बी के झा
NSK

नई दिल्ली / वॉशिंगटन, 9 जनवरी
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की शीर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई ने इस समय पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को सांस रोके खड़ा कर दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज रात (9 जनवरी 2026) उस फैसले पर मुहर लगाने जा रही है, जो न केवल डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी का भविष्य तय करेगा, बल्कि सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ार में तेज उछाल या और गहरी गिरावट की पटकथा भी लिख सकता है।यह मामला ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए विवादित टैरिफ की कानूनी वैधता से जुड़ा है—और इसका असर वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक साफ दिख सकता है।क्या है पूरा मामला?अप्रैल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों पर 10% से लेकर 50% तक आयात शुल्क (Tariff) लगा दिए थे। यह फैसला उन्होंने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लिया था।लेकिन अमेरिका में ही इन टैरिफ को चुनौती दी गई—दलील यह दी गई कि राष्ट्रपति को संविधान के तहत इतनी व्यापक आर्थिक शक्तियां नहीं दी जा सकतीं, खासकर तब जब कांग्रेस की मंजूरी न हो।मामला निचली अदालतों से होता हुआ अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां आज रात ऐतिहासिक फैसला आने वाला है।
क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर सुप्रीम कोर्ट पर?
पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक शेयर बाज़ार दबाव में हैं।अमेरिका, यूरोप और एशिया—हर जगह अनिश्चितताट्रेड वॉर का डरनिवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमीइस सबके केंद्र में है ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति। इसी हफ्ते रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ के प्रस्ताव ने बाज़ारों की चिंता और बढ़ा दी।अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ गया तो क्या होगा? आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट यह कह देता है कि ट्रंप प्रशासन ने IEEPA का गलत इस्तेमाल किया और टैरिफ अवैध थे, तो इसके तीन बड़े असर होंगे:
1• वैश्विक बाज़ारों में राहतट्रेड वॉर का दबाव कम होगानिवेशकों का भरोसा लौटेगाजोखिम वाले एसेट्स (Equity) में पैसा आएगा
2• भारतीय शेयर बाज़ार में संभावित तूफानी तेजीभारतीय बाज़ार पिछले 5 सत्रों से गिरावट में है।सेंसेक्स 5 दिन में करीब 2200 अंक टूट चुका हैनिफ्टी 2.5% से ज्यादा गिराविशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के खिलाफ फैसला आने पर सोमवार को गैप-अप ओपनिंग और ज़ोरदार शॉर्ट कवरिंग देखी जा सकती है।
3• अमेरिका को देना पड़ सकता है अरबों डॉलर का रिफंडअगर टैरिफ अवैध ठहराए गए—अमेरिकी सरकार को कंपनियों और आयातकों को 100–150 अरब डॉलर तक लौटाने पड़ सकते हैंअमेरिकी खजाने पर भारी दबावट्रंप की “हार्ड ट्रेड पॉलिसी” को बड़ा झटकाअगर ट्रंप के पक्ष में फैसला आया तो?यह दूसरा और ज्यादा सख्त परिदृश्य होगा।राष्ट्रपति को IEEPA के तहत टैरिफ लगाने की खुली छूट कोई रिफंड नहीं, सरकार का राजस्व सुरक्षित ट्रंप को और आक्रामक टैरिफ लगाने का कानूनी कवच विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में—वैश्विक बाज़ारों में दबाव बना रहेगा
भारत समेत उभरते बाज़ारों पर असर
निवेशक सुरक्षित ठिकानों (Gold, Dollar) की ओर भाग सकते हैंभारतीय निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अमेरिका का बड़ा ट्रेड पार्टनर है।आईटी, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और मेटल सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर पड़ता है।एक वरिष्ठ मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक,“यह फैसला सिर्फ ट्रंप के बारे में नहीं है, यह वैश्विक ट्रेड सिस्टम की दिशा तय करेगा। अगर कोर्ट राष्ट्रपति की शक्तियों पर लगाम लगाता है, तो बाजार राहत की सांस लेगा।”
निष्कर्ष:
3 घंटे में तय होगा सोमवार का मूड आज रात वॉशिंगटन में आने वाला फैसला—तय करेगा कि ट्रेड वॉर थमेगा या तेज होगा तय करेगा कि सोमवार को भारतीय बाजार में तेजी की लहर आएगी या घबराहट बनी रहेगी
निवेशक, सरकारें और कॉरपोरेट—सबकी निगाहें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच पर टिकी हैं।क्योंकि यह सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं,बल्कि दुनिया की आर्थिक दिशा तय करने वाला क्षण है।
