“संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सीट का समय आ गया” — फिनलैंड राष्ट्रपति स्टब का बड़ा बयान, बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 6 मार्च

वैश्विक राजनीति के तेजी से बदलते परिदृश्य के बीच भारत की कूटनीतिक ताकत को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर जोरदार समर्थन सामने आया है। Alexander Stubb ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की निर्णयकारी संस्था United Nations Security Council (UNSC) में भारत को स्थायी सीट मिलना समय की मांग है।नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन Raisina Dialogue के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए स्टब ने न केवल भारत के लिए सुरक्षा परिषद में जगह की वकालत की, बल्कि भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को भी आधुनिक वैश्विक कूटनीति का आदर्श बताया।

बदल रही है विश्व व्यवस्था, भारत होगा निर्णायक

शक्तिस्टब ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया अब उस दौर से निकल चुकी है जहां पश्चिमी देशों का पूर्ण वर्चस्व हुआ करता था। आज वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और इस परिवर्तन में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।उनके शब्दों में,“दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और इस नई व्यवस्था को आकार देने में भारत एक प्रमुख शक्ति होगा। यदि सबसे बड़ा खिलाड़ी नहीं भी होगा तो भी वह उन देशों में होगा जो तय करेंगे कि दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।”स्टब ने कहा कि यह बदलाव वैसा ही है जैसा कभी प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध और शीत युद्ध के बाद देखने को मिला था। वैश्विक व्यवस्था के पुनर्गठन की इस प्रक्रिया में भारत जैसे देशों के फैसले आने वाले दशकों की दिशा तय करेंगे।

भारत की विदेश नीति की खुलकर तारीफ

स्टब ने भारत की विदेश नीति को “यथार्थवादी और संतुलित” बताते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को यह दिखाया है कि किसी भी देश के लिए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता कितनी महत्वपूर्ण होती है।उन्होंने कहा,“भारत की विदेश नीति मुझे इसलिए प्रभावित करती है क्योंकि आप किसी भ्रम में नहीं रहते। आपके फैसले वैश्विक वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। आपने दुनिया को यह सिखाया है कि रणनीतिक सावधानी और स्वतंत्र निर्णय क्षमता कितनी अहम है।

”कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह टिप्पणी भारत की उस नीति की ओर संकेत करती है जिसे आज “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” कहा जाता है — यानी किसी एक शक्ति गुट पर निर्भर हुए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेना।पहले भी कर चुके हैं भारत का समर्थन यह पहली बार नहीं है जब स्टब ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। नवंबर 2025 में भी उन्होंने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना 21वीं सदी की वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती और इसमें बदलाव जरूरी है।उन्होंने साफ कहा था कि“यदि सुरक्षा परिषद का विस्तार होता है और भारत को उसमें स्थायी सीट नहीं मिलती, तो यह एक बड़ी ऐतिहासिक भूल होगी।

”क्यों जरूरी है UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत की दावेदारी कई मजबूत आधारों पर टिकती है—विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देशविश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था शांति अभियानों में सबसे बड़ा योगदान देने वाले देशों में शामिल परमाणु शक्ति और क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है, जबकि आज की वैश्विक शक्ति संरचना पूरी तरह बदल चुकी है।

रायसीना डायलॉग: वैश्विक कूटनीति का मंच

नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंचों में से एक बन चुका है। इस मंच पर दुनिया भर के नेता, रणनीतिक विशेषज्ञ, नीति निर्माता और राजनयिक वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं।स्टब ने कहा कि इस सम्मेलन को लगातार बढ़ते हुए देखना बेहद सुखद है और भारत ने इसे वैश्विक नीति विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बना दिया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

भारत सरकार लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करती रही है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आज की दुनिया की वास्तविकताओं को देखते हुए सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव अपरिहार्य है।भारत का तर्क है कि यदि वैश्विक संस्थाएं वर्तमान समय के अनुरूप नहीं बदलीं तो उनकी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होंगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने भी इस समर्थन को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि बताया है। कई नेताओं का कहना है कि भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए सरकार को और आक्रामक कूटनीतिक रणनीति अपनानी चाहिए।बदलती दुनिया में भारत की निर्णायक भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति “ग्लोबल साउथ” के देशों के इर्द-गिर्द घूम सकती है। ऐसे में भारत का उदय केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति का मामला नहीं है, बल्कि वह वैश्विक शासन व्यवस्था के नए ढांचे को भी प्रभावित करेगा।फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब के शब्दों में —“दुनिया की नई व्यवस्था कैसी होगी, यह काफी हद तक भारत जैसे देशों के फैसलों पर निर्भर करेगा।”और यही कारण है कि आज वैश्विक मंचों पर भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट की मांग पहले से कहीं अधिक जोर पकड़ती दिखाई दे रही है।

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