बी के झा
NSK

लखनऊ, 19 दिसंबर
उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही साफ हो गया कि यह सत्र सिर्फ विधायी कामकाज तक सीमित नहीं रहने वाला। पहले ही दिन कोडीन युक्त कफ सिरप कांड ने सदन और सियासत—दोनों को गर्मा दिया। पोस्टर, बैनर, कट-आउट और शायरी—सब कुछ साथ-साथ चला। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने थे, और बहस का स्वर आरोपों से लेकर व्यंग्य तक जा पहुंचा।इस सियासी घमासान के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, जिनकी जुबान से निकली शायरी अब राजनीतिक बयान बन चुकी है।
योगी का शेर और सियासी संदेश विधानसभा जाने से पहले मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोडीन कांड पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा,जांच होने दीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”लेकिन बयान का असली राजनीतिक ताप तब बढ़ा, जब उन्होंने शायरी के जरिए विपक्ष पर हमला बोला—यही कसूर मैं बार-बार करता रहा,धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करता रहा।
”योगी का इशारा साफ था—
उनके मुताबिक सपा नेतृत्व दूसरों पर आरोप लगा रहा है, जबकि शुरुआती जांच में आरोपियों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के साथ सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि प्रदेश के अधिकांश माफियाओं के तार किसी न किसी रूप में सपा से जुड़े रहे हैं और यह मामला भी अपवाद नहीं होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,योगी की शायरी महज़ व्यंग्य नहीं, बल्कि विपक्ष को नैतिक कटघरे में खड़ा करने की रणनीति है। यह संदेश है कि सरकार जांच से पीछे हटने वाली नहीं है।”अखिलेश का उसी लहजे में जवाबयोगी के शेर का जवाब आने में देर नहीं लगी। अखिलेश यादव ने भी उसी अंदाज़ में सोशल मीडिया पर पलटवार किया।
उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा—जब ‘ख़ुद’ फंस जाओ,तो दूसरे पर इल्ज़ाम लगाओ।ये खेल हुआ पुराना,हुक्मरान कोई नई बात बताओ।”सपा खेमे में इसे “शायराना प्रतिरोध” कहा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सपा पर आरोप मढ़ रही है, जबकि असली सवाल यह है कि तस्करी के बड़े चेहरे अब तक बेनकाब क्यों नहीं हुए।
एक वरिष्ठ राजनीतिक अध्येता का मानना है,यह टकराव बताता है कि यूपी की राजनीति अब केवल भाषणों की नहीं, प्रतीकों और पंक्तियों की भी लड़ाई बन चुकी है।पोस्टर-बैनर और कट-आउट की राजनीति सत्र के पहले ही दिन समाजवादी पार्टी के विधायक पूरी तैयारी के साथ पहुंचे।शिकोहाबाद से सपा विधायक मुकेश वर्मा कोडीन कफ सिरप का पोस्टर पहनकर विधानसभा पहुंचे और सवाल दागा—“
तस्करों पर बुलडोजर कब चलेगा?”वहीं, वाराणसी से सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा साइकिल पर कफ सिरप की शीशी का कट-आउट लेकर पहुंचे। तंज कसते हुए बोले—
“पहले कालीन भैया थे, अब कोडीन भैया आ गए हैं।”सपा का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन “छोटी मछलियों” को पकड़ रहा है, जबकि बड़े मगरमच्छों पर हाथ नहीं डाला जा रहा।सरकार का जवाब: कानून और कार्रवाई कोडीन मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तकनीकी और कानूनी पक्ष भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि कोडीन फॉस्फेट एनडीपीएस अधिनियम के तहत नियंत्रित औषधि है, जिसका उपयोग केवल अधिकृत दवा निर्माण के लिए किया जाता है।
सरकार के मुताबिक, इसके दुरुपयोग और अवैध तस्करी की शिकायतों के बाद एफएसडीए, यूपी पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे मामले की निगरानी राज्य-स्तरीय एसआईटी कर रही है और धन के लेन-देन से लेकर नेटवर्क तक, हर पहलू की जांच की जा रही है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तो और तीखा हमला किया। उन्होंने एक तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि वांछित आरोपी अखिलेश यादव के साथ दिखाई दे रहे हैं और कहा—“ये तो वही बात हो गई, चोर की दाढ़ी में तिनका।”शोक प्रस्ताव और स्थगन इस सियासी शोर के बीच विधानसभा का पहला दिन औपचारिक कार्यवाही के लिहाज से सीमित रहा।
घोसी से सपा विधायक सुधाकर सिंह के आकस्मिक निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया गया।मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें जनता के कल्याण के लिए समर्पित नेता बताया, जबकि नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सुधाकर सिंह की लोकप्रियता उनकी सादगी और संघर्ष का परिणाम थी।शोक प्रस्ताव के बाद विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई, हालांकि विधान परिषद की कार्यवाही जारी रही।आगे का एजेंडा: वंदे मातरम् और विकास
मुख्यमंत्री ने बताया कि शीतकालीन सत्र 24 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान विभागों की अनुपूरक मांगों पर चर्चा,विकास से जुड़े विधायी कार्य,और ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा होगी।योगी ने इसे उत्तर प्रदेश की स्थापना-तिथि और राष्ट्रगीत की संवैधानिक मान्यता से जोड़ते हुए ऐतिहासिक महत्व का विषय बताया।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र सरकार के लिए कानून-व्यवस्था बनाम विपक्ष के आरोप की परीक्षा है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी नैरेटिव गढ़ने का मंच बना रहा है।
एक वरिष्ठ शिक्षाविद के शब्दों में,शायरी में हुई यह जंग दरअसल 2027 की राजनीति की झलक है—
जहां आरोप भी होंगे, प्रतीक भी और भावनात्मक अपील भी।स्पष्ट है कि यूपी विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र केवल विधायी दस्तावेज़ों के लिए नहीं, बल्कि शब्दों, शेरों और सियासी संकेतों के लिए भी याद रखा जाएगा।
