बी के झा
NSK

वॉशिंगटन/बीजिंग / नई दिल्ली, 13 अक्टूबर
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अक्सर कहा जाता है— “कोई स्थायी मित्र नहीं, केवल स्थायी हित होते हैं।” यही कथन इस समय अमेरिका और चीन के रिश्तों पर सटीक बैठता है। बीते कुछ दिनों तक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर बरस रहे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब उसी जिनपिंग की तारीफों के पुल बांध रहे हैं।
रेयर अर्थ मटीरियल के निर्यात को लेकर उपजे तनाव और अमेरिका द्वारा 100% टैरिफ लगाने की धमकी के बीच, ट्रंप का यह अचानक नरम रुख वैश्विक राजनीति को चौंका गया है।ट्रंप ने जिनपिंग को बताया “सम्माननीय व्यक्ति”ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा—चीन के बारे में चिंता मत कीजिए, सबकुछ ठीक होगा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग बेहद सम्माननीय व्यक्ति हैं। उनका एक कठिन पल था, लेकिन वे अपने देश के हितों की रक्षा कर रहे हैं — और मैं भी यही कर रहा हूं।”उन्होंने आगे लिखा कि अमेरिका चीन से संघर्ष नहीं चाहता, बल्कि सहयोग चाहता है।
ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन बीजिंग की मदद करने के लिए तैयार है, न कि उसे दुखी करने के लिए।कुछ दिन पहले तक चीन पर बरसे थे ट्रंपट्रंप के इस बयान को “कूटनीतिक यू-टर्न” कहा जा रहा है। क्योंकि कुछ ही दिन पहले उन्होंने चीन पर तीखा हमला बोला था।उन्होंने चीन पर रेयर अर्थ मटीरियल (Rare Earth Materials) के निर्यात पर नियंत्रण के ज़रिए “दुनिया को बंधक बनाने” का आरोप लगाया था। ट्रंप ने कहा था कि बीजिंग का यह कदम “शत्रुतापूर्ण” है और इससे वैश्विक बाजार अस्थिर हो जाएंगे।उस समय ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर चीन अपने रवैये पर कायम रहा, तो अमेरिका उसके खिलाफ “कड़े आर्थिक कदम” उठाएगा।बीजिंग की सख्त चेतावनी चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने ट्रंप के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
मंत्रालय ने कहा—हम टैरिफ वॉर नहीं चाहते, लेकिन हम इससे डरते भी नहीं हैं। अगर अमेरिका 1 नवंबर से 100% आयात शुल्क लागू करता है, तो चीन भी कठोर कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा।”
इसके साथ ही बीजिंग ने स्पष्ट किया कि उसके निर्यात नियम “पूरी तरह से प्रतिबंध” नहीं हैं। वैध नागरिक और तकनीकी उपयोगों के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस जारी किए जाते रहेंगे।
तनाव की जड़ – रेयर अर्थ का युद्धदरअसल, मौजूदा तनातनी की असली वजह रेयर अर्थ मटीरियल्स हैं — वे दुर्लभ धातुएं जिनका उपयोग स्मार्टफोन, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहनों और सैटेलाइट तकनीक तक में होता है।दुनिया के कुल रेयर अर्थ उत्पादन का करीब 70% हिस्सा चीन के पास है। यही वजह है कि चीन की नीति में हल्का बदलाव भी अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के लिए बड़ा झटका बन जाता है।
विश्लेषकों का कहना है…अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न “रणनीतिक व्यावहारिकता” का हिस्सा है।भू-राजनीतिक विश्लेषक एडम रोसेनबर्ग के अनुसार—ट्रंप समझते हैं कि चीन से खुली टकराहट अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होगी। चुनावी साल में वे किसी बड़े आर्थिक संकट का जोखिम नहीं लेना चाहते।
”कूटनीतिक मुस्कान या मजबूरी?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का यह नरम रुख रणनीतिक संकेत है या राजनीतिक मजबूरी।
लेकिन इतना तय है कि अमेरिका और चीन के रिश्तों में यह बदलाव वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।कुछ विश्लेषक इसे “नए ट्रेड ट्रूस” यानी व्यापारिक युद्धविराम की शुरुआत मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे ट्रंप की “अस्थायी मुस्कान” बता रहे हैं जो किसी भी वक्त फिर कठोर हो सकती है।
अंत में सवाल यही —क्या यह ‘यू-टर्न’ सच में स्थायी शांति की ओर कदम है, या फिर ट्रंप की राजनीति का नया मोड़?दुनिया की निगाहें अब बीजिंग और वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं।
