुमार,और कई अन्य नेताओं ने पार्टी छोड़ दी।अब संकेत हैं कि यह असंतोष विधायकों तक भी फैल चुका है।विधानसभा सत्र के दौरान तीन विधायकों की “अलग बैठक” ने बढ़ाई चर्चा पिछले सप्ताह सत्र के दौरान स्नेहलता को छोड़कर पार्टी के तीनों विधायक—
रामेश्वर महतोमाधव आनंदआलोक कुमार सिंह—ने विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार से अलग मुलाकात की थी। उसकी तस्वीर राजनीतिक गलियारों में जमकर वायरल हुई और उसपर सवाल उठने लगे कि क्या टीम कुशवाहा से विधायकों की दूरी बढ़ चुकी है?
राजनीतिक विश्लेषकों की राय:
“कुशवाहा की पार्टी में निजी वर्चस्व की लड़ाई”
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सुभाष मिश्र का कहना है:“दीपक प्रकाश को मंत्री बनाना RLM के भीतर वंशवाद को बढ़ावा देने जैसा कदम माना जा रहा है। छोटे दलों में व्यक्तिगत निर्णयों का असर बड़ा होता है। कुशवाहा ने अपने कोर नेताओं का भरोसा खोने का जोखिम लिया है।”प्रो. नलिन वर्मा कहते हैं:“RLM पहले भी कई बार टूट के कगार पर पहुंच चुकी है। इस बार मामला गंभीर है क्योंकि यह बगावत संगठनात्मक नहीं, सीधे विधायक स्तर पर है। अगर दो-तीन विधायक टूटते हैं तो पार्टी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।”
विपक्ष ने दिया बड़ा बयान:
“कुशवाहा ने पार्टी को परिवार की दुकान बना दिया”राजद के वरिष्ठ नेता ने कहा—“
यह शुरुआत है। कुशवाहा ने RLM को परिवार की दुकान बना दिया है। विधायक और कार्यकर्ता अपमान महसूस कर रहे हैं।”
कांग्रेस ने भी तंज कसा—“नीतीश जी और NDA को ऐसे ही ‘परिवारवाद के उस्ताद’ चाहिए। यह उनकी राजनीतिक प्रयोगशाला का हिस्सा है।”भाजपा के कुछ नेताओं ने भी ऑफ द रिकॉर्ड माना कि—“
कुशवाहा का यह फैसला रणनीतिक चूक है।
NDA में आंतरिक कलह का असर बड़े गठबंधन पर पड़ता है।”क्या बड़े कदम की तैयारी में हैं विधायक?
पार्टी सूत्रों का दावा है कि कम से कम दो विधायक खुले तौर पर नाराज़ हैं और “भावी राजनीतिक विकल्पों” पर चर्चा कर रहे हैं।जानकारों के अनुसार—विधायक अलग गुट बनाकर NDA में शामिल हो सकते हैं,या किसी बड़े क्षेत्रीय दल के साथ नई पारी शुरू कर सकते हैं।कुशवाहा के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है।
निष्कर्ष:
RLM में सियासी भूचाल अभी शांत होने वाला नहीं उपेंद्र कुशवाहा पहले भी कई दल बना चुके हैं, कई बार गठबंधन बदल चुके हैं और कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देख चुके हैं। लेकिन इस बार चुनौती अलग और गंभीर है—बगावत घर के अंदर है।रामेश्वर महतो के पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि RLM में सब कुछ ठीक नहीं है।
आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
