बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 28 मार्च
दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Congressional Research Service (CRS) की हालिया रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि Pakistan आज भी भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों का सुरक्षित गढ़ बना हुआ है।रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय कई आतंकी संगठन न केवल जीवित हैं, बल्कि वे बेखौफ होकर Jammu and Kashmir को निशाना बनाने की रणनीतियाँ भी तैयार कर रहे हैं।
आतंक का नेटवर्क: संगठित, संरक्षित और सक्रिय
CRS की ‘इन फोकस’ रिपोर्ट में 15 आतंकी संगठनों का विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिनमें कई को US State Department द्वारा “Foreign Terrorist Organization (FTO)” घोषित किया जा चुका है।इनमें प्रमुख हैं:Lashkar-e-Taiba (LeT)Jaish-e-Mohammed (JeM)Hizbul Mujahideen (HM)Harkat-ul-Jihad al-Islami (HUJI)Harkat-ul-Mujahideen (HuM)
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये संगठन अब “छोटे-छोटे नेटवर्क” के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे इनका पता लगाना और खत्म करना और कठिन हो गया है।लश्कर और जैश: पुराने नाम,
नई रणनीति
विशेष रूप से Lashkar-e-Taiba और Jaish-e-Mohammed को सबसे बड़ा खतरा बताया गया है।लश्कर-ए-तैयबा, जिसने 2008 Mumbai Attacks को अंजाम दिया, अब भी सक्रिय है जैश-ए-मोहम्मद, Masood Azhar के नेतृत्व में, भारत विरोधी अभियानों में जुटा है रिपोर्ट बताती है कि ये संगठन नाम बदलकर और नए फ्रंट बनाकर प्रतिबंधों से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी: “यह केवल सुरक्षा नहीं, रणनीतिक चुनौती है”
भारतीय रक्षा विश्लेषकों के अनुसार:“पाकिस्तान की नीति ‘डिनायल और ड्यूल गेम’ पर आधारित है—एक ओर वह आतंक के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर इन संगठनों को अप्रत्यक्ष संरक्षण देता है।”विशेषज्ञ मानते हैं कि:आतंकी ढांचे को “पूरी तरह खत्म” करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है
आतंकवाद को “रणनीतिक संपत्ति” (Strategic Asset) के रूप में देखा जाता हैयह भारत के खिलाफ “लो-इंटेंसिटी वॉरफेयर” का हिस्सा है
राजनीतिक विश्लेषण:
पीड़ित भी, संरक्षक भीCRS रिपोर्ट तैयार करने वाले दक्षिण एशिया विशेषज्ञों के अनुसार, Pakistan का चरित्र दोहरा है:एक ओर वह Balochistan और Khyber Pakhtunkhwa में आंतरिक हिंसा से जूझ रहा है दूसरी ओर, वह उन संगठनों को पनाह दे रहा है जो पड़ोसी देशों में आतंक फैलाते हैं यह “Victim and Sponsor” मॉडल दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मदरसा नेटवर्क और कट्टरपंथ:
जड़ें अब भी मजबूत रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान के कुछ मदरसों में अब भी ऐसी विचारधाराएँ पढ़ाई जा रही हैं जो:कट्टरपंथ को बढ़ावा देती को आतंकी संगठनों की ओर आकर्षित करती हैं हालांकि पाकिस्तान ने 2014 में “नेशनल एक्शन प्लान” शुरू किया था, लेकिन उसका प्रभाव सीमित ही रहा है।
भारत का रुख: “आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते”
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि:सीमा पार आतंकवाद खत्म किए बिना शांति संभव नहीं पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद आतंकी ढांचे पर ठोस कार्रवाई करनी होगी इस रिपोर्ट ने Government of India के इस रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती दी है।
अंतरराष्ट्रीय असर: वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा
यह मुद्दा केवल भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं है।रिपोर्ट के अनुसार:कई संगठन वैश्विक आतंकी नेटवर्क जैसे Al-Qaeda से जुड़े हैंइनकी गतिविधियाँ अफगानिस्तान और अन्य क्षेत्रों तक फैली हुई हैंइससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक है।
निष्कर्ष:
अधूरी कार्रवाई, बढ़ता खतरा
CRS की रिपोर्ट एक बार फिर यह साबित करती है किPakistan में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अधूरी है—और शायद जानबूझकर अधूरी रखी गई है।जब तक:आतंकी ढांचे को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जाता कट्टरपंथी विचारधाराओं पर रोक नहीं लगतीऔर दोहरे रवैये को खत्म नहीं किया जाता तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी शांति केवल एक सपना ही बनी रहेगी।
सम्पादकीय
आतंकवाद केवल सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि विश्वास का संकट है।जब एक देश खुद को पीड़ित भी बताए और उसी समय खतरे का स्रोत भी बना रहे—
तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत होती है।
