बिहार में कानून की तीन तस्वीरें: सुबह एनकाउंटर, शाम लूट और रात को कुचला गया सिपाही पुलिस की गोली, अपराधियों की बेखौफी और सिस्टम की थकी हुई सांसें

बी के झा

NSK

पटना/मुजफ्फरपुर/औरंगाबाद, 11 फरवरी

बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को समझना हो तो किसी रिपोर्ट या आंकड़े की जरूरत नहीं।मंगलवार का दिन ही काफी है—सुबह पटना में एनकाउंटर,शाम मुजफ्फरपुर में ज्वेलरी शॉप लूट,और रात में वाहन चेकिंग कर रहे सिपाही की कुचलकर हत्या।तीन घटनाएं, तीन जगहें—लेकिन सवाल एक ही:क्या बिहार में कानून अब भी अपराधियों पर भारी है, या अपराधियों के हाथों में खेल रहा है?

सुबह: गायघाट पुल के नीचे गोलियां चलीं पटना में मंगलवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब गायघाट पुल के नीचे एसटीएफ और एक अपराधी के बीच मुठभेड़ हो गई।एसटीएफ ने अपराधी के पैर में गोली मारी, जिससे वह घायल हो गया।घायल अपराधी को इलाज के लिए एनएमसीएच में भर्ती कराया गया है।फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि—वह अपराधी वहां क्यों आया था?

क्या वह किसी बड़ी वारदात की फिराक में था?

या फिर यह किसी नेटवर्क का हिस्सा है?

पुलिस के लिए यह एक टैक्टिकल सक्सेस मानी जा रही है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या एनकाउंटर अपराध का इलाज है, या सिर्फ तात्कालिक राहत?

शाम: सात मिनट में ज्वेलरी शॉप साफ उसी दिन शाम 6:33 बजे, मुजफ्फरपुर सदर थाना क्षेत्र के सुस्ता में अपराधियों ने बेखौफी की हद पार कर दी।बैंक के पास स्थित गोल्डेन ज्वेलर्स में हेलमेट पहने चार हथियारबंद अपराधी घुसे।कनपट्टी पर पिस्टल सटाई सिर झुकवाया पीठ पर पिस्टल के बट से मारा गहने और कैश पिट्ठू बैग में भरेऔर महज सात मिनट में 6:40 बजे फरार हो गए।दुकानदार धर्मेंद्र साह के अनुसार,करीब 35 ग्राम सोना और तीन किलो चांदी, कुल कीमत लगभग 10 लाख रुपये की लूट हुई।हालांकि पुलिस ने फिलहाल चार लाख रुपये की लूट की पुष्टि की है।यह लूट केवल संपत्ति की नहीं थी—यह पुलिस की मौजूदगी, खौफ और खुफिया तंत्र की भी लूट थी।

रात: ड्यूटी पर सिपाही कुचल दिया गया दिन की तीसरी और सबसे दर्दनाक घटना औरंगाबाद जिले से सामने आई।पटना–औरंगाबाद मुख्य मार्ग पर बलिदाद के पास वाहन चेकिंग के दौरान एक हाइवा ट्रक ने परिवहन विभाग के चलंत दस्ते के सिपाही मुकेश कुमार (27) को रौंद दिया।गंभीर रूप से घायल मुकेश को सदर अस्पताल लाया गया,जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।मुकेश कुमार—बक्सर जिले के प्रताप सागर गांव के रहने वाले थे साढ़े तीन साल से परिवहन विभाग में तैनात थे पत्नी गर्भवती है इसी महीने बहन की शादी थी कानून की रक्षा करते हुए,कानून का सिपाही खुद कानूनहीनता का शिकार हो गया।

कानूनविद: “जब ड्यूटी पर पुलिस मारी जाए, तो यह रेड अलर्ट है”

वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. सिन्हा कहते हैं—“पुलिसकर्मी की ड्यूटी के दौरान हत्या पूरे सिस्टम के लिए रेड अलर्ट है। यह बताता है कि अपराधियों को न कानून का डर है, न सजा का।”पूर्व लोक अभियोजक अशोक कुमार के अनुसार—“एनकाउंटर, लूट और पुलिसकर्मी की मौत—तीनों घटनाएं बताती हैं कि कानून-व्यवस्था रिएक्टिव हो गई है, प्रोएक्टिव नहीं।

”शिक्षाविदों की टिप्पणी: “यह सिर्फ अपराध नहीं, प्रशासनिक थकान है”राज्य के वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. नीरज कुमार कहते हैं—“जब एक ही दिन में इतनी घटनाएं हों, तो इसे संयोग नहीं कहा जा सकता। यह प्रशासनिक थकान और नीति विफलता का संकेत है।”उनका मानना है कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव और संसाधनों की कमीअपराधियों को मनोवैज्ञानिक बढ़त दे रही है।

वरिष्ठ पत्रकार: “बिहार में अपराध अब टाइमटेबल से हो रहा है”

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश झा टिप्पणी करते हैं—“सुबह एनकाउंटर, शाम लूट और रात में हत्या—यह अब अपवाद नहीं, पैटर्न बन चुका है। अपराधी जानते हैं कि सिस्टम धीमा है।”उनके अनुसार,प्रेस रिलीज़ से कानून-व्यवस्था नहीं सुधरती।

राजनीतिक विश्लेषक: “एनकाउंटर बनाम सुशासन की बहस खोखली हो गई है”राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय रंजन कहते हैं—“एनकाउंटर को उपलब्धि बताना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि अपराधी सड़क पर क्यों हैं?

सिस्टम उन्हें पहले क्यों नहीं रोक पा रहा?”विपक्ष का सीधा हमला

बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा निशाना साधा।राजद नेता ने कहा—“आज बिहार में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और पुलिस खुद असुरक्षित है। यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।”कांग्रेस प्रवक्ता बोले—“कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। सिपाही की मौत इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।”

गृहमंत्री पर सीधा सवाल

एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—“जब से कानून-व्यवस्था की बागडोर उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों में आई है, बिहार में अपराध बेलगाम हुआ है। पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है।

निष्कर्ष:

तीन घटनाएं, एक सच्चाई पटना का एनकाउंटर,मुजफ्फरपुर की लूटऔर औरंगाबाद में सिपाही की मौत—

ये अलग-अलग खबरें नहीं हैं।ये एक ही सिस्टम की तीन दरारें हैं।आज सवाल यह नहीं है किअगला एनकाउंटर कब होगा,सवाल यह है—

क्या बिहार में आम आदमी और पुलिस दोनों सुरक्षित हैं?

क्या अपराधियों को कानून का डर बचा है?

और क्या सरकार इस सच्चाई का सामना करेगी?

अगर नहीं,तो अगली खबर किसी और पुल, किसी और दुकानया किसी और सिपाही की होगी।

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