भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का श्रेय खुद को देने लगे ट्रंप, बोले – “200% टैरिफ की धमकी से 24 घंटे में रुक गया संघर्ष ,” भारत बोला – युद्धविराम हमारी सेनाओं की कूटनीति से हुआ, न कि ट्रंप की धमकी से

बी के झा

NSK

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 13 अक्टूबर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं — और इस बार कारण है उनका चौंकाने वाला दावा। ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सैन्य संघर्ष को “200% टैरिफ लगाने की धमकी” देकर सिर्फ 24 घंटे में खत्म करवा दिया।मध्य पूर्व की यात्रा पर रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने यह बयान देते हुए दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल और उसके बाद भी “आठ युद्धों को केवल आर्थिक दबाव के ज़रिए सुलझाया” है।

ट्रंप बोले – “टैरिफ ने बचाई दुनिया को जंग से”ट्रंप ने पत्रकारों से कहा –“मैंने कुछ युद्धों को सिर्फ टैरिफ के आधार पर सुलझा लिया। उदाहरण के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच। मैंने कहा — अगर आप लोग युद्ध लड़ना चाहते हैं और आपके पास परमाणु हथियार हैं, तो मैं दोनों पर 100%, 150%, यहां तक कि 200% टैरिफ लगा दूंगा। और आप यकीन मानिए, यह सब सिर्फ 24 घंटों में सुलझ गया।”उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका के पास यह “टैरिफ का हथियार” न होता तो यह संघर्ष कभी नहीं रुकता।उनका यह बयान वैश्विक कूटनीति में आर्थिक दबाव (Economic Diplomacy) के प्रयोग की नीति को रेखांकित करता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दावा राजनीतिक प्रचार से ज़्यादा कुछ नहीं है।

भारत का जवाब – “संघर्षविराम हमारी सैन्य और कूटनीतिक प्रक्रिया का नतीजा”ट्रंप के बयान के बाद भारत के सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का निर्णय किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैन्य तंत्र के सीधे संवाद से हुआ था।भारत ने कहा —पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम पर सहमति भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद बनी थी, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से।”सूत्रों के मुताबिक, 10 मई को हुए युद्धविराम से पहले भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।लगातार चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद दोनों देशों ने आपसी बातचीत के ज़रिए संघर्षविराम पर सहमति बनाई थी।

“बिना पेंदी ट्रंप का फिर बेसुरा आलाप”भारतीय राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में ट्रंप का यह बयान “एक और अतिशयोक्ति” के रूप में देखा जा रहा है।एक वरिष्ठ पूर्व राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —ट्रंप की यह आदत रही है कि वे किसी भी वैश्विक घटना में खुद को नायक के रूप में पेश करते हैं। भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम की प्रक्रिया पूरी तरह सैन्य स्तर की थी, अमेरिका की भूमिका प्रतीकात्मक भी नहीं थी।सोशल मीडिया पर भी ट्रंप के दावे को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ है। कई यूजर्स ने इसे “बिना पेंदी का बेसुरा आलाप” बताया है, जबकि कुछ ने मज़ाक में लिखा —अगर टैरिफ से युद्ध रुक सकते हैं, तो ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिल जाना चाहिए!”

ट्रंप की ‘टैरिफ डिप्लोमेसी’: आर्थिक हथियार या राजनीतिक शोर?डोनाल्ड ट्रंप अपने राष्ट्रपति कार्यकाल (2017–2021) में लगातार “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत टैरिफ और व्यापारिक दबाव को विदेशी नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करते रहे।उन्होंने चीन पर सैकड़ों अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाया, मैक्सिको को दीवार निर्माण के लिए धमकाया और यूरोप को व्यापारिक अनुशासन का पाठ पढ़ाया।अब वे दावा कर रहे हैं कि इसी रणनीति ने भारत-पाकिस्तान के बीच “संभावित परमाणु संघर्ष” को रोका।हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की बयानबाज़ी का मकसद चुनावी समर्थन जुटाना है। वे अमेरिकी मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे “दुनिया में शांति लाने वाले सख्त सौदागर” हैं।

विश्लेषण: क्या ट्रंप की ‘धमकी’ वाकई असरदार थी?कूटनीति विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का दावा राजनीतिक अतिशयोक्ति से भरा है।भारत और पाकिस्तान दोनों के बीच सीमा तनाव और आतंक विरोधी ऑपरेशन एक संवेदनशील सुरक्षा विषय हैं।इस पर किसी तीसरे देश का सीधा हस्तक्षेप भारत की विदेश नीति के सिद्धांत “No Third-Party Mediation” के खिलाफ है।इसलिए ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने युद्ध को टैरिफ धमकी से रोका, तथ्यात्मक रूप से कमजोर और राजनीतिक रूप से प्रेरित माना जा रहा है।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान फिर से साबित करता है कि अमेरिकी राजनीति में आर्थिक दबाव को हथियार बनाना अब सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि लोकप्रिय बयानबाज़ी का साधन भी बन चुका है।लेकिन भारत के लिए, यह संघर्षविराम किसी “टैरिफ की धमकी” का नहीं, बल्कि रणनीतिक अनुशासन और सैन्य संयम का परिणाम था। ट्रंप भले ही खुद को ‘शांतिदूत’ मान रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि सीमा पर शांति भारतीय सैनिकों की सूझबूझ और भारत की परिपक्व कूटनीति की जीत थी।

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