चीन के रेयर अर्थ साम्राज्य को चुनौती देने की तैयारी: अफगानिस्तान ने भारत को दिया निवेश का न्योता, बदल सकता है वैश्विक समीकरण

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर

दुनिया भर में रेयर अर्थ मिनरल्स यानी दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की होड़ तेज़ हो चुकी है। इन खनिजों पर चीन का दबदबा इतना मजबूत है कि अमेरिका जैसी सुपरपावर को भी झुकना पड़ रहा है। लेकिन अब इस एकाधिकार को तोड़ने की चाबी अफगानिस्तान के हाथ में है — और उसने यह चाबी भारत को सौंपने का न्योता दिया है।

अफगानिस्तान ने भारत को दिया निवेश का न्योताअफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने भारत को अपने खनिज क्षेत्र में निवेश का खुला आमंत्रण दिया है। रविवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुत्ताकी ने बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से विस्तृत बातचीत की है।बैठक में दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, व्यापार, खनन, कृषि और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। मुत्ताकी ने कहा —हमने भारत को खनिज और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। साथ ही वाघा सीमा खोलने का भी अनुरोध किया है, ताकि भारत-अफगानिस्तान के बीच व्यापार का सबसे तेज़ और सुविधाजनक रास्ता बन सके।”उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने काबुल स्थित अपने मिशन को जल्द ही दूतावास का दर्जा देने का फैसला किया है। काबुल के भारतीय राजनयिक जल्द ही नई दिल्ली में बैठक के लिए आएंगे।

अफगानिस्तान: अनछुए खजाने की धरतीअफगानिस्तान को अक्सर युद्ध और अस्थिरता के कारण चर्चा में देखा गया है, लेकिन इस देश की ज़मीन के नीचे 14 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्स छिपे हैं।इनमें लैंथेनम, सेरियम, नियोडिमियम, लिथियम, और येट्रियम जैसे खनिज शामिल हैं — जो आधुनिक तकनीक, रक्षा उपकरणों, मोबाइल फ़ोनों, पवन टर्बाइनों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के निर्माण में अनिवार्य हैं।अगर भारत इन संसाधनों में निवेश करता है, तो यह न सिर्फ़ चीन के वर्चस्व को चुनौती देगा, बल्कि भारत को एक नई रणनीतिक बढ़त भी देगा।

चीन के पास क्यों है पूरी “सप्लाई चेन”दुनिया के लगभग 90% रेयर अर्थ तत्वों का प्रोसेसिंग चीन में होता है। चीन ने इस क्षेत्र में दशकों तक योजनाबद्ध निवेश कर एक एकीकृत सप्लाई चेन तैयार की है —खनन से लेकर रिफाइनिंग और हाई-टेक उत्पादों तक सब कुछ उसके नियंत्रण में है।इसी कारण अमेरिका और यूरोपीय देश चीन पर निर्भर हैं। जब भी व्यापारिक तनाव बढ़ता है, चीन इन खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध या सीमा नियंत्रण का हथियार चला देता है।हाल ही में चीन ने रेयर अर्थ निर्यात पर नई नीतियाँ लागू कीं, जिससे अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 नवंबर से चीनी सामानों पर 100% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।

अफगानिस्तान में ‘सफेद सोना’: लिथियम का विशाल भंडाररेयर अर्थ ही नहीं, अफगानिस्तान के पास लिथियम का भी दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक होने का अनुमान है।लिथियम को “सफेद सोना” कहा जाता है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।आज जब भारत “ईवी मिशन 2030” की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, अफगानिस्तान के साथ साझेदारी भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता दोनों का मार्ग खोल सकती है।

भारत-अफगानिस्तान: नया रणनीतिक अध्यायमुत्ताकी और जयशंकर की मुलाकात को विशेषज्ञ भारत-अफगान रिश्तों के नए युग की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।दोनों देशों ने चाबहार बंदरगाह के ज़रिए मध्य एशिया तक व्यापार मार्ग को सशक्त करने पर भी चर्चा की।अगर भारत अफगानिस्तान के खनिज क्षेत्र में निवेश करता है, तो यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और सामरिक हितों की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

विश्लेषण:

भारत के लिए सुनहरा मौकाविशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान का निमंत्रण भारत के लिए सिर्फ़ एक व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक रणनीति है।भारत यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो —1. चीन के रेयर अर्थ दबदबे को चुनौती दी जा सकती है,2. दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में भारत की भूमिका मज़बूत होगी,3. और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत एक निर्णायक खिलाड़ी बन सकता है।

निष्कर्ष

आज जब दुनिया “ग्रीन एनर्जी रेवोल्यूशन” की ओर बढ़ रही है, तब रेयर अर्थ और लिथियम नए “तेल” की तरह बन चुके हैं।

अफगानिस्तान ने भारत को अपने खनिज भंडार का दरवाज़ा खोलने का न्योता दिया है — अब यह भारत पर निर्भर करता है कि वह इस रणनीतिक चाबी से चीन के एकाधिकार का ताला खोल पाता है या नहीं।

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